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माध्यमिक स्कूलों में सुधारा जाए पढ़ाई का स्तर
Updated Thu, 19 Jul 2018 02:00 AM IST
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मुरादाबाद।
उत्तरप्रदेश विद्यालय प्रबंधक महासभा पदाधिकारियों की बुधवार को चित्रगुप्त इंटर कालेज में बैठक हुई। महासभा पदाधिकारियों ने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करते हुए उप मुख्यमंत्री एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री डा. दिनेश शर्मा को 19 सूत्रीय ज्ञापन भेजा।
महासभा अध्यक्ष दया किशन कपूर ने कहा कि माध्यमिक स्कूलों में चार करोड़ विद्यार्थी पढ़ते हैं। 2018 में 10 लाख बच्चों ने बोर्ड परीक्षा छोेड़ दी। अध्यक्ष ने कहा कि प्राइमर स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम किया जा रहा है, लेकिन उनमें पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं हैं। सरकारी शिक्षा व्यवस्था बदहाल होने से अभिभावक बच्चों को निजी स्कूलों और वित्त विहीन स्कूलों में पढ़ाने पर अधिक जोर दे रहे हैं। अध्यक्ष ने कहा कि 2011 से विद्यालयों में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति बंद है, जबकि हर साल कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। महिला अध्यापिकाओं को मातृत्व अवकाश की व्यवस्था है। मातृत्व अवकाश से स्कूलों में शिक्षण कार्य बाधित होता है। स्कूल प्रबंधन को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अध्यापक नियुक्ति का अधिकार दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी वेतनभोगी कर्मचारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के आदेश को लागू किया जाए। माध्यमिक स्कूलों में सभी कक्षाओं में एक सेक्सन की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से कराई जाए। खेलों को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों में पीटीआई की तैनाती की जाए। महामंत्री डा. एपी शमशेरी ने कहा कि गर्मियों की छुट्टियों में समर कैंप और शिक्षकों को हर साल एक महीने का प्रशिक्षण दिया जाए। वक्ताओं ने कहा कि सहायता प्राप्त स्कूलों को सरकार से किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है, लिहाजा सहायता प्राप्त शब्द का इस्तेमाल बंद किया जाए। बैठक में श्याम मोहन पंडित, अनिल कुमार सक्सेना, अशोक गुप्ता, कुंवर भूपेंद्र सिंह, अतुल कुमार, दया किशन गुप्ता, प्रेम किशोर गुप्ता, गोपाल अरोरा, रमेश चंद्र और अंजनी कुमार समेत कई लोग मौजूद रहे।
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उत्तरप्रदेश विद्यालय प्रबंधक महासभा पदाधिकारियों की बुधवार को चित्रगुप्त इंटर कालेज में बैठक हुई। महासभा पदाधिकारियों ने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करते हुए उप मुख्यमंत्री एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री डा. दिनेश शर्मा को 19 सूत्रीय ज्ञापन भेजा।
महासभा अध्यक्ष दया किशन कपूर ने कहा कि माध्यमिक स्कूलों में चार करोड़ विद्यार्थी पढ़ते हैं। 2018 में 10 लाख बच्चों ने बोर्ड परीक्षा छोेड़ दी। अध्यक्ष ने कहा कि प्राइमर स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम किया जा रहा है, लेकिन उनमें पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं हैं। सरकारी शिक्षा व्यवस्था बदहाल होने से अभिभावक बच्चों को निजी स्कूलों और वित्त विहीन स्कूलों में पढ़ाने पर अधिक जोर दे रहे हैं। अध्यक्ष ने कहा कि 2011 से विद्यालयों में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति बंद है, जबकि हर साल कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। महिला अध्यापिकाओं को मातृत्व अवकाश की व्यवस्था है। मातृत्व अवकाश से स्कूलों में शिक्षण कार्य बाधित होता है। स्कूल प्रबंधन को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अध्यापक नियुक्ति का अधिकार दिया जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि सरकारी वेतनभोगी कर्मचारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के आदेश को लागू किया जाए। माध्यमिक स्कूलों में सभी कक्षाओं में एक सेक्सन की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से कराई जाए। खेलों को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों में पीटीआई की तैनाती की जाए। महामंत्री डा. एपी शमशेरी ने कहा कि गर्मियों की छुट्टियों में समर कैंप और शिक्षकों को हर साल एक महीने का प्रशिक्षण दिया जाए। वक्ताओं ने कहा कि सहायता प्राप्त स्कूलों को सरकार से किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है, लिहाजा सहायता प्राप्त शब्द का इस्तेमाल बंद किया जाए। बैठक में श्याम मोहन पंडित, अनिल कुमार सक्सेना, अशोक गुप्ता, कुंवर भूपेंद्र सिंह, अतुल कुमार, दया किशन गुप्ता, प्रेम किशोर गुप्ता, गोपाल अरोरा, रमेश चंद्र और अंजनी कुमार समेत कई लोग मौजूद रहे।
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