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मिलक में प्रमाण पत्र जारी करने की वैकल्पिक व्यवस्था धड़ाम,आवेदक परेशान
Updated Mon, 16 Jul 2018 01:22 AM IST
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मिलक। लेखपालों की हड़ताल के बीच प्रशासन की प्रमाण पत्र जारी कराने की वैकल्पिक व्यवस्था धड़ाम हो गई है। वहीं आवेदक परेशान हैं।
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की हड़ताल के कारण आय,जाति और सामान्य निवास, वारिसान प्रमाण पत्रों के फंसने के कारण डीएम के आदेश पर ग्राम विकास अधिकारी ग्राम पंचायत अधिकारी तथा उनके समकक्ष को हड़ताली लेखपालों की जगह रिपोर्ट लगाने के लिए आठ जुलाई को अधिकृत किया था। यहां पर करीब लेखपालों की हड़ताल के कारण तीन हजार की संख्या आवेदनों की संख्या पार हो गई है। डीएम के आदेश पर उपजिलाधिकारी राकेश कुमार गुप्ता ने मंगलवार को जिला सूचना विज्ञान अधिकारी से ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी तथा अन्य समकक्षों की सूची मांगी थी तथा प्रमाण पत्रों को जारी करने को लागिन आईडी तथा पासवर्ड निर्गत करने को पत्र भेजा था ,लेकिन अभी छह दिन गुजर गए हैं। नया पासवर्ड अभी एक्टिव नहीं हो पाया है। जिस कारण आवेदक तहसील और जन सेवा केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जबकि प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था चालू होने से पहले ही धड़ाम हो गई है। आवेदकों का कहना है कि प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था कागजी कार्रवाई तक सिमटी हुई है। जिसका खामियाजा आवेदकों को भुगतना पड़ रहा है।
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उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की हड़ताल के कारण आय,जाति और सामान्य निवास, वारिसान प्रमाण पत्रों के फंसने के कारण डीएम के आदेश पर ग्राम विकास अधिकारी ग्राम पंचायत अधिकारी तथा उनके समकक्ष को हड़ताली लेखपालों की जगह रिपोर्ट लगाने के लिए आठ जुलाई को अधिकृत किया था। यहां पर करीब लेखपालों की हड़ताल के कारण तीन हजार की संख्या आवेदनों की संख्या पार हो गई है। डीएम के आदेश पर उपजिलाधिकारी राकेश कुमार गुप्ता ने मंगलवार को जिला सूचना विज्ञान अधिकारी से ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी तथा अन्य समकक्षों की सूची मांगी थी तथा प्रमाण पत्रों को जारी करने को लागिन आईडी तथा पासवर्ड निर्गत करने को पत्र भेजा था ,लेकिन अभी छह दिन गुजर गए हैं। नया पासवर्ड अभी एक्टिव नहीं हो पाया है। जिस कारण आवेदक तहसील और जन सेवा केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जबकि प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था चालू होने से पहले ही धड़ाम हो गई है। आवेदकों का कहना है कि प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था कागजी कार्रवाई तक सिमटी हुई है। जिसका खामियाजा आवेदकों को भुगतना पड़ रहा है।