{"_id":"5b43cb7d4f1c1bae288b593d","slug":"31531169661-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रवेश ले लो... पर खेलने की मत कहना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रवेश ले लो... पर खेलने की मत कहना
Updated Tue, 10 Jul 2018 02:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद।
खेल को बढ़ावा देने के लिए सरकार तरह-तरह के प्रयास कर रही है। खिलाड़ियों के लिए आने-जाने का भत्ता बढ़ाने के साथ सुविधाएं भी बढ़ाई गई हैं, लेकिन कालेजों की स्थिति इसके उलट है। वहां पर खिलाड़ियों को खेल कोटे के तहत प्रवेश तो दिया जाता है, लेकिन उनके अभ्यास के लिए मैदान तक की सुविधा नहीं है। संसाधनों के अभाव में खिलाड़ी प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग भी नहीं कर पाते हैं। प्राचार्यों का कहना है कि व्यवस्था के अनुरूप खेलों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे।
गत वर्ष नवंबर माह में एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में कई कालेजों की टीम ही नहीं पहुंची थी। व्यक्तिगत प्रतियोगिताओं के जो खिलाड़ी गए थे, उनके पास ट्रैक सूट या जूते तक नहीं थे। मार्च पास्ट के समय खिलाड़ियों ने चप्पल और जींस पहनी हुई थी। खिलाड़ियों का कहना है कि कालेजों से मिलने वाली किट को बारी-बारी से इस्तेमाल किया जाता है।
वार्षिक प्रतियोगिता के नाम पर खानापूर्ति
हिंदू कालेज, दयानंद आर्य कन्या महाविद्यालय में बास्केटबाल के लिए कोर्ट है। इन दोनों कालेजों सहित एमएच कालेज और गोकुलदास कालेज में भी दौड़ व अन्य खेलों के अभ्यास के लिए पर्याप्त मैदान ही नहीं है। वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता में कुछ कालेज आठ सौ मीटर की दौड़ को सौ मीटर के गोले में दो-तीन चक्कर लगवाकर पूरा करा लेते हैं।
विज्ञापन
घट गई खेल कोटे में संख्या
खेल के क्षेत्र में केजीके कालेज की पहचान मुरादाबाद में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय में है। बड़ा मैदान होने के अलावा जिम्नेजियम हाल को भी एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में सबसे अच्छा माना जाता है। इसके बावजूद खिलाड़ियों का रुझान अब कम हो रहा है। प्रवेश नियंत्रक डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि गत वर्ष खेल कोटे से जहां 20 प्रवेश हुए थे, वहीं इस बार सिर्फ आठ विद्यार्थियों ने खेल कोटे का लाभ लेने के लिए आवेदन किया है।
वर्जन...
अभ्यास के लिए मैदान न होने की वजह से खिलाड़ी सोनकपुर स्टेडियम में अभ्यास करते हैं। कालेज को गत वर्ष स्थायी खेल अधिकारी मिल चुके हैं। अब वह खेलों के विकास के लिए जो नीति बनाएंगे, उसी के अनुरूप कार्य किया जाएगा।
डॉ. आरके बंसल, प्राचार्य, हिंदू कालेज।
विज्ञापन
खेल को बढ़ावा देने के लिए सरकार तरह-तरह के प्रयास कर रही है। खिलाड़ियों के लिए आने-जाने का भत्ता बढ़ाने के साथ सुविधाएं भी बढ़ाई गई हैं, लेकिन कालेजों की स्थिति इसके उलट है। वहां पर खिलाड़ियों को खेल कोटे के तहत प्रवेश तो दिया जाता है, लेकिन उनके अभ्यास के लिए मैदान तक की सुविधा नहीं है। संसाधनों के अभाव में खिलाड़ी प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग भी नहीं कर पाते हैं। प्राचार्यों का कहना है कि व्यवस्था के अनुरूप खेलों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे।
गत वर्ष नवंबर माह में एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में कई कालेजों की टीम ही नहीं पहुंची थी। व्यक्तिगत प्रतियोगिताओं के जो खिलाड़ी गए थे, उनके पास ट्रैक सूट या जूते तक नहीं थे। मार्च पास्ट के समय खिलाड़ियों ने चप्पल और जींस पहनी हुई थी। खिलाड़ियों का कहना है कि कालेजों से मिलने वाली किट को बारी-बारी से इस्तेमाल किया जाता है।
विज्ञापन
वार्षिक प्रतियोगिता के नाम पर खानापूर्ति
हिंदू कालेज, दयानंद आर्य कन्या महाविद्यालय में बास्केटबाल के लिए कोर्ट है। इन दोनों कालेजों सहित एमएच कालेज और गोकुलदास कालेज में भी दौड़ व अन्य खेलों के अभ्यास के लिए पर्याप्त मैदान ही नहीं है। वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता में कुछ कालेज आठ सौ मीटर की दौड़ को सौ मीटर के गोले में दो-तीन चक्कर लगवाकर पूरा करा लेते हैं।
विज्ञापन
घट गई खेल कोटे में संख्या
खेल के क्षेत्र में केजीके कालेज की पहचान मुरादाबाद में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय में है। बड़ा मैदान होने के अलावा जिम्नेजियम हाल को भी एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में सबसे अच्छा माना जाता है। इसके बावजूद खिलाड़ियों का रुझान अब कम हो रहा है। प्रवेश नियंत्रक डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि गत वर्ष खेल कोटे से जहां 20 प्रवेश हुए थे, वहीं इस बार सिर्फ आठ विद्यार्थियों ने खेल कोटे का लाभ लेने के लिए आवेदन किया है।
वर्जन...
अभ्यास के लिए मैदान न होने की वजह से खिलाड़ी सोनकपुर स्टेडियम में अभ्यास करते हैं। कालेज को गत वर्ष स्थायी खेल अधिकारी मिल चुके हैं। अब वह खेलों के विकास के लिए जो नीति बनाएंगे, उसी के अनुरूप कार्य किया जाएगा।
डॉ. आरके बंसल, प्राचार्य, हिंदू कालेज।