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हिंदी दिवस-मंडल स्टोरी-
Updated Thu, 14 Sep 2017 12:20 AM IST
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विश्व की पहले नंबर की भाषा बनने को तैयार है हिंदी
चंदौसी।
थाईलैंड, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, स्वीटरजरलैंड आदि कई देशों में हिंदी की अलख जगाने वाले एमजीएम कालेज संभल के पूर्व प्राचार्य, साहित्यकार डा.डीएन शर्मा का कहना हैकि हिंदी ना तो पीड़ित है और ना ही दुखी। मौजूदा दौर में हिंदी का स्वरूप उज्जवल और उत्तम है।
डा.डीएन शर्मा कहते हैंकि हिंदी पूरी दुनियां में विज्ञापन और औद्योगिक क्षेत्र में तेजी के साथ अपना स्थान बना रही है। विश्व में आकर्षण का केंद्र बन रही है। आलम यह हैकि चाइना जैसे देशों के लोग हिंदी सीखने को विवश हैं। दुनियां में हिंदी को बोलने वाले भले ही कम हो लेकिन हिंदी को समझने वालों की संख्या बहुत अधिक है। अब तक हिंदी को तीसरी सबसे बड़ी भाषा माना जाता था लेकिन नए अध्ययनों के अनुसार हिंदी दुनियां की सबसे बड़ी भाषा बनने को तैयार है। हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ के नजदीक भी पहुंच रही है, पहले अटल बिहारी बाजपेई, फिर मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इसके बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में भाषण देकर हिंदी को सम्मान दिया, जिसका परिणाम यह रहाकि अब विदेशी दूतावासों के माध्यम से हिंदी के प्रशिक्षक बुला रहे हैं। लेकिन इतना जरूर हैकि पारंपरिंक हिंदी के साथ उस देश की भाषा भी यदि सीखी जाए तो प्रसार तेजी से होगा।
उन्होंने कहाकि जब वह फ्रांस में हिंदी समारोह में गए तो उन्हें सुनकर इनालको यूनिवर्सिटी फ्रांस ने महाकवि हरीशंकर आदेश सम्मान प्रदान किया था।
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फोटो-12
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हम अपने ही देश में कर रहे हैं हिंदी का अपमान
चंदौसी।
एसएम कालेज के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डा.मूल चंद गौतम मौजूदा दौर में हिंदी के विकास यात्रा से साफी नाखुश है। उनका कहना हैकि हिंदी अपने ही देश में उपेक्षा की शिकार हो रही है।
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डा.गौतम का कहना हैकि जब प्रथम चुनाव के एजेंडे में ही हिंदी को प्रथम राजभाषा नहीं बनाया गया। जब भाषावार राज्यों का गठन किया गया, तो भी हिंदी भाषा राज्यों को विभाजित कर दिया गया। इसके बाद हिंदी के खिलाफ हिंदी की ही बोलियों को खड़ा किया गया। आलम यह हैकि हमारे ही देश में सुप्रीम कोर्ट में हिंदी को कोई मान्यता नहीं है, संघ लोक सेवा आयोग में हिंदी के लिए कोई स्थान नहीं है। ऐसे में आखिर हम हिंदी को कैसे स्वस्थ कहेंगे। हिंदी का हमारे ही देश में लगातार अपमान किया जा रहा है। हमें अपनी राष्ट्रभाषा को विश्वस्तरीय भाषा बनाने के लिए अपने देश में भी इसे मजबूती प्रदान करनी होगी।
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फोटो-13
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चंदौसी।
थाईलैंड, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, स्वीटरजरलैंड आदि कई देशों में हिंदी की अलख जगाने वाले एमजीएम कालेज संभल के पूर्व प्राचार्य, साहित्यकार डा.डीएन शर्मा का कहना हैकि हिंदी ना तो पीड़ित है और ना ही दुखी। मौजूदा दौर में हिंदी का स्वरूप उज्जवल और उत्तम है।
डा.डीएन शर्मा कहते हैंकि हिंदी पूरी दुनियां में विज्ञापन और औद्योगिक क्षेत्र में तेजी के साथ अपना स्थान बना रही है। विश्व में आकर्षण का केंद्र बन रही है। आलम यह हैकि चाइना जैसे देशों के लोग हिंदी सीखने को विवश हैं। दुनियां में हिंदी को बोलने वाले भले ही कम हो लेकिन हिंदी को समझने वालों की संख्या बहुत अधिक है। अब तक हिंदी को तीसरी सबसे बड़ी भाषा माना जाता था लेकिन नए अध्ययनों के अनुसार हिंदी दुनियां की सबसे बड़ी भाषा बनने को तैयार है। हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ के नजदीक भी पहुंच रही है, पहले अटल बिहारी बाजपेई, फिर मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इसके बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में भाषण देकर हिंदी को सम्मान दिया, जिसका परिणाम यह रहाकि अब विदेशी दूतावासों के माध्यम से हिंदी के प्रशिक्षक बुला रहे हैं। लेकिन इतना जरूर हैकि पारंपरिंक हिंदी के साथ उस देश की भाषा भी यदि सीखी जाए तो प्रसार तेजी से होगा।
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उन्होंने कहाकि जब वह फ्रांस में हिंदी समारोह में गए तो उन्हें सुनकर इनालको यूनिवर्सिटी फ्रांस ने महाकवि हरीशंकर आदेश सम्मान प्रदान किया था।
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फोटो-12
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हम अपने ही देश में कर रहे हैं हिंदी का अपमान
चंदौसी।
एसएम कालेज के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डा.मूल चंद गौतम मौजूदा दौर में हिंदी के विकास यात्रा से साफी नाखुश है। उनका कहना हैकि हिंदी अपने ही देश में उपेक्षा की शिकार हो रही है।
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डा.गौतम का कहना हैकि जब प्रथम चुनाव के एजेंडे में ही हिंदी को प्रथम राजभाषा नहीं बनाया गया। जब भाषावार राज्यों का गठन किया गया, तो भी हिंदी भाषा राज्यों को विभाजित कर दिया गया। इसके बाद हिंदी के खिलाफ हिंदी की ही बोलियों को खड़ा किया गया। आलम यह हैकि हमारे ही देश में सुप्रीम कोर्ट में हिंदी को कोई मान्यता नहीं है, संघ लोक सेवा आयोग में हिंदी के लिए कोई स्थान नहीं है। ऐसे में आखिर हम हिंदी को कैसे स्वस्थ कहेंगे। हिंदी का हमारे ही देश में लगातार अपमान किया जा रहा है। हमें अपनी राष्ट्रभाषा को विश्वस्तरीय भाषा बनाने के लिए अपने देश में भी इसे मजबूती प्रदान करनी होगी।
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फोटो-13