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प्राधिकरण नहीं वसूल सकते म्यूटेशन चार्ज
Updated Tue, 25 Sep 2018 02:24 AM IST
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मुरादाबाद।
किसी संपत्ति की दोबारा बिक्री पर विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद खरीददार से म्यूटेशन चार्ज नहीं वसूल सकते। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की विशेष अनुमति याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने म्यूटेशन चार्ज को अवैध करार दिया है। जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस के.एम जोसफ की पीठ ने कहा है कि यूपी जनरल क्लाजेज एक्ट 1904 के किसी भी नियम -कानून में परिवर्तन शुल्क की दर निर्धारित नहीं है।
एमडीए के एक भूखंड के दूसरे खरीददार (आवंटी से खरीदा) होटल होली डे रीजेंसी के मालिक महेश अग्रवाल से मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने म्यूटेशन चार्ज मांगा था। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 2017 में हाईकोर्ट ने म्यूटेशन चार्ज को खारिज कर प्राधिकरण पर 5000 रुपये जुर्माना भी लगाया था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एमडीए ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। वीरेंद्र कुमार त्यागी बनाम गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के मामले में 27 अक्तूबर 2005 को हाईकोर्ट के आदेश और 11 अगस्त 2011 सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने एमडीए की एसएलपी खारिज कर दी है। वीरेंद्र कुमार बनाम जीडीए मामले में हाईकोर्ट ने कहा था कि म्यूटेशन चार्ज की मांग पूरी तरह गैरकानूनी है। बता दें कि विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद अपने आवंटी द्वारा संपत्ति की बिक्री करने पर नए खरीददार से संपत्ति की कीमत का एक प्रतिशत म्यूटेशन चार्ज वसूलते हैं। व्यवसायिक संपत्तियों में यह शुल्क दो प्रतिशत है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्राधिकरणों को 2005 के बाद वसूला गया म्यूटेशन चार्ज वापस करना पड़ सकता है।
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किसी संपत्ति की दोबारा बिक्री पर विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद खरीददार से म्यूटेशन चार्ज नहीं वसूल सकते। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की विशेष अनुमति याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने म्यूटेशन चार्ज को अवैध करार दिया है। जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस के.एम जोसफ की पीठ ने कहा है कि यूपी जनरल क्लाजेज एक्ट 1904 के किसी भी नियम -कानून में परिवर्तन शुल्क की दर निर्धारित नहीं है।
एमडीए के एक भूखंड के दूसरे खरीददार (आवंटी से खरीदा) होटल होली डे रीजेंसी के मालिक महेश अग्रवाल से मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने म्यूटेशन चार्ज मांगा था। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 2017 में हाईकोर्ट ने म्यूटेशन चार्ज को खारिज कर प्राधिकरण पर 5000 रुपये जुर्माना भी लगाया था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एमडीए ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। वीरेंद्र कुमार त्यागी बनाम गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के मामले में 27 अक्तूबर 2005 को हाईकोर्ट के आदेश और 11 अगस्त 2011 सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने एमडीए की एसएलपी खारिज कर दी है। वीरेंद्र कुमार बनाम जीडीए मामले में हाईकोर्ट ने कहा था कि म्यूटेशन चार्ज की मांग पूरी तरह गैरकानूनी है। बता दें कि विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद अपने आवंटी द्वारा संपत्ति की बिक्री करने पर नए खरीददार से संपत्ति की कीमत का एक प्रतिशत म्यूटेशन चार्ज वसूलते हैं। व्यवसायिक संपत्तियों में यह शुल्क दो प्रतिशत है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्राधिकरणों को 2005 के बाद वसूला गया म्यूटेशन चार्ज वापस करना पड़ सकता है।
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