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तीन दशक बाद राम को चुनाव में विश्राम
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मुरादाबाद। करीब दिन दशक बाद शायद यह पहला चुनाव है सियासी दलों ने राम को विश्राम दे दिया है। हर चुनाव की तरह इस बार राम मंदिर का शोर नहीं है। यहां तक कि भाजपा के बड़े नेताओं की जनसभाओं से भी राम का नाम दूर हो गया है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और संघ जिस तरह राममंदिर मुद्दे पर आक्रामक थी, उससे लगता था कि 2019 के सियासी समर में राम केंद्र में रहेंगे। लेकिन चुनावी जनसभा को संबोधित करने मुरादाबाद पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और उससे पहले मुरादाबाद आए गृह मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने भाषणों में राम का नाम तक नहीं लिया। नेताओं के भाषण बता रहे हैं कि राम की जगह राष्ट्रवाद ले चुका है।
लोकसभा चुनावों से पहले आरएसएस ने राम मंदिर मुद्दे पर दिल्ली में बड़ी रैली भी की। इसमें भाजपा के छोटे - बड़े सभी नेताओं ने हिस्सा लिया। भाजपा नेता अपने - अपने क्षेत्र से बसों से लोगों को भी रैली में लेकर गए। इससे जाहिर था कि 2019 के लोकसभा चुनावों में राममंदिर मुख्य मुद्दा होगा। लेकिन कुछ दिन पहले रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे अमित शाह ने अपने 27 मिनट के भाषण में एक बार भी राम का नाम तक नहीं लिया। वह 23 मिनट तक सिर्फ राष्ट्रवाद पर बोले। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर एयर स्ट्राइक तक उन्होंने राष्ट्रवाद के मुद्दे को तो खूब धार दी लेकिन राममंदिर का जिक्र तक नहीं किया। शाह ने तो अपने भाषण में यहां तक कहा था कि विकास से भी ज्यादा जरूरी राष्ट्र की सुरक्षा का मुद्दा है। चुनावों की घोषणा से कुछ दिन पहले मुरादाबाद में सड़कों को शिलान्यास करने पहुंचे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी राम का नाम लेने से परहेज करते रहे थे। इसी तरह कुछ वक्त पहले कार्यकर्ताओं के सम्मलेन में आए राजनाथ सिंह के भाषण से भी राम गायब था। पिछले कुछ समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों में भी राममंदिर का जिक्र नहीं है। बड़े नेताओं के साथ ही भाजपा के स्थानीय स्तर के नेता भी अब राममंदिर का जिक्र करते नजर नहीं आते। किसी दूसरे सियासी दल की ओर से भी राममंदिर का मुद्दा नहीं उठ रहा है। पिछले तीन दशक में ऐसा पहली बार है जब चुनावी भाषणों से राम गायब हैं।
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लोकसभा चुनावों से पहले आरएसएस ने राम मंदिर मुद्दे पर दिल्ली में बड़ी रैली भी की। इसमें भाजपा के छोटे - बड़े सभी नेताओं ने हिस्सा लिया। भाजपा नेता अपने - अपने क्षेत्र से बसों से लोगों को भी रैली में लेकर गए। इससे जाहिर था कि 2019 के लोकसभा चुनावों में राममंदिर मुख्य मुद्दा होगा। लेकिन कुछ दिन पहले रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे अमित शाह ने अपने 27 मिनट के भाषण में एक बार भी राम का नाम तक नहीं लिया। वह 23 मिनट तक सिर्फ राष्ट्रवाद पर बोले। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर एयर स्ट्राइक तक उन्होंने राष्ट्रवाद के मुद्दे को तो खूब धार दी लेकिन राममंदिर का जिक्र तक नहीं किया। शाह ने तो अपने भाषण में यहां तक कहा था कि विकास से भी ज्यादा जरूरी राष्ट्र की सुरक्षा का मुद्दा है। चुनावों की घोषणा से कुछ दिन पहले मुरादाबाद में सड़कों को शिलान्यास करने पहुंचे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी राम का नाम लेने से परहेज करते रहे थे। इसी तरह कुछ वक्त पहले कार्यकर्ताओं के सम्मलेन में आए राजनाथ सिंह के भाषण से भी राम गायब था। पिछले कुछ समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों में भी राममंदिर का जिक्र नहीं है। बड़े नेताओं के साथ ही भाजपा के स्थानीय स्तर के नेता भी अब राममंदिर का जिक्र करते नजर नहीं आते। किसी दूसरे सियासी दल की ओर से भी राममंदिर का मुद्दा नहीं उठ रहा है। पिछले तीन दशक में ऐसा पहली बार है जब चुनावी भाषणों से राम गायब हैं।
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