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श्रीराम कथा-
Updated Fri, 06 Jul 2018 01:04 AM IST
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भगवान से ममता करने पर वह बंधन बंध जाते हैं
अमर उजाला ब्यूरो
चंदौसी।
जब हम संसार से ममता करते हैं तो वह आशक्ति बन जाती है और जब वही ममता भगवान से करते हैं तो वह भक्ति बन जाती है। यह सदविचार कथाव्यास ब्रजेश पाठक ने श्रीरामकथा में व्यक्त किए।
सीता रोड स्थित गीता सत्संग भवन में हो रही रामकथा के तीसरे दिन कथा व्यास ने कहा कि हमारे धर्मशास्त्रों में भक्ति की अनेक परिभाषाएं दी गई है। वे सभी अपने स्थान पर सही है। लेकिन नारद, पाराशर व प्रहलाद आदि भक्तों की दृष्टि से अपनी ममता को संसार में सब प्रकार समेटकर भगवान के चरणों में जोड़ देना ही भक्ति है। उन्होने कहा कि जब हम संसार से ममता करते है तो वह आशक्ति बन जाती है और जब यही ममता भगवान से करते हैं तो भक्ति बन जाती है। जब संसार से ममता है तो हम बंधन में बंध जाते है और जब भगवान से ममता होती तो भगवान बंधन में आ जाते है। अपने प्रेम व ममता के द्वारा भगवान को बांध लेना ही भक्ति है। संसार में हम जिन लोगों से ममता करते है। वह एक न एक दिन ठोकर मार ही देंगे। लेकिन समय रहते हम अपनी सारी ममता समेट कर भगवान के चरणों में समर्पित कर दें तो हम भी समर्पण का आनंद प्राप्त कर सकते है। कथा व्यास न ने बताया कि रामायण में भरत, लक्ष्मण व हनुमान ही ऐसे भक्त है, जिनकी ममता श्री राम के चरणों से जुड़़ी हुई है। कथा उपरांत महाआरती कर प्रसाद वितरण किया गया। कथा में काफी संख्या में श्रद्घालु मौजूद रहे।
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फोटो-
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अमर उजाला ब्यूरो
चंदौसी।
जब हम संसार से ममता करते हैं तो वह आशक्ति बन जाती है और जब वही ममता भगवान से करते हैं तो वह भक्ति बन जाती है। यह सदविचार कथाव्यास ब्रजेश पाठक ने श्रीरामकथा में व्यक्त किए।
सीता रोड स्थित गीता सत्संग भवन में हो रही रामकथा के तीसरे दिन कथा व्यास ने कहा कि हमारे धर्मशास्त्रों में भक्ति की अनेक परिभाषाएं दी गई है। वे सभी अपने स्थान पर सही है। लेकिन नारद, पाराशर व प्रहलाद आदि भक्तों की दृष्टि से अपनी ममता को संसार में सब प्रकार समेटकर भगवान के चरणों में जोड़ देना ही भक्ति है। उन्होने कहा कि जब हम संसार से ममता करते है तो वह आशक्ति बन जाती है और जब यही ममता भगवान से करते हैं तो भक्ति बन जाती है। जब संसार से ममता है तो हम बंधन में बंध जाते है और जब भगवान से ममता होती तो भगवान बंधन में आ जाते है। अपने प्रेम व ममता के द्वारा भगवान को बांध लेना ही भक्ति है। संसार में हम जिन लोगों से ममता करते है। वह एक न एक दिन ठोकर मार ही देंगे। लेकिन समय रहते हम अपनी सारी ममता समेट कर भगवान के चरणों में समर्पित कर दें तो हम भी समर्पण का आनंद प्राप्त कर सकते है। कथा व्यास न ने बताया कि रामायण में भरत, लक्ष्मण व हनुमान ही ऐसे भक्त है, जिनकी ममता श्री राम के चरणों से जुड़़ी हुई है। कथा उपरांत महाआरती कर प्रसाद वितरण किया गया। कथा में काफी संख्या में श्रद्घालु मौजूद रहे।
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