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आधे बच्चों ने नहीं खाया मध्याह्न भोजन
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मुरादाबाद। सरकारी स्कूलों में वितरण होने वाला मध्याह्न भोजन बच्चों को पसंद नहीं आ रहा है। मुरादाबाद जिले में पिछले शैक्षिक सत्र में नामांकित आधे बच्चों ने ही मध्याह्न भोजन लिया। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने प्रदेश भर की लिस्ट जारी की है। इसमें 60 फीसदी से कम बच्चे लाभान्वित होने वाले जिले शामिल हैं। प्राधिकरण ने नए शैक्षिक सत्र से स्कूलों में पहुंचने वाले शत प्रतिशत बच्चों को योजना से लाभान्वित करने के निर्देश जारी किए हैं।
प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन वितरण होता है। मुरादाबाद शहर एवं कई पंचायतों में भोजन वितरण का अनुबंध एनजीओ से है। 2018-2019 शैक्षिक सत्र में मध्याह्न योजना में करीब एक लाख 83 हजार बच्चे पंजीकृत थे। पिछले शैक्षिक सत्र में भोजन वितरण विवादों में रहा। बच्चों को कभी सूखी रोटियां तो कभी ठंडे चावल खिलाया गया। दाल और दूध में पानी अधिक मिलाए जाने की शिकायतें रहीं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अलावा राज्य बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष ने स्कूलों में छापामारी की। स्कूलों में साप्ताहिक रोस्टर से खाने का वितरण नहीं हुआ। भोजन की गुणवत्ता खराब होने से कई बच्चों ने स्कूल का खाना बंद कर दिया। बच्चे घरों से टिफिन ले जाने लगे। इससे स्कूलों में मध्याह्न भोजन खाने वाले बच्चों की संख्या गिर गई।
मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने पिछले शैक्षिक सत्र में 60 फीसदी से कम बच्चे लाभान्वित होने वाले जिलों की लिस्ट जारी की है। इसमें मुरादाबाद जिला भी शामिल है। मुरादाबाद जिले में प्राथमिक स्कूलों में 55 फीसदी और उच्च प्राथमिक स्कूलों में 53 फीसदी बच्चों ने ही स्कूलों में खाना खाया है। बाकी बच्चों ने गुणवत्ता खराब होने के चलते भोजन नहीं खाया है। प्राधिकरण निदेशक अब्दुल समद ने नए शैक्षिक सत्र के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं। निदेशक ने कहा कि स्कूलों में उपस्थित शत प्रतिशत बच्चों को योजना से लाभान्वित किया जाए। भोजन की गुणवत्ता सुधारी जाए और बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं समन्वय के स्तर पर लगातार निगरानी की जाए।
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प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन वितरण होता है। मुरादाबाद शहर एवं कई पंचायतों में भोजन वितरण का अनुबंध एनजीओ से है। 2018-2019 शैक्षिक सत्र में मध्याह्न योजना में करीब एक लाख 83 हजार बच्चे पंजीकृत थे। पिछले शैक्षिक सत्र में भोजन वितरण विवादों में रहा। बच्चों को कभी सूखी रोटियां तो कभी ठंडे चावल खिलाया गया। दाल और दूध में पानी अधिक मिलाए जाने की शिकायतें रहीं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अलावा राज्य बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष ने स्कूलों में छापामारी की। स्कूलों में साप्ताहिक रोस्टर से खाने का वितरण नहीं हुआ। भोजन की गुणवत्ता खराब होने से कई बच्चों ने स्कूल का खाना बंद कर दिया। बच्चे घरों से टिफिन ले जाने लगे। इससे स्कूलों में मध्याह्न भोजन खाने वाले बच्चों की संख्या गिर गई।
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मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने पिछले शैक्षिक सत्र में 60 फीसदी से कम बच्चे लाभान्वित होने वाले जिलों की लिस्ट जारी की है। इसमें मुरादाबाद जिला भी शामिल है। मुरादाबाद जिले में प्राथमिक स्कूलों में 55 फीसदी और उच्च प्राथमिक स्कूलों में 53 फीसदी बच्चों ने ही स्कूलों में खाना खाया है। बाकी बच्चों ने गुणवत्ता खराब होने के चलते भोजन नहीं खाया है। प्राधिकरण निदेशक अब्दुल समद ने नए शैक्षिक सत्र के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं। निदेशक ने कहा कि स्कूलों में उपस्थित शत प्रतिशत बच्चों को योजना से लाभान्वित किया जाए। भोजन की गुणवत्ता सुधारी जाए और बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं समन्वय के स्तर पर लगातार निगरानी की जाए।
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