फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   रामगंगा किनारे की जमीन का मालिक कौन

रामगंगा किनारे की जमीन का मालिक कौन

Wed, 02 May 2018 02:28 AM IST
Updated Wed, 02 May 2018 02:28 AM IST
विज्ञापन
रामगंगा किनारे की जमीन का मालिक कौन
मुरादाबाद।
विज्ञापन

रामगंगा किनारे ई - डस्ट की धुलाई का धंधा एनजीटी के आदेश के बावजूद धड़ल्ले से चल रहा है। रामगंगा किनारे पीतल भट्ठियां हटाने की मुहिम के बीच काली मंदिर और नवाबपुरा क्षेत्र में रामगंगा के कलेजे पर दो फैक्ट्री भी खड़ी हो गई हैं। जिगर कालोनी से लेकर नवाबपुरा, काली मंदिर होते हुए जामा मस्जिद इलाके तक रामगंगा की धार के भीतर बेतहाशा हो रहे अवैध निर्माणों को रोकने में महकमे पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। रामगंगा किनारे डस्ट उठाने की बारी आई तो सभी महकमे इस जमीन के मालिकाना हक से बच रहे हैं। नवाबपुरा और काली मंदिर इलाके में रामगंगा किनारे की जमीन पर हजारों टन ई-डस्ट के ढेर लगे हैं। इससे हवा और पानी दोनों दूषित हो रहे हैं। इस रोक लगाने में नाकाम रहने की वजह से एनजीटी डीएम पर 50 हजार रुपये और प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगा चुका है। इस मामले में पांच मई को सुनवाई है। इससे पहले अफसरों ने एक - दूसरे पर जिम्मा थोपने की कवायद शुरू कर दी है। मंगलवार को डीएम के आदेश पर नगर आयुक्त कैंप कार्यालय में नगर आयुक्त अवनीश कुमार शर्मा की अध्यक्षता में बैठक हुई। जिसमें मुद्दा उठा कि रामगंगा किनारे की ई डस्ट को हटाना है। इसे उठवाने में 30 करोड़ रुपये खर्च आएगा। यह खर्च भूमि के मालिकाना हक वाला विभाग उठाएगा। सिंचाई विभाग, एमडीए, नगर निगम ने रामगंगा किनारे की भूमि पर मालिकाना जताने से इंकार कर दिया है। अब तहसील की टीम बताएगी कि इस भूमि का मालिक कौन है। ई डस्ट को उठाने के लिए आईआईटी रुड़की ने 200 करोड़ रुपये और आईआईटी कानपुर ने 30 करोड़ रुपये का खर्च बताया है। इस खर्च को वही विभाग वहन करेगा जिसका इस भूमि पर मालिकाना हक पाया जाएगा। एक तरफ सरकारी महकमे भूमि के मालिकाना हक को लेकर खींचतान में जुटे हैं वहीं ई डस्ट के धंधेबाज खुलेआम रामगंगा किनारे राख धोकर रामगंगा में प्रदूषण का स्तर बढ़ा रहे हैं। नवाबपुरा और काली माता मंदिर से लेकर जामा मस्जिद तक के इलाके में रामगंगा के भीतर हो रहे अवैध निर्माणों को रोकने में भी एमडीए और नगर निगम नाकाम हैं।


...
रामगंगा किनारे से ई-डस्ट को उठवाया जाना है। इसका रिकार्ड एनजीटी में जमा कराना है। फिलहाल कोई विभाग जमीन को अपनी मानने को ही तैयार नहीं है। इसकेलिए बुधवार को तहसील की टीम रिकार्ड तलाश करेगी। भूमि का मालिक जो विभाग होगा वही विभाग ई डस्ट उठाने का खर्च भी वहन करेगा।
विज्ञापन

इ. आरके सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed