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प्रदूषण पर भारी पड़ी आस् था की डुबकी
Updated Sat, 23 Jun 2018 02:09 AM IST
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मुरादाबाद।
नदियों के प्रदूषण पर शुक्रवार को आस्था की डुबकी भारी पड़ी। मौका था गंगा स्नान पर्व का। रामगंगा व गांगन नदी के जिस पानी में आचमन किया जाना भी संभव नहीं था, उसमें लोगों ने पूरी श्रद्धा से स्नान किया। दोनों नदियों के किनारे दोपहर तक मेला लगा रहा। इस दौरान महानगर में जगह-जगह ठंडे पानी और शरबत की छबील भी लगाई गईं।
रामगंगा और गांगन नदियां अपने अस्तित्व का संघर्ष कर रही हैं। पानी की कमी केचलते दोनों एतिहासिक नदियों का स्वरूप नाले जैसा हो गया है। दोनों ही नदियों में महानगर के नालों और फैक्ट्रियों के अवसिष्ट जल को प्रवाहित किया जा रहा है। ऐसे में इनमें स्नान करने योग्य स्थिति नहीं है। गंगा स्नान महापर्व की श्रद्धा केचलते शुक्रवार को सैकड़ों लोगों ने इनमें स्नान किया। काफी तादात में लोग गजरौला और ब्रजघाट स्नान को गए थे, लेकिन न जाने वालों ने रामगंगा व गांगन नदियों में स्नान किया। स्वास्थ्य और कल्याण की भावना से बच्चों और महिलाओं को स्नान कराया गया।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने रामगंगा में सात सौ और गांगन नदी में तीन सौ क्यूसेक पानी छोड़ने की मांग हरिद्वार भेजी थी। गंगा में पानी की कमी होने और गंगा स्नान के चलते अधिकारियों ने पानी देने से इंकार कर दिया। सिंचाई विभाग के एक्सईएन डीपी सिंह ने बताया कि आनन-फानन में कालागढ़ डैम से रामगंगा नदी में 20 जून की सुबह 500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे लोगोें को डुबकी लगाने में थोड़ी आसानी हो गई। अधिकारियों ने बताया कि 21 जून की रात 12 बजे से डैम से छोड़े जा रहे पानी को रोक दिया जाएगा।
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नदियों के प्रदूषण पर शुक्रवार को आस्था की डुबकी भारी पड़ी। मौका था गंगा स्नान पर्व का। रामगंगा व गांगन नदी के जिस पानी में आचमन किया जाना भी संभव नहीं था, उसमें लोगों ने पूरी श्रद्धा से स्नान किया। दोनों नदियों के किनारे दोपहर तक मेला लगा रहा। इस दौरान महानगर में जगह-जगह ठंडे पानी और शरबत की छबील भी लगाई गईं।
रामगंगा और गांगन नदियां अपने अस्तित्व का संघर्ष कर रही हैं। पानी की कमी केचलते दोनों एतिहासिक नदियों का स्वरूप नाले जैसा हो गया है। दोनों ही नदियों में महानगर के नालों और फैक्ट्रियों के अवसिष्ट जल को प्रवाहित किया जा रहा है। ऐसे में इनमें स्नान करने योग्य स्थिति नहीं है। गंगा स्नान महापर्व की श्रद्धा केचलते शुक्रवार को सैकड़ों लोगों ने इनमें स्नान किया। काफी तादात में लोग गजरौला और ब्रजघाट स्नान को गए थे, लेकिन न जाने वालों ने रामगंगा व गांगन नदियों में स्नान किया। स्वास्थ्य और कल्याण की भावना से बच्चों और महिलाओं को स्नान कराया गया।
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सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने रामगंगा में सात सौ और गांगन नदी में तीन सौ क्यूसेक पानी छोड़ने की मांग हरिद्वार भेजी थी। गंगा में पानी की कमी होने और गंगा स्नान के चलते अधिकारियों ने पानी देने से इंकार कर दिया। सिंचाई विभाग के एक्सईएन डीपी सिंह ने बताया कि आनन-फानन में कालागढ़ डैम से रामगंगा नदी में 20 जून की सुबह 500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे लोगोें को डुबकी लगाने में थोड़ी आसानी हो गई। अधिकारियों ने बताया कि 21 जून की रात 12 बजे से डैम से छोड़े जा रहे पानी को रोक दिया जाएगा।
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