{"_id":"5c6b185dbdec2253970c5089","slug":"51550522461-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली में सादगी से शुरू हुआ स्प्रिंग फेयर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली में सादगी से शुरू हुआ स्प्रिंग फेयर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद।
आईएचजीएफ स्प्रिंग दिल्ली फेयर के 47 वें संस्करण का सोमवार को सादा समारोह में शुभारंभ हो गया। पुलवामा हमले में सीआरपीएफ जवानों की शहादत के सम्मान में इस बार ईपीसीएच ने उद्घाटन समारोह को बेहद सादा रखा। किसी विशिष्ट अतिथि को बुलाने के बजाए ईपीसीएच के अध्यक्ष ओपी प्रहलादका और महानिदेशक राकेश कुमार व सीओए सदस्यों ने संयुक्त रूप से हस्तशिल्प मेले का शुभारंभ किया। मेले में करीब 110 देशों के खरीददारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। स्प्रिंग फेयर में कुल 3200 स्टॉल्स सजाए गए हैं। इनमें सर्वाधिक संख्या मुरादाबाद के निर्यातकों के स्टॉल्स की है।
ईपीसीएच के महानिदेशक राकेश कुमार के नेतृत्व में सबसे पहले सभी निर्यातकों और विदेशी थोक ग्राहकों ने भी पुलवामा हमले में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने कहा कि आईएचजीएफ दिल्ली मेला स्प्रिंग में हस्तनिर्मित उत्पादों में होम टेक्सटाइल, फर्निशिंग एवं कालीन, फ्लोर कवरिंग, लैंप एंव लाइटिंग, बाथरूम एक्सेसरीज, स्पा एवं वेलनेस, हाथ से बनी कागज की वस्तुएं आदि अनेक उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है। मेले में पहले दिन हस्तशिल्प विकास आयुक्त रत्नेश झा ने मेले का दौरा किया और उन्होंने पूर्वोत्तर के थीम पवेलियन की शुरुआत की। ईपीसीएच के अध्यक्ष ओपी प्रहलादका ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े हस्तशिल्प मेले स्प्रिंग फेयर ने हर वर्ष नई ऊंचाइयों को छुआ है। इसे लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड से मान्यता मिल चुकी है। मेले में हर दूसरे साल में हॉलों की संख्या बढ़ रही है और अब यह 15 तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि आईएचजीएफ दिल्ली फेयर ने अंतर्राष्ट्रीय खरीद समुदाय के सामने हस्तशिल्प निर्यात करने वाले समुदाय की रचनात्मकता और कड़ी मेहनत को प्रदर्शित करने का विश्व स्तरीय मंच दिया है। इससे देश की विदेश मुद्रा की आय में भी बढ़ोत्तरी हुई है। 1986- 87 में हस्तशिल्प से विदेशी मुद्रा आय महज 387 करोड़ रुपये थी जो 2017-18 में बढ़कर 23029.36 करोड़ रुपये हो चुकी है।
उधर, मेले में मुरादाबाद के पीतल व कांच के उत्पाद विदेशी ग्राहकों की पहली पसंद बने हुए हैं। पहले दिन मुरादाबाद के स्टॉल्स पर खरीददारों की भीड़ रही। निर्यातकों का कहना है कि मेले में मंगलवार को विदेशी ग्राहकों की संख्या और भी बढ़ने की उम्मीद है। मुरादाबाद में करीब 2000 निर्यात फैक्ट्रियां हैं। करीब डेढ़ हजार निर्यातक दिल्ली फेयर में हिस्सा लेते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
आईएचजीएफ स्प्रिंग दिल्ली फेयर के 47 वें संस्करण का सोमवार को सादा समारोह में शुभारंभ हो गया। पुलवामा हमले में सीआरपीएफ जवानों की शहादत के सम्मान में इस बार ईपीसीएच ने उद्घाटन समारोह को बेहद सादा रखा। किसी विशिष्ट अतिथि को बुलाने के बजाए ईपीसीएच के अध्यक्ष ओपी प्रहलादका और महानिदेशक राकेश कुमार व सीओए सदस्यों ने संयुक्त रूप से हस्तशिल्प मेले का शुभारंभ किया। मेले में करीब 110 देशों के खरीददारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। स्प्रिंग फेयर में कुल 3200 स्टॉल्स सजाए गए हैं। इनमें सर्वाधिक संख्या मुरादाबाद के निर्यातकों के स्टॉल्स की है।
ईपीसीएच के महानिदेशक राकेश कुमार के नेतृत्व में सबसे पहले सभी निर्यातकों और विदेशी थोक ग्राहकों ने भी पुलवामा हमले में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने कहा कि आईएचजीएफ दिल्ली मेला स्प्रिंग में हस्तनिर्मित उत्पादों में होम टेक्सटाइल, फर्निशिंग एवं कालीन, फ्लोर कवरिंग, लैंप एंव लाइटिंग, बाथरूम एक्सेसरीज, स्पा एवं वेलनेस, हाथ से बनी कागज की वस्तुएं आदि अनेक उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है। मेले में पहले दिन हस्तशिल्प विकास आयुक्त रत्नेश झा ने मेले का दौरा किया और उन्होंने पूर्वोत्तर के थीम पवेलियन की शुरुआत की। ईपीसीएच के अध्यक्ष ओपी प्रहलादका ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े हस्तशिल्प मेले स्प्रिंग फेयर ने हर वर्ष नई ऊंचाइयों को छुआ है। इसे लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड से मान्यता मिल चुकी है। मेले में हर दूसरे साल में हॉलों की संख्या बढ़ रही है और अब यह 15 तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि आईएचजीएफ दिल्ली फेयर ने अंतर्राष्ट्रीय खरीद समुदाय के सामने हस्तशिल्प निर्यात करने वाले समुदाय की रचनात्मकता और कड़ी मेहनत को प्रदर्शित करने का विश्व स्तरीय मंच दिया है। इससे देश की विदेश मुद्रा की आय में भी बढ़ोत्तरी हुई है। 1986- 87 में हस्तशिल्प से विदेशी मुद्रा आय महज 387 करोड़ रुपये थी जो 2017-18 में बढ़कर 23029.36 करोड़ रुपये हो चुकी है।
विज्ञापन
उधर, मेले में मुरादाबाद के पीतल व कांच के उत्पाद विदेशी ग्राहकों की पहली पसंद बने हुए हैं। पहले दिन मुरादाबाद के स्टॉल्स पर खरीददारों की भीड़ रही। निर्यातकों का कहना है कि मेले में मंगलवार को विदेशी ग्राहकों की संख्या और भी बढ़ने की उम्मीद है। मुरादाबाद में करीब 2000 निर्यात फैक्ट्रियां हैं। करीब डेढ़ हजार निर्यातक दिल्ली फेयर में हिस्सा लेते हैं।
विज्ञापन