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चौपाल ..... कर्जमाफी निकम्मा कर देगी सरकार
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मुरादाबाद। लोकसभा चुनावों का बिगुल बजने के बाद अमर उजाला ने गुरुवार को किसानों की नब्ज टटोलने के लिए लोदीपुर गांव में चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया। हमने जानने की कोशिश की कि चुनावों में किसानों के मुख्य मुद्दे क्या हैं। अब तक की सरकारों से उनकी शिकायतों और आने वाली सरकार से उम्मीदों पर भी बात की। चौपाल में गन्ना बकाया भुगतान से लेकर सड़क और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली तक के मुद्दे उठे। लेकिन एक मुद्दे पर सभी किसान एक थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि कर्ज माफी किसानों को निकम्मा और बेईमान बना देगी। बोले, सरकार ऐसी बने जो किसानाें को कर्ज माफी की भीख नहीं बल्कि ब्याज रहित ऋण और पंजाब जैसे राज्यों की तरह खेतों की सिंचाई के लिए नि:शुल्क बिजली दे।
विजयभान सिंह का कहना था कि गांवों में बिजली की समस्या तो काफी हद तक दूर हुई है। लेकिन गांवों में सड़क, सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की तरफ अधिक ध्यान देने की जरूरत है। अमरजीत सिंह, वीर सिंह, योगराज सिंह जगवीर आदि ने जोर देकर कहा कि बकाया भुगतान पर किसानों को सरकार ब्याज दे और कर्ज माफी को तुरंत बंद करना चाहिए। श्याम वीर सिंह, यशपाल सिंह, परम सिंह, खिलेंद्र आदि ने कहा कि कर्ज चाहे भाजपा सरकार ने माफ किया हो या कांग्रेस ने, इसका फायदा हमेशा डिफाल्टर किसानों को ही मिला। जो किसान मेहनत करके ईमानदारी से समय से ऋण जमा कर रहे थे उन्हें इसका लाभ नहीं मिला। अजयभान सिंह, खुशीराम सिंह, छोटे सिंह, जगनंदन शर्मा, जितेंद्र और विजयवीर सिंह का कहना था कि कर्ज माफी बेईमानी को बढ़ावा दे रही है। विजयभान सिंह बोले, कर्ज माफी से बेहतर है कि सरकार किसानों को फ्री में बिजली दे और ब्याज रहित ऋण दिया जाए। अनुज कुमार, सुगम और गिरिराज सिंह ने भी कर्ज माफी को गलत बताते हुए कहा कि इसका नुकसान ईमानदार लोगों को उठाना पड़ता है क्योंकि सरकार उनके टैक्स की रकम से कर्जमाफी करती है। किसानों ने कहा कि गांवों में मच्छरों के प्रकोप से मुक्ति के लिए दवाओं का छिड़काव हो, गन्ने की पर्चियों में चल रही गड़बड़ तुरंत रोकी जाए। सरकार पुलिस की अराजकता को रोके, मनरेगा का भ्रष्टाचार खत्म हो और गांवों में तालाबों को कर्जा मुक्त किया जाए। किसानों ने कहा कि वह खाली प्रत्याशी को नहीं देख रहे बल्कि पार्टी की राष्ट्रीय नीतियों का भी मूल्यांकन कर रहे हैं। वोट पार्टी और उसकी नीतियों के आधार पर दिया जाएगा।
गोवंश की गणना कराकर भत्ता दे सरकार
मुरादाबाद। किसानों का कहना था कि गोवंश और बंदरों की अधिकता फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। किसान बछड़ों के साथ ही गायों को भी छोड़ रहे हैं। ऐसे में गोवंशीय पशु खेतों में नुकसान कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि गोशालाओं के नाम पर खानापूरी हो रही है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह गोवंश की गणना कराकर गोशाला के बजाए किसानों को ही भत्ता दे। ताकि दूध नहीं देने की स्थिति में भी किसान गायों को पालता रहे। मिलावटी दूध की बिक्री पर रोक के लिए सख्त कार्रवाई की मांग भी किसानों ने की है ताकि गायों को पालने के लिए रूझान बढ़े। किसानाें ने यह भी कहा कि उन्हें गाय के दूध का सही मूल्य मिले इसके लिए भी सरकार को कदम उठाना चाहिए।
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विजयभान सिंह का कहना था कि गांवों में बिजली की समस्या तो काफी हद तक दूर हुई है। लेकिन गांवों में सड़क, सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की तरफ अधिक ध्यान देने की जरूरत है। अमरजीत सिंह, वीर सिंह, योगराज सिंह जगवीर आदि ने जोर देकर कहा कि बकाया भुगतान पर किसानों को सरकार ब्याज दे और कर्ज माफी को तुरंत बंद करना चाहिए। श्याम वीर सिंह, यशपाल सिंह, परम सिंह, खिलेंद्र आदि ने कहा कि कर्ज चाहे भाजपा सरकार ने माफ किया हो या कांग्रेस ने, इसका फायदा हमेशा डिफाल्टर किसानों को ही मिला। जो किसान मेहनत करके ईमानदारी से समय से ऋण जमा कर रहे थे उन्हें इसका लाभ नहीं मिला। अजयभान सिंह, खुशीराम सिंह, छोटे सिंह, जगनंदन शर्मा, जितेंद्र और विजयवीर सिंह का कहना था कि कर्ज माफी बेईमानी को बढ़ावा दे रही है। विजयभान सिंह बोले, कर्ज माफी से बेहतर है कि सरकार किसानों को फ्री में बिजली दे और ब्याज रहित ऋण दिया जाए। अनुज कुमार, सुगम और गिरिराज सिंह ने भी कर्ज माफी को गलत बताते हुए कहा कि इसका नुकसान ईमानदार लोगों को उठाना पड़ता है क्योंकि सरकार उनके टैक्स की रकम से कर्जमाफी करती है। किसानों ने कहा कि गांवों में मच्छरों के प्रकोप से मुक्ति के लिए दवाओं का छिड़काव हो, गन्ने की पर्चियों में चल रही गड़बड़ तुरंत रोकी जाए। सरकार पुलिस की अराजकता को रोके, मनरेगा का भ्रष्टाचार खत्म हो और गांवों में तालाबों को कर्जा मुक्त किया जाए। किसानों ने कहा कि वह खाली प्रत्याशी को नहीं देख रहे बल्कि पार्टी की राष्ट्रीय नीतियों का भी मूल्यांकन कर रहे हैं। वोट पार्टी और उसकी नीतियों के आधार पर दिया जाएगा।
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गोवंश की गणना कराकर भत्ता दे सरकार
मुरादाबाद। किसानों का कहना था कि गोवंश और बंदरों की अधिकता फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। किसान बछड़ों के साथ ही गायों को भी छोड़ रहे हैं। ऐसे में गोवंशीय पशु खेतों में नुकसान कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि गोशालाओं के नाम पर खानापूरी हो रही है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह गोवंश की गणना कराकर गोशाला के बजाए किसानों को ही भत्ता दे। ताकि दूध नहीं देने की स्थिति में भी किसान गायों को पालता रहे। मिलावटी दूध की बिक्री पर रोक के लिए सख्त कार्रवाई की मांग भी किसानों ने की है ताकि गायों को पालने के लिए रूझान बढ़े। किसानाें ने यह भी कहा कि उन्हें गाय के दूध का सही मूल्य मिले इसके लिए भी सरकार को कदम उठाना चाहिए।
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