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भाजपा के शेर नूरपुर में ढेर
Updated Fri, 01 Jun 2018 02:28 AM IST
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मुरादाबाद।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सीट फूलपुर को गंवाने के बाद भाजपा कैराना और नूरपुर को भी नहीं बचा सकी। नूरपुर उपचुनाव में मुरादाबाद को भाजपा ने बेस कैंप की तरह इस्तेमाल किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य से लेकर मंत्रियाें की फौज समेत पूरी सरकार नूरपुर सीट को बचाने में जुटी थी। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर केंद्रीय संगठन के कई ओहदेदारों ने भी खूब पसीना बहाया। सांसद सर्वेश भी अदावत भूलकर बहन का चुनाव लड़ाने पहुंच गए। सारे जतन बेकार गए। पहले से दस हजार वोट ज्यादा पाकर भी नूरपुर सीट भाजपा के हाथों से फिसल गई।
नूरपुर में लोकेंद्र चौहान की दुर्घटना में मौत के बाद उनकी पत्नी अवनी सिंह को भाजपा ने चुनाव मैदान में उतारा था। मुख्यमंत्री एक बार और उप मुख्यमंत्री दो बार नूरपुर गए। भूपेंद्र सिंह, डा. महेंद्र, गुलाब देवी, बलदेव सिंह औलख समेत प्रदेश सरकार के करीब 20 मंत्रियों और करीब इतने ही सांसदों ने यहां खूब पसीना बहाया। सांसद सर्वेश सिंह भी मान मनौव्वल के बाद प्रचार करने नूरपुर पहुंच गए थे। नूरपुर चुनाव में भाजपा की पूरी रणनीति मुरादाबाद सर्किट हाउस से संचालित होती रही। सरकारी कार्यक्रम लगाकर मंत्री सर्किट हाउस आते और फिर प्रचार करने नूरपुर निकल जाते थे।
नूरपुर उपचुनाव के नतीजों से भाजपा कार्यकर्ता निराश हैं तो सपा और बसपा में उत्साह है। उपचुनाव के नतीजे मंडल की राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित करेंगे। 2019 को लेकर भाजपा नेताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं।
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हार पर चिंतन करे नेतृत्व: सर्वेश
मुरादाबाद।
सांसद सर्वेश सिंह का कहना है कि इस हार पर पार्टी नेतृत्व को आत्मचिंतन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव में स्थानीय टीम खड़ी करने के बजाए बाहरी लोगों को झोंका गया। स्थानीय नेताओं के सहयोग के बगैर चुनाव नहीं जीते जा सकते। सांसद ने कहा कि उन्होंने जिन क्षेत्रों में प्रचार किया वहां अवनी को पहले से भी अधिक वोट मिला है। उन्हाेंने कहा कि बसपा प्रत्याशी खड़ा नहीं होना भी हार का एक कारण है। पहले से 10 हजार वोट ज्यादा पाकर भी सीट फिसल गई। 2019 के नजरिए से भी पार्टी को इस पर चिंतन करना होगा।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सीट फूलपुर को गंवाने के बाद भाजपा कैराना और नूरपुर को भी नहीं बचा सकी। नूरपुर उपचुनाव में मुरादाबाद को भाजपा ने बेस कैंप की तरह इस्तेमाल किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य से लेकर मंत्रियाें की फौज समेत पूरी सरकार नूरपुर सीट को बचाने में जुटी थी। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर केंद्रीय संगठन के कई ओहदेदारों ने भी खूब पसीना बहाया। सांसद सर्वेश भी अदावत भूलकर बहन का चुनाव लड़ाने पहुंच गए। सारे जतन बेकार गए। पहले से दस हजार वोट ज्यादा पाकर भी नूरपुर सीट भाजपा के हाथों से फिसल गई।
नूरपुर में लोकेंद्र चौहान की दुर्घटना में मौत के बाद उनकी पत्नी अवनी सिंह को भाजपा ने चुनाव मैदान में उतारा था। मुख्यमंत्री एक बार और उप मुख्यमंत्री दो बार नूरपुर गए। भूपेंद्र सिंह, डा. महेंद्र, गुलाब देवी, बलदेव सिंह औलख समेत प्रदेश सरकार के करीब 20 मंत्रियों और करीब इतने ही सांसदों ने यहां खूब पसीना बहाया। सांसद सर्वेश सिंह भी मान मनौव्वल के बाद प्रचार करने नूरपुर पहुंच गए थे। नूरपुर चुनाव में भाजपा की पूरी रणनीति मुरादाबाद सर्किट हाउस से संचालित होती रही। सरकारी कार्यक्रम लगाकर मंत्री सर्किट हाउस आते और फिर प्रचार करने नूरपुर निकल जाते थे।
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नूरपुर उपचुनाव के नतीजों से भाजपा कार्यकर्ता निराश हैं तो सपा और बसपा में उत्साह है। उपचुनाव के नतीजे मंडल की राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित करेंगे। 2019 को लेकर भाजपा नेताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं।
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हार पर चिंतन करे नेतृत्व: सर्वेश
मुरादाबाद।
सांसद सर्वेश सिंह का कहना है कि इस हार पर पार्टी नेतृत्व को आत्मचिंतन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव में स्थानीय टीम खड़ी करने के बजाए बाहरी लोगों को झोंका गया। स्थानीय नेताओं के सहयोग के बगैर चुनाव नहीं जीते जा सकते। सांसद ने कहा कि उन्होंने जिन क्षेत्रों में प्रचार किया वहां अवनी को पहले से भी अधिक वोट मिला है। उन्हाेंने कहा कि बसपा प्रत्याशी खड़ा नहीं होना भी हार का एक कारण है। पहले से 10 हजार वोट ज्यादा पाकर भी सीट फिसल गई। 2019 के नजरिए से भी पार्टी को इस पर चिंतन करना होगा।