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जिओ, सिटी एनर्जी और इंडस टॉवर कंपनियों की 40 अनुमति निलंबित
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मुरादाबाद। जिओ, सिटी एनर्जी और इंडस टॉवर कंपनियों ने नगर निगम की बेशकीमती जमीनों पर बिना अनुमति के निर्माण करा लिया। निगम अफसरों का कहना है कि कंपनियाें ने कुछ स्थानों पर निर्माण की अनुमति मांगी थी लेकिन उससे दोगुना स्थानों पर निर्माण करा लिए। इसलिए कंपनियों की 40 स्थानों के लिए जारी हुई अनुमति को भी रोक दिया गया है।
नगर आयुक्त संजय चौहान का कहना है कि जिओ टेलीकॉम कंपनी, सिटी एनर्जी प्राइवेट लि. और इंडस टॉवर प्राइवेट लि. ने अनुमति वाले स्थानाें पर निगम की जमीनों पर निर्माण कराते समय मानकों का पालन नहीं किया। इसलिए कंपनियों के काम सभी स्थानों पर रुकवा दिए गए हैं। नगर आयुक्त के मुताबिक निजी कंपनी अपने प्रोजेक्ट के लिए शहर में बेतरतीब सड़कों को खोद रही है। काम पूरा होने के बाद सड़क को ठीक भी नहीं कराया जाता है। इससे राजस्व का नुकसान होता ही है, साथ ही पब्लिक को असुविधा होने पर नगर निगम की छवि खराब होती है। उन्होंने शहर में होने वाले निर्माण कामों की जानकारी तलब की। करीब चालीस साइट पर निर्माण कार्य होते मिले। इनमें कुछ मामलों की अनुमति कंपनी द्वारा मांगी भी नहीं। बाकी जिन स्थानों के लिए अनुमति मांगी भी थी वह मामले भी विचाराधीन थे। किसी भी मामले में अनुमति जारी नहीं की गई थी। अनुमति मिलने और निगम को रॉयल्टी दिए जाने से पहले ही कंपनियों ने साइट पर निर्माण शुरू करा दिए। नगर आयुक्त का कहना है कि नियम सख्ती से लागू कराए जाएंगे। एक काम पूरा कराने के बाद ही दूसरी साइट पर खुदाई करने की अनुमति मिलेगी। सवाल यह भी है कि आखिर कैसे बिना अनुमति शहर में कंपनियाें ने निगम की जमीनों पर कब्जा शुरू कर दिया।
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नगर आयुक्त संजय चौहान का कहना है कि जिओ टेलीकॉम कंपनी, सिटी एनर्जी प्राइवेट लि. और इंडस टॉवर प्राइवेट लि. ने अनुमति वाले स्थानाें पर निगम की जमीनों पर निर्माण कराते समय मानकों का पालन नहीं किया। इसलिए कंपनियों के काम सभी स्थानों पर रुकवा दिए गए हैं। नगर आयुक्त के मुताबिक निजी कंपनी अपने प्रोजेक्ट के लिए शहर में बेतरतीब सड़कों को खोद रही है। काम पूरा होने के बाद सड़क को ठीक भी नहीं कराया जाता है। इससे राजस्व का नुकसान होता ही है, साथ ही पब्लिक को असुविधा होने पर नगर निगम की छवि खराब होती है। उन्होंने शहर में होने वाले निर्माण कामों की जानकारी तलब की। करीब चालीस साइट पर निर्माण कार्य होते मिले। इनमें कुछ मामलों की अनुमति कंपनी द्वारा मांगी भी नहीं। बाकी जिन स्थानों के लिए अनुमति मांगी भी थी वह मामले भी विचाराधीन थे। किसी भी मामले में अनुमति जारी नहीं की गई थी। अनुमति मिलने और निगम को रॉयल्टी दिए जाने से पहले ही कंपनियों ने साइट पर निर्माण शुरू करा दिए। नगर आयुक्त का कहना है कि नियम सख्ती से लागू कराए जाएंगे। एक काम पूरा कराने के बाद ही दूसरी साइट पर खुदाई करने की अनुमति मिलेगी। सवाल यह भी है कि आखिर कैसे बिना अनुमति शहर में कंपनियाें ने निगम की जमीनों पर कब्जा शुरू कर दिया।
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