{"_id":"6ad14037dd6c6ab4910d90ce","slug":"100-teachers-received-training-at-a-workshop-on-the-sanskrit-teachers-guidebook-held-at-the-diet-kanth-news-c-277-1-smbd1007-115950-2026-10-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: डायट में संस्कृत शिक्षक संदर्शिका कार्यशाला में 100 शिक्षकों ने लिया प्रशिक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: डायट में संस्कृत शिक्षक संदर्शिका कार्यशाला में 100 शिक्षकों ने लिया प्रशिक्षण
Fri, 16 Oct 2026 02:35 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Fri, 16 Oct 2026 02:35 AM IST
विज्ञापन
कांठ। नगर स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) कांठ में दो दिवसीय संस्कृत शिक्षक संदर्शिका कार्यशाला का बृहस्पतिवार को समापन हुआ। इसमें जिले सभी विकास खंडों के 100 शिक्षकों ने दो बैचों में प्रतिभाग कर संस्कृत भाषा में एक-दूसरे से परिचय प्राप्त किया।
कार्यशाला प्रभारी डायट प्रवक्ता डॉ. अंशु गुप्ता ने संस्कृत भाषा के महत्व पर कहा कि संस्कृत वेदों और पुराणों की महत्वपूर्ण भाषा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में त्रिभाषा सूत्र के अंतर्गत संस्कृत शिक्षण का विशेष महत्व है। उन्होंने गतिविधियों के माध्यम से भाषा सीखने की प्रक्रिया को सरल और रुचिकर बनाने पर जोर दिया। संदर्भदाता डॉ. लोकेंद्र कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रमुख बिंदुओं, शब्दों के सही उच्चारण और व्याकरण संबंधी नियमों पर जानकारी दी। साथ ही दैनिक जीवन और कक्षा में उपयोग होने वाले संस्कृत शब्दों एवं वाक्यों पर आधारित शिक्षण सामग्री तैयार कराई। संदर्भदाता मुकुल कौशिक ने संस्कृत भाषा के स्वरूप और महत्व के साथ दैनिक जीवन एवं कक्षा में प्रयोग होने वाले शब्दों और सरल वाक्यों के निर्माण की जानकारी दी। उन्होंने क्रियाधारित शिक्षण, शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) के निर्माण, उपयोग और आधुनिक तकनीकी उपकरणों के शिक्षण में समावेश व खेल-खेल में संस्कृत सीखने के नवाचारी तरीके पर सत्र प्रस्तुत किए। शिक्षक मोनिका, सौरभ, रंजना, समरपाल सिंह, प्रदीप कुमार शर्मा, चारु, दीपशिखा शर्मा आदि ने प्रमुख गतिविधियों और अनुभवों को साझा किया। प्रवक्ता डॉ. अनिल यादव ने आम बोलचाल में संस्कृत का प्रयोग बढ़ाने पर जोर दिया। शिक्षा शास्त्र प्रवक्ता शशिबाला ने शिक्षकों से कार्यशाला में सीखे गए ज्ञान का उपयोग शिक्षण कार्य में करने का आह्वान किया। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र वितरित किए गए। कार्यशाला में वंदना शर्मा, कुंवरपाल, चंद्रशेखर, बबीता, संदेश, ज्योति, सुनीता, शुभम, माधुरी, विनय, प्रियंका, सुषमा, शमीमुल, मुनीश, सीमा, रूपाली आदि शिक्षक-शिक्षिकाएं रहे।
विज्ञापन
कार्यशाला प्रभारी डायट प्रवक्ता डॉ. अंशु गुप्ता ने संस्कृत भाषा के महत्व पर कहा कि संस्कृत वेदों और पुराणों की महत्वपूर्ण भाषा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में त्रिभाषा सूत्र के अंतर्गत संस्कृत शिक्षण का विशेष महत्व है। उन्होंने गतिविधियों के माध्यम से भाषा सीखने की प्रक्रिया को सरल और रुचिकर बनाने पर जोर दिया। संदर्भदाता डॉ. लोकेंद्र कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रमुख बिंदुओं, शब्दों के सही उच्चारण और व्याकरण संबंधी नियमों पर जानकारी दी। साथ ही दैनिक जीवन और कक्षा में उपयोग होने वाले संस्कृत शब्दों एवं वाक्यों पर आधारित शिक्षण सामग्री तैयार कराई। संदर्भदाता मुकुल कौशिक ने संस्कृत भाषा के स्वरूप और महत्व के साथ दैनिक जीवन एवं कक्षा में प्रयोग होने वाले शब्दों और सरल वाक्यों के निर्माण की जानकारी दी। उन्होंने क्रियाधारित शिक्षण, शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) के निर्माण, उपयोग और आधुनिक तकनीकी उपकरणों के शिक्षण में समावेश व खेल-खेल में संस्कृत सीखने के नवाचारी तरीके पर सत्र प्रस्तुत किए। शिक्षक मोनिका, सौरभ, रंजना, समरपाल सिंह, प्रदीप कुमार शर्मा, चारु, दीपशिखा शर्मा आदि ने प्रमुख गतिविधियों और अनुभवों को साझा किया। प्रवक्ता डॉ. अनिल यादव ने आम बोलचाल में संस्कृत का प्रयोग बढ़ाने पर जोर दिया। शिक्षा शास्त्र प्रवक्ता शशिबाला ने शिक्षकों से कार्यशाला में सीखे गए ज्ञान का उपयोग शिक्षण कार्य में करने का आह्वान किया। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र वितरित किए गए। कार्यशाला में वंदना शर्मा, कुंवरपाल, चंद्रशेखर, बबीता, संदेश, ज्योति, सुनीता, शुभम, माधुरी, विनय, प्रियंका, सुषमा, शमीमुल, मुनीश, सीमा, रूपाली आदि शिक्षक-शिक्षिकाएं रहे।
विज्ञापन