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एग्जाम फोबिया में बच्चे, शार्टकट की तैयारी
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मुरादाबाद।
उत्तरप्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं की तिथि नजदीक आने के साथ छात्र एवं छात्राएं एग्जाम फोबिया से घिरने लगे हैं। बोर्ड परीक्षा पास करने के लिए छात्र एवं छात्राएं मॉडल पेपर, पाकेट बुक और गाइड जैसे शार्टकट किताबों का सहारा ले रहे हैं। बाजार में इन किताबों की मांग बढ़ गई है। शिक्षकों का कहना है कि शार्टकट तरीका खतरनाक साबित हो सकता है। छात्र एवं छात्राएं स्कूल पाठ्यक्रम के हिसाब से तैयारी करें, ताकि परीक्षा में अधिक से अधिक अंक हासिल कर सकें।
यूपी बोर्ड की सात फरवरी से परीक्षाएं हैं। आजकल हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षा संचालित हो रही हैं। प्रयोगात्मक परीक्षाएं 13 जनवरी तक हैं। कई स्कूलों में पाठ्यक्रम भी पूरा नहीं हुआ है। छात्र एवं छात्राओं के लिए रिवीजन का समय काफी कम है। वैसे भी परीक्षा सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर होने जा रही है। एक विषय का एक ही पेपर होना है। छात्र एवं छात्राओं के लिए यही सबसे बड़ी दुविधा है। छात्रों का कहना है कि पहले एक पेपर खराब होने पर दूसरे में कवर हो जाता था। लेकिन अब एक ही पेपर होने से पढ़ाई का दबाव और असमंजस की स्थिति अधिक है।
छात्रों का कहना है कि परीक्षा को लेकर मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मॉडल पेपर, पाकेट बुक और गाइड जैसे शार्टकट का सहारा ले रहे हैं। अंबिका प्रसाद इंटर कालेज के शिक्षक डा. मनोज कुमार का कहना है कि शार्टकट तरीका हमेशा सफल नहीं होता है। बाजार में बिकने वाली गाइड एवं पाकेट बुक में आधी अधूरी जानकारियां होती हैं। इन्हें पढ़ने के बाद बच्चे स्कूल में पढ़ाए गए पाठ्यक्रम से भ्रमित हो जाते हैं। इनसे बच्चों का ज्ञान कमजोर होता है और जिससे परीक्षा परिणाम प्रभावित होता है।
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आरएन इंटर कालेज के शिक्षक निवेश शर्मा के मुताबिक बोर्ड छात्रों के लिए जनवरी का महीना बेहद महत्वपूर्ण है। छात्रों को शार्टकट तरीका छोड़कर एकाग्रता से पाठ्यक्रम का रिवीजन करना चाहिए। पढ़ाए गए सभी विषयों के नोट्स तैयार कर टाइम टेबिल से पढ़ाई करने की जरूरत है। जिस विषय में कमजोर हैं उसमें अधिक समय और मेहनत की जरूरत है। इससे ही परीक्षा में अच्छे अंक हासिल कर पाएंगे।
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उत्तरप्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं की तिथि नजदीक आने के साथ छात्र एवं छात्राएं एग्जाम फोबिया से घिरने लगे हैं। बोर्ड परीक्षा पास करने के लिए छात्र एवं छात्राएं मॉडल पेपर, पाकेट बुक और गाइड जैसे शार्टकट किताबों का सहारा ले रहे हैं। बाजार में इन किताबों की मांग बढ़ गई है। शिक्षकों का कहना है कि शार्टकट तरीका खतरनाक साबित हो सकता है। छात्र एवं छात्राएं स्कूल पाठ्यक्रम के हिसाब से तैयारी करें, ताकि परीक्षा में अधिक से अधिक अंक हासिल कर सकें।
यूपी बोर्ड की सात फरवरी से परीक्षाएं हैं। आजकल हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षा संचालित हो रही हैं। प्रयोगात्मक परीक्षाएं 13 जनवरी तक हैं। कई स्कूलों में पाठ्यक्रम भी पूरा नहीं हुआ है। छात्र एवं छात्राओं के लिए रिवीजन का समय काफी कम है। वैसे भी परीक्षा सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर होने जा रही है। एक विषय का एक ही पेपर होना है। छात्र एवं छात्राओं के लिए यही सबसे बड़ी दुविधा है। छात्रों का कहना है कि पहले एक पेपर खराब होने पर दूसरे में कवर हो जाता था। लेकिन अब एक ही पेपर होने से पढ़ाई का दबाव और असमंजस की स्थिति अधिक है।
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छात्रों का कहना है कि परीक्षा को लेकर मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मॉडल पेपर, पाकेट बुक और गाइड जैसे शार्टकट का सहारा ले रहे हैं। अंबिका प्रसाद इंटर कालेज के शिक्षक डा. मनोज कुमार का कहना है कि शार्टकट तरीका हमेशा सफल नहीं होता है। बाजार में बिकने वाली गाइड एवं पाकेट बुक में आधी अधूरी जानकारियां होती हैं। इन्हें पढ़ने के बाद बच्चे स्कूल में पढ़ाए गए पाठ्यक्रम से भ्रमित हो जाते हैं। इनसे बच्चों का ज्ञान कमजोर होता है और जिससे परीक्षा परिणाम प्रभावित होता है।
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आरएन इंटर कालेज के शिक्षक निवेश शर्मा के मुताबिक बोर्ड छात्रों के लिए जनवरी का महीना बेहद महत्वपूर्ण है। छात्रों को शार्टकट तरीका छोड़कर एकाग्रता से पाठ्यक्रम का रिवीजन करना चाहिए। पढ़ाए गए सभी विषयों के नोट्स तैयार कर टाइम टेबिल से पढ़ाई करने की जरूरत है। जिस विषय में कमजोर हैं उसमें अधिक समय और मेहनत की जरूरत है। इससे ही परीक्षा में अच्छे अंक हासिल कर पाएंगे।