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सोनकपुर अर्बन सीलिंग के मुकदमे सुप्रीम कोर्ट से जीता एमडीए
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मुरादाबाद। सोनकपुर योजना की करोड़ों रुपये की करीब 50 हेक्टेयर भूमि पर किसानों का दावा खारिज हो गया है। हाईकोर्ट से किसान पहले ही इस मामले में हार चुके थे। 2016 में एमडीए के पक्ष में आए हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। पोलू बनाम स्टेट ऑफ यूपी एंड अदर्स के नाम दाखिल विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नौ मई को विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही करीब डेढ़ दशक से वीरान पड़ी प्राधिकरण की सोनकपुर योजना के आबाद होने का रास्ता साफ हो गया है।
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने सोनकपुर में अर्बन सीलिंग भूमि पर आवासीय योजना विकसित की थी। प्राधिकरण इस भूमि पर सड़क, पार्क, भूखंड और पथ प्रकाश तक की व्यवस्थाएं विकसित कर चुका था। लेकिन थोड़े दिन बाद ही योजना की करीब 50 हेक्टेयर भूमि को लेकर अलग - अलग विवाद सामने आने लगे। किसानों ने इस जमीन पर अपना दावा करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसके बाद प्राधिकरण की यह आवासीय योजना जहां की तहां रुक गई थी। लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने तीन नंबर 2016 को इस भूमि पर किसानों का दावा खारिज करते हुए इस भूमि पर एमडीए का अधिकार माना था। प्राधिकरण ने यहां काम शुरू कराया लेकिन तभी हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ पोलू व अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। नौ मई को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस नवीन सिन्हा ने इस मामले में सुनवाई के बाद सभी एसएलपी को खारिज कर दिया है।
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मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने सोनकपुर में अर्बन सीलिंग भूमि पर आवासीय योजना विकसित की थी। प्राधिकरण इस भूमि पर सड़क, पार्क, भूखंड और पथ प्रकाश तक की व्यवस्थाएं विकसित कर चुका था। लेकिन थोड़े दिन बाद ही योजना की करीब 50 हेक्टेयर भूमि को लेकर अलग - अलग विवाद सामने आने लगे। किसानों ने इस जमीन पर अपना दावा करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसके बाद प्राधिकरण की यह आवासीय योजना जहां की तहां रुक गई थी। लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने तीन नंबर 2016 को इस भूमि पर किसानों का दावा खारिज करते हुए इस भूमि पर एमडीए का अधिकार माना था। प्राधिकरण ने यहां काम शुरू कराया लेकिन तभी हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ पोलू व अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। नौ मई को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस नवीन सिन्हा ने इस मामले में सुनवाई के बाद सभी एसएलपी को खारिज कर दिया है।
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