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सहकारी समितियों की हड़ताल से धान की खरीद हुई बंद
Updated Sun, 04 Nov 2018 03:00 AM IST
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कांठ। अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर पिछले तीन दिनों से चली आ रही क्षेत्र सहकारी समिति कर्मचारियों की हड़ताल के कारण धान खरीद का कार्य पूर्ण रूप से ठप हो गया है। दीपावली के त्योहार पर खर्चे के लिए किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रहीं हैं। उनका कहना है कि धान नहीं बिकेगा तो वह कैसे त्योहार को मनाएंगे।
संयुक्त सहकारी समिति कर्मचारी समन्वय समिति लखनऊ के आह्वान पर राज्य कर्मचारियों की भांति पैक्स के सचिव और कर्मचारियों को राजकीय कोष से नियमित वेतन भुगतान दिए जाने और पैक्स सचिव व कर्मचारियों को बकाया वेतन का भुगतान शीघ्र देने आदि मांगों को ले तीन दिनों को कांठ क्षेत्र की सहकारी समिति कर्मचारियों की हड़ताल चल रही है। जिसके कारण समिति पर हो रही धान खरीद पूर्ण रूप से ठप हो गई है। किसान समितियों में ताले लटके होने के कारण मायूस होकर लौट रहे हैं। भाकियू के जिलाध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह रंधावा का कहना है कि इस समय खेतों में धान की कटाई के बाद अब उसे बेचने का कार्य किसानों द्वारा किया जा रहा है। ताकि वह दीपावली के त्योहार को मना सकें। लेकिन समिति कर्मचारियों के हड़ताल के चलते किसान धान की फसल को नहीं बेच पा रहे हैं। शासन और प्रशासन इस ओर ध्यान देते हुए जल्द से जल्द समितियों पर धान की खरीद को प्रारंभ कराए। यदि ऐसा नहीं किया तो भाकियू उग्र आंदोलन को बाध्य होगी।
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संयुक्त सहकारी समिति कर्मचारी समन्वय समिति लखनऊ के आह्वान पर राज्य कर्मचारियों की भांति पैक्स के सचिव और कर्मचारियों को राजकीय कोष से नियमित वेतन भुगतान दिए जाने और पैक्स सचिव व कर्मचारियों को बकाया वेतन का भुगतान शीघ्र देने आदि मांगों को ले तीन दिनों को कांठ क्षेत्र की सहकारी समिति कर्मचारियों की हड़ताल चल रही है। जिसके कारण समिति पर हो रही धान खरीद पूर्ण रूप से ठप हो गई है। किसान समितियों में ताले लटके होने के कारण मायूस होकर लौट रहे हैं। भाकियू के जिलाध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह रंधावा का कहना है कि इस समय खेतों में धान की कटाई के बाद अब उसे बेचने का कार्य किसानों द्वारा किया जा रहा है। ताकि वह दीपावली के त्योहार को मना सकें। लेकिन समिति कर्मचारियों के हड़ताल के चलते किसान धान की फसल को नहीं बेच पा रहे हैं। शासन और प्रशासन इस ओर ध्यान देते हुए जल्द से जल्द समितियों पर धान की खरीद को प्रारंभ कराए। यदि ऐसा नहीं किया तो भाकियू उग्र आंदोलन को बाध्य होगी।
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