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बालिका शिक्षा-
Updated Wed, 09 Aug 2017 12:53 AM IST
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पढ़ाई जारी रखने को घर से दोबारा भागी किशोरी
चंदौसी। बबराला से एक किशोरी दूसरी बार घर से भाग कर 1090 की जिला कोआर्डिनेटर संगीता भार्गव के कार्यालय पहुंच गई। उसका कहना है कि उसके परिजन उसे पढ़ाना नहीं चाहते हैं, लेकिन वह अभी पढ़ना चाहती है। मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक को दी गई तो उसे दोबारा उसके भाई को सौंप दिया गया।
बबराला की एक सोलह वर्षीय किशोरी मंगलवार की शाम को 1090 की जिला कोआर्डिनेटर संगीता भार्गव के कार्यालय पहुंच गई। अपने साथ अपनी किताबें व कापिया भी लाई। गुहार की कि वह आगे पढ़ाई करके अपनी जीवन संवारना चाहती है लेकिन उसके परिजन उसे पढ़ाना नहीं चाहते हैं. पिता उसके साथ मारपीट करता है, बहन व भाई भी मारपीट करता है। उसने एक कापी भी दिखाई, जिसमें उसने कई कविताएं लिखी हुई थी। वह घर नहीं जाना चाहती, उसे किसी आवासीय स्कूल में भर्ती करा दिया जाए। संगीता भार्गव ने पुलिस अधीक्षक रविशंकर छवि से इस मामले में बात की। उसके भाई को बबराला से बुलवाया गया। छात्रा की पढ़ाई जारी रखने की सख्त हिदायत दी गई। भाई ने पढाई कराने का पूरा भरोसा दिलाया। तब किशोरी को उसके भाई को सौंप दिया गया। संगीता भार्गव ने बताया कि दो साल पहले भी यही बालिका कापी किताबे लेकर उनके कार्यालय आई थी। तब भी जिलाधिकारी से बातचीत करके उसका दाखिला स्कूल में कराया गया था, तब से वह पढ़ रही है।
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चंदौसी। बबराला से एक किशोरी दूसरी बार घर से भाग कर 1090 की जिला कोआर्डिनेटर संगीता भार्गव के कार्यालय पहुंच गई। उसका कहना है कि उसके परिजन उसे पढ़ाना नहीं चाहते हैं, लेकिन वह अभी पढ़ना चाहती है। मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक को दी गई तो उसे दोबारा उसके भाई को सौंप दिया गया।
बबराला की एक सोलह वर्षीय किशोरी मंगलवार की शाम को 1090 की जिला कोआर्डिनेटर संगीता भार्गव के कार्यालय पहुंच गई। अपने साथ अपनी किताबें व कापिया भी लाई। गुहार की कि वह आगे पढ़ाई करके अपनी जीवन संवारना चाहती है लेकिन उसके परिजन उसे पढ़ाना नहीं चाहते हैं. पिता उसके साथ मारपीट करता है, बहन व भाई भी मारपीट करता है। उसने एक कापी भी दिखाई, जिसमें उसने कई कविताएं लिखी हुई थी। वह घर नहीं जाना चाहती, उसे किसी आवासीय स्कूल में भर्ती करा दिया जाए। संगीता भार्गव ने पुलिस अधीक्षक रविशंकर छवि से इस मामले में बात की। उसके भाई को बबराला से बुलवाया गया। छात्रा की पढ़ाई जारी रखने की सख्त हिदायत दी गई। भाई ने पढाई कराने का पूरा भरोसा दिलाया। तब किशोरी को उसके भाई को सौंप दिया गया। संगीता भार्गव ने बताया कि दो साल पहले भी यही बालिका कापी किताबे लेकर उनके कार्यालय आई थी। तब भी जिलाधिकारी से बातचीत करके उसका दाखिला स्कूल में कराया गया था, तब से वह पढ़ रही है।
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