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मंडल में खुले मौत के 217 मुहाने
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Tue, 26 Jul 2016 11:34 AM IST
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लापरवाही
- फोटो : demo
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भदोही में ट्रेन से टकराई स्कूल बस के टकरा जाने से दस बच्चों की मौत दिल को झकझोर देने वाली घटना है। हादसा मानव रहित क्रासिंग पर हुआ। मानव रहित फाटकों पर हमेशा ही खतरा बना रहता है। मुरादाबाद मंडल में 217 अनमैंड क्रासिंग हैं। जिनसे होकर हर दिन जान जोखिम में डालकर हजारों लोग गुजरते हैं।
मुरादाबाद मंडल में करीब 700 क्रासिंग हैं। इनमें से 217 क्रासिंग ऐसी हैं मानव रहित हैं। इन्हें खत्म करने के लिए रेलवे लगातार प्रयास कर रही है। हर साल करीब तीस क्रासिंग पर मानव रहित की श्रेणी से हटाने का टारगेट रहता है।
इसके लिए एलएचएस बनाना, इंटरलाकिंग के माध्यम से फाटक बनाकर कर्मचारी तैनात करना, एकांत के अधिक ट्रैफिक वाली क्रासिंग पर गेट मित्र तैनात करना, नजदीक की दो क्रासिंग को मिलाकर एक करना, कुछ को बंद किया जाता है।
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लेकिन इस प्रक्रिया के बावजूद मंडल में अभी 217 क्रासिंग मानव रहित हैं। जिस रफ्तार से इन्हें शिफ्ट या खत्म करने बात चल रही है उसमें कई साल लग जाएंगे। तब तक हर रोज जान खतरे में डालकर लोग लाइन क्रास करते रहेंगे। थोड़ी सी जल्दबाजी या लापरवाही उनकी जान लेती रहेगी।
मंडल में भी हो चुके हैं हादसे
मुरादाबाद। भदोही में जैसा हादसा मुरादाबाद मंडल में भी हो चुके हैं। गनीमत रही है कि इन हादसों की संख्या कम ही रही है। दो साल पहले हरदोई के नजदीक हादसा हुआ था। जिसमें सात बच्चों की जान गई थी। इसके अलावा शाहजहांपुर के नजदीक एक ट्रैक्टर ट्राली ट्रेन की चपेट में आई थी। जिसमें करीब एक दर्जन यात्रियों की मौत हुई थी।
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मुरादाबाद मंडल में करीब 700 क्रासिंग हैं। इनमें से 217 क्रासिंग ऐसी हैं मानव रहित हैं। इन्हें खत्म करने के लिए रेलवे लगातार प्रयास कर रही है। हर साल करीब तीस क्रासिंग पर मानव रहित की श्रेणी से हटाने का टारगेट रहता है।
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इसके लिए एलएचएस बनाना, इंटरलाकिंग के माध्यम से फाटक बनाकर कर्मचारी तैनात करना, एकांत के अधिक ट्रैफिक वाली क्रासिंग पर गेट मित्र तैनात करना, नजदीक की दो क्रासिंग को मिलाकर एक करना, कुछ को बंद किया जाता है।
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लेकिन इस प्रक्रिया के बावजूद मंडल में अभी 217 क्रासिंग मानव रहित हैं। जिस रफ्तार से इन्हें शिफ्ट या खत्म करने बात चल रही है उसमें कई साल लग जाएंगे। तब तक हर रोज जान खतरे में डालकर लोग लाइन क्रास करते रहेंगे। थोड़ी सी जल्दबाजी या लापरवाही उनकी जान लेती रहेगी।
मंडल में भी हो चुके हैं हादसे
मुरादाबाद। भदोही में जैसा हादसा मुरादाबाद मंडल में भी हो चुके हैं। गनीमत रही है कि इन हादसों की संख्या कम ही रही है। दो साल पहले हरदोई के नजदीक हादसा हुआ था। जिसमें सात बच्चों की जान गई थी। इसके अलावा शाहजहांपुर के नजदीक एक ट्रैक्टर ट्राली ट्रेन की चपेट में आई थी। जिसमें करीब एक दर्जन यात्रियों की मौत हुई थी।