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Mirzapur News: स्कूल की छत से टपक रहा पानी, पिलर और दीवारें दरकीं
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राजगढ़। समाज कल्याण विभाग की ओर से 16.6 लाख रुपये से 10 महीने पहले निर्मित प्राथमिक विद्यालय राजगढ़ द्वितीय की छत से पानी टपक रहा है। भवन की छत, दीवारों और पिलर में ददारें पड़ गई हैं। मरम्मत के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ। ऐसे में शिक्षा विभाग ने भवन को लेने से इन्कार कर दिया है।
10 महीने पहले बने विद्यालय के भवन में दरारें पड़ने की खबर अमर उजाला अखबार में प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी। इसका संज्ञान लेकर समाज कल्याण विभाग के ठेकेदार के जरिये सीमेंट से दरारों को भरवा दिया। एक जुलाइ को स्कूल खुलने से पहले ही भवन की छत से फिर से पानी टपकने लगा है। छत और दीवारों पर जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं।
ऐसे में शिक्षा विभाग ने आपत्ति जताते हुए नवनिर्मित भवन हो लेने से इन्कार कर दिया है। आरोप है कि भवन निर्माण में गुणवत्ता को ध्यान न देकर घटिया सामग्री से भवन का निर्माण कराया गया है। गुणवत्ता खराब होने के कारण छत और दीवारों दरकने लगी हैं।
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प्रधानाध्यापिका स्वाती मौर्य ने बताया कि विद्यालय के बनते ही उसकी दीवारें फट गई थीं। पिलर गिरने के कगार पर हैं। इसलिए भवन को हैंडओवर नहीं किया जाएगा। विद्यालय के पुराने भवन में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने उच्च अधिकारियों से इसकी जांच कराकर कार्यदायी संस्था और समाज कल्याण विभाग के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
खंड शिक्षा अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि नवनिर्मित भवन की दीवारें, छत और पिलर दरक गए हैं। मरम्मत कराने के बावजूद छत से पानी टपक रहा है। इसलिए भवन को हैंडओवर से इन्कार कर दिया गया है।
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10 महीने पहले बने विद्यालय के भवन में दरारें पड़ने की खबर अमर उजाला अखबार में प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी। इसका संज्ञान लेकर समाज कल्याण विभाग के ठेकेदार के जरिये सीमेंट से दरारों को भरवा दिया। एक जुलाइ को स्कूल खुलने से पहले ही भवन की छत से फिर से पानी टपकने लगा है। छत और दीवारों पर जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं।
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ऐसे में शिक्षा विभाग ने आपत्ति जताते हुए नवनिर्मित भवन हो लेने से इन्कार कर दिया है। आरोप है कि भवन निर्माण में गुणवत्ता को ध्यान न देकर घटिया सामग्री से भवन का निर्माण कराया गया है। गुणवत्ता खराब होने के कारण छत और दीवारों दरकने लगी हैं।
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प्रधानाध्यापिका स्वाती मौर्य ने बताया कि विद्यालय के बनते ही उसकी दीवारें फट गई थीं। पिलर गिरने के कगार पर हैं। इसलिए भवन को हैंडओवर नहीं किया जाएगा। विद्यालय के पुराने भवन में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने उच्च अधिकारियों से इसकी जांच कराकर कार्यदायी संस्था और समाज कल्याण विभाग के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
खंड शिक्षा अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि नवनिर्मित भवन की दीवारें, छत और पिलर दरक गए हैं। मरम्मत कराने के बावजूद छत से पानी टपक रहा है। इसलिए भवन को हैंडओवर से इन्कार कर दिया गया है।