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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   38 people are spending four crores every year on gunners In craze of Hanak At Moradabad

Exclusive: हनक की सनक में 38 लोग हर साल गनर पर खर्च कर रहे चार करोड़, राजनीतिज्ञों के साथ-साथ निर्यातक शामिल

Tue, 02 Jan 2024 12:01 PM IST
शाहरुख खान जितेंद्र कुमार, अमर उजाला, मुरादाबाद
जितेंद्र कुमार, अमर उजाला, मुरादाबाद Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 02 Jan 2024 12:01 PM IST
सार

यूपी की मुरादाबाद में हनक की सनक में 38 लोग हर साल गनर पर चार करोड़ खर्च कर रहे हैं। इनमें राजनीतिज्ञों के साथ-साथ निर्यातक शामिल हैं। शिक्षण संस्थान संचालक भी शामिल हैं। खास श्रेणी न हो तो एक गनरधारी को हर माह देने 1.20 लाख रुपये होते हैं।

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38 people are spending four crores every year on gunners In craze of Hanak At Moradabad
मुरादाबाद में गश्त करती पुलिस - फोटो : पीआरओ

विस्तार

सरकारी गनर या शेडो एक दौर में मंत्री, जनप्रतिनिधि और वीवीआईपी के साथ ही नजर आते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। समाज में हनक बनाने और खुद को औरों से अलग दिखाने के लिए तमाम लोगों ने सरकारी खाते से गनर ले रखे हैं। 
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जिले में 38 लोग ऐसे हैं, जो अपनी जेब से पैसा देकर हथियारबंद वर्दीधारी साथ लेकर घूम रहे हैं। इनमें राजनीतिक लोगों के अलावा निर्यातक, कारोबारी, शिक्षण संस्थाओं के संचालक शामिल हैं। ऐसे लोग हर माह 33.60 लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा कराए जा रहे हैं। इस हिसाब से हर साल गनर पर चार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।
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इनमें से 10 लोग सरकारी गनर का 100 प्रतिशत भुगतान करते हैं। इस श्रेणी वालों में प्रति व्यक्ति 1.20 लाख रुपये मासिक लिया जाता है यानी सौ फीसदी भुगतान करके गनर लेने वालों से 12 लाख रुपये हर माह सरकारी खजाने में पहुंचते हैं। 
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इसके अलावा 22 लोग 75 प्रतिशत भुगतान करके सरकारी गनर की सुविधा ले रहे हैं। इन लोगों से हर महीने 19.80 लाख रुपये वसूले जाते हैं। जिले में छह लोग ऐसे हैं, जिन्हें 25 प्रतिशत भुगतान पर गनर मिला हुआ है।

दो कैटेगरी में मिलती है सुरक्षा
पुलिस विभाग दो तरह से लोगों को सुरक्षा मुहैया कराता है। ए कैटेगरी में वे लोग आते हैं। जो किसी आपराधिक मामले में वादी, गवाह या पैरोकार हैं। ऐसे लोगों को कोर्ट या अधिकारियों के निर्देश पर मुफ्त सुरक्षा मिलती है। बी कैटेगरी में ऐसे लोग आते हैं जो अपनी जान को खतरा बताकर सुरक्षा की मांग करते हैं। इन्हें परिस्थिति के अनुसार 10 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक भुगतान लेकर गनर दिया जाता है।

 

पूर्व विधायक और पूर्व सांसद को 10 प्रतिशत भुगतान पर गनर
सांसद, राज्यसभा सदस्य, विधायक, एमएलए को बिना शुल्क लिए गनर दिया जाता है। मेयर और जिला पंचायत अध्यक्ष तथा सांविधानिक पद वाले लोगों को भी। पूर्व सांसद और पूर्व विधायक को 10 प्रतिशत भुगतान पर गनर की सुविधा मिलती है।

 

शासन से होता है अंतिम निर्णय
अगर कोई व्यक्ति सरकारी गनर की मांग करता है तो एसएसपी एलआईयू से रिपोर्ट लेते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर डीएम, एसएसपी की मौजूदगी वाली जिला स्तरीय समिति संस्तुति करती है। फिर यह प्रस्ता कमिश्नर की मौजूदगी वाली मंडलीय स्तरीय समिति के सामने रखा जाता है। कमिश्नर की संस्तुति के बाद शासन स्तर पर उच्च स्तरीय समिति अंतिम फैसला लेती है। इसके बाद शुल्क तय किया जाता है।

पुलिस कर्मी के वेतन से तय होता है गनर का भुगतान
एसएसपी हेमराज मीना ने बताया कि समिति की रिपोर्ट के बाद शासन स्तर से सुरक्षा मुहैया कराई जाती है। कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, दरोगा के वेतन के अनुसार गनर लेने वालों से भुगतान लिया जाता है। जिसमें 100 प्रतिशत, 75 प्रतिशत, 25 प्रतिशत और 10 प्रतिशत भुगतान की अलग-अलग श्रेणियों में जिले में 38 लोगों को गनर उपलब्ध कराए गए हैं।

खर्च पता चलते ही इंस्टीट्यूट संचालक ने नहीं लिया गनर
शहर में एक इंस्टीट्यूट संचालक ने गनर के लिए आवेदन किया था। उन्होंने अपनी जान को खतरा बताते हुए अफसरों से गनर की मांग की थी। जिला स्तरीय समिति की रिपोर्ट पर शासन से गनर उपलब्ध कराने के आदेश हुए थे। इसके लिए संचालक को हर माह 1.20 लाख रुपये जमा करने थे। यह जानकारी मिलते ही उन्होंने स्वीकृति के बाद भी गनर लेने से इन्कार कर दिया।
 
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