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मौत के साए में बस गई दर्जनों कालोनियां
Updated Sun, 23 Sep 2018 02:13 AM IST
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मुरादाबाद।
महानगर में मौत के साए में कालोनियां बसती चली गईं। सिर पर मंडराती मौत के नीचे आशियाना बसाने की जद्दोजहद अभी भी जारी है। हाईटेंशन विद्युत लाइन से ताजिया टकराने के बाद जब लोगों में भगदड़ मची तो लाइन के नीचे बसे मकानों के लोगों की रुह भी कांप उठी। लाइनों के नीचे भवन बनने के दौरान किसी अधिकारी ने इसको गंभीरता से नहंी लिया और अब गुस्साए लोग लाइन को हटवाने की मांग करने लगे है।
विद्युत लाइनों के नीचे आवास बसाने की अनुमति नही है। नियमानुसार भवन बनाने वालों पर पावर कारपोरेशन ट्रांसमिशन के अफसरों को पहले ही कार्रवाई करनी चाहिए थी। आवासों को गिराने के साथ ही आरोपियों पर कार्रवाई करने का नियम है। बड़ी विद्युत लाइनों के नीचे आवास बनाने के अपने नियम हैं। इनकी ऊंचाई यानि मंजिल तय होती हैं। उससे ज्यादा निर्माण नहीं किया जा सकता है। उसके बावजूद आवास बनाने का सिलसिला बादस्तूर जारी है। ताजिया के घटनास्थल वाले क्षेत्रों में ही मंसूर कालोनी, दीना नगर, बनिया, कचोलना, ढक्का, रहमतनगर, भदौड़ा, हनुमान मूर्ति, रामपुर दोराहा और जयंतिपुर बसती चली गईं।
दिनरात भय का साया -
सर्दियों में तो खतरा थोड़ा कम रहता है, लेकिन बरसात और गर्मी में हर पल मौत का डर सताता है। गर्मियों में विद्युत लाइन के तार फैलकर कई फीट नीचे को लटक जाते हैं। इससे मकानों में करंट उतरने का डर लगता है। बरसात में पानी की सीलन से भी खतरा बना रहता है।
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मैं मकान गिराने को तैयार हूं -
और लोगों को देखते हुए हमने भी मकान बनवा लिया था। अब दिन रात खतरा बना रहता है। मैं विद्युत लाइन के नीचे आ रहे मकान के हिस्से को गिराने को तैयार हूं। छोटे मकान में रह लेंगे, लेकिन सुरक्षित तो रहेंगे। अब लाइन में दिनरात आपूर्ति रहने के कारण गिराने का भी मौका नहीं मिल रहा है। - अबु तालिब, निवासी जयंतीपुर ।
हम लगातार नोटिस जारी करते हैं। पुलिस-प्रशासन में शिकायत की जाती हैं। उस समय न तो पुलिस-प्रशासन का अपेक्षित सहयोग मिलता है और न ही कोई व्यक्ति समझता है। हमारे पास प्रशासनिक अधिकार नहीं होते हैं। लाइन को न तो हटाना संभव है और न ही ऊंचा करना। लोगों को सुरक्षा की खातिर लाइन के नीचे निर्माण कराने से रुकना होगा। - सुबोध त्यागी, अधिशासी अभियंता - ट्रांसमिशन।
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महानगर में मौत के साए में कालोनियां बसती चली गईं। सिर पर मंडराती मौत के नीचे आशियाना बसाने की जद्दोजहद अभी भी जारी है। हाईटेंशन विद्युत लाइन से ताजिया टकराने के बाद जब लोगों में भगदड़ मची तो लाइन के नीचे बसे मकानों के लोगों की रुह भी कांप उठी। लाइनों के नीचे भवन बनने के दौरान किसी अधिकारी ने इसको गंभीरता से नहंी लिया और अब गुस्साए लोग लाइन को हटवाने की मांग करने लगे है।
विद्युत लाइनों के नीचे आवास बसाने की अनुमति नही है। नियमानुसार भवन बनाने वालों पर पावर कारपोरेशन ट्रांसमिशन के अफसरों को पहले ही कार्रवाई करनी चाहिए थी। आवासों को गिराने के साथ ही आरोपियों पर कार्रवाई करने का नियम है। बड़ी विद्युत लाइनों के नीचे आवास बनाने के अपने नियम हैं। इनकी ऊंचाई यानि मंजिल तय होती हैं। उससे ज्यादा निर्माण नहीं किया जा सकता है। उसके बावजूद आवास बनाने का सिलसिला बादस्तूर जारी है। ताजिया के घटनास्थल वाले क्षेत्रों में ही मंसूर कालोनी, दीना नगर, बनिया, कचोलना, ढक्का, रहमतनगर, भदौड़ा, हनुमान मूर्ति, रामपुर दोराहा और जयंतिपुर बसती चली गईं।
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दिनरात भय का साया -
सर्दियों में तो खतरा थोड़ा कम रहता है, लेकिन बरसात और गर्मी में हर पल मौत का डर सताता है। गर्मियों में विद्युत लाइन के तार फैलकर कई फीट नीचे को लटक जाते हैं। इससे मकानों में करंट उतरने का डर लगता है। बरसात में पानी की सीलन से भी खतरा बना रहता है।
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मैं मकान गिराने को तैयार हूं -
और लोगों को देखते हुए हमने भी मकान बनवा लिया था। अब दिन रात खतरा बना रहता है। मैं विद्युत लाइन के नीचे आ रहे मकान के हिस्से को गिराने को तैयार हूं। छोटे मकान में रह लेंगे, लेकिन सुरक्षित तो रहेंगे। अब लाइन में दिनरात आपूर्ति रहने के कारण गिराने का भी मौका नहीं मिल रहा है। - अबु तालिब, निवासी जयंतीपुर ।
हम लगातार नोटिस जारी करते हैं। पुलिस-प्रशासन में शिकायत की जाती हैं। उस समय न तो पुलिस-प्रशासन का अपेक्षित सहयोग मिलता है और न ही कोई व्यक्ति समझता है। हमारे पास प्रशासनिक अधिकार नहीं होते हैं। लाइन को न तो हटाना संभव है और न ही ऊंचा करना। लोगों को सुरक्षा की खातिर लाइन के नीचे निर्माण कराने से रुकना होगा। - सुबोध त्यागी, अधिशासी अभियंता - ट्रांसमिशन।