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द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान चक्कर की मिलक में गिरा था लड़ाकू विमान
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मुरादाबाद।
भारत और पाकिस्तान की सीमा के बीच तनाव पूर्ण माहौल में जिस तरह से एयर स्ट्राइक हुई। उसे देखकर द्वितीय विश्व युद्ध की यादें भी ताजा हो गई। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहां पर भी एक फाइटर जेट भी चक्कर की मिलक में स्थित राइडिंग ग्राउंड में उतारा गया था, जिसको अभी भी पुलिस अकादमी में रखा गया है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादमी में कार्यरत पुलिस अधीक्षक पीके तिवारी ने बताया कि द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-1945) काल का हॉकर हरिकेन मॉडल ‘दो बी’ विमान आरएएफ (इंग्लैंड की वायुसेना) का प्रमुख युद्धक विमान रहा है। बाद में यह भारतीय वायुसेना में भी सेवारत रहा है। इसकी अधिकतम गति 550 किमी. प्रति घंटा 22 हजार फिट की ऊंचाई पर थी, तथा 480 किमी. उड़ान भरने की क्षमता रखता था। अतिरिक्त ईंधन टंकी के साथ यह क्षमता 1585 किमी. तक की थी। यह विमान 120303 इंच मशीन गन के साथ लैस था और 227 किलो का बम ले जा सकता है। यह विमान द्वितीय महायुद्ध के पश्चात उत्तर प्रदेश पुलिस अकादमी के चक्कर की मिलक (राइडिंग ग्राउंड) में आपात स्थिति में उतारा था। वर्ष 1967 के बाद इसे 23वीं वाहिनी पीएसी मुरादाबाद मेें रखा गया। वहां से 21 दिसंबर 2006 को पुलिस अकादमी में रखा गया है।
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भारत और पाकिस्तान की सीमा के बीच तनाव पूर्ण माहौल में जिस तरह से एयर स्ट्राइक हुई। उसे देखकर द्वितीय विश्व युद्ध की यादें भी ताजा हो गई। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहां पर भी एक फाइटर जेट भी चक्कर की मिलक में स्थित राइडिंग ग्राउंड में उतारा गया था, जिसको अभी भी पुलिस अकादमी में रखा गया है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादमी में कार्यरत पुलिस अधीक्षक पीके तिवारी ने बताया कि द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-1945) काल का हॉकर हरिकेन मॉडल ‘दो बी’ विमान आरएएफ (इंग्लैंड की वायुसेना) का प्रमुख युद्धक विमान रहा है। बाद में यह भारतीय वायुसेना में भी सेवारत रहा है। इसकी अधिकतम गति 550 किमी. प्रति घंटा 22 हजार फिट की ऊंचाई पर थी, तथा 480 किमी. उड़ान भरने की क्षमता रखता था। अतिरिक्त ईंधन टंकी के साथ यह क्षमता 1585 किमी. तक की थी। यह विमान 120303 इंच मशीन गन के साथ लैस था और 227 किलो का बम ले जा सकता है। यह विमान द्वितीय महायुद्ध के पश्चात उत्तर प्रदेश पुलिस अकादमी के चक्कर की मिलक (राइडिंग ग्राउंड) में आपात स्थिति में उतारा था। वर्ष 1967 के बाद इसे 23वीं वाहिनी पीएसी मुरादाबाद मेें रखा गया। वहां से 21 दिसंबर 2006 को पुलिस अकादमी में रखा गया है।
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