{"_id":"6807ea683b473faf7a0789b9","slug":"upsc-exam-two-sdms-of-mirzapur-made-it-to-the-top-20-mirzapur-news-c-192-1-mrz1001-132693-2025-04-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपीएससी परीक्षा : मिर्जापुर के दो एसडीएम ने टॉप 20 में जगह बनाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपीएससी परीक्षा : मिर्जापुर के दो एसडीएम ने टॉप 20 में जगह बनाई
विज्ञापन
मिर्जापुर। मिर्जापुर में एसडीएम पद की जिम्मेदारी संभालते हुए दो पीसीएस अफसरों ने देश की प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा के टॉप 20 में जगह बनाई है। उन्नाव की मूल निवासी एसडीएम मड़िहान सौम्या मिश्रा को 18वीं रैंक मिली है। वहीं, बक्सर निवासी एसडीएम हेमंत ने 13वीं रैंक हासिल की है। सौम्या की बहन सुमेघा ने भी यूपीएससी की परीक्षा पास की है। उन्हें 253वीं रैंक मिली है। वह दिल्ली में तैयारी कर रही थीं।
सौम्या मिश्रा ने बताया कि यह उनका चौथा प्रयास था। सबसे पहले उन्होंने 2020 में यूपीएससी की परीक्षा दी थी। एसडीएम की जिम्मेदारी संभालने के साथ यूपीएससी की तैयारी कैसे की। इस सवाल पर उन्होंने बताया कि सुबह उठने के साथ उनकी पढ़ाई शुरू हो जाती थी। वाहन में आते जाते समय और शाम को घर लौटने के बाद भी पढ़ाई करती थीं। अवकाश के दिन ज्यादा समय पढ़ाई में ही बीतता था।
उन्नाव के पूर्वा तहसली के गांव अजयपुर, पोस्ट सोहा की मूल निवासी सौम्या का परिवार दिल्ली में रहता है। पिता राघवेंद्र मिश्रा दिल्ली में लेक्चरर हैं और मां रेनू मिश्रा गृहणी हैं। एक छोटी बहन और भाई हैं। उन्होंने बताया कि उनके दादा जी ग्राम विकास अधिकारी थे। उनसे प्रतिष्ठित सेवा की ढेरों कहानियां सुनी थीं। उन्हीं से यूपीएससी की प्रेरणा मिली। सौम्या ने बताया कि यूपीएससी के ग्लैमर नहीं बल्कि गोल का पीछा करना चाहिए। अपनी खामियों को दूर करने पर फोकस होना चाहिए। उन्होंने तैयारी के साथ जॉब को भी जरूरी बताया क्योंकि सफलता न मिलने पर लोग डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने जॉब के साथ तैयारी करने का सुझाव दिया। उन्होंने नौकरी के दौरान मार्गदर्शन और सहयोग के लिए डीएम प्रियंका निरंजन और एडीएम वित्त एवं राजस्व शिव प्रताप शुक्ल के प्रति भी आभार जताया।
विज्ञापन
इनसेट-- --
बहनों ने बढ़ाया क्षेत्र का मान
- उन्नाव जिले की रहने वाली सौम्या मिश्रा की बहन सुमेघा मिश्रा ने भी यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की। उनको 253वीं रैंक मिली है। सुमेघा मिश्रा दिल्ली से पढ़ाई कर रही हैं। यह उनका दूसरा प्रयास था। बेटियों की सफलता से न केवल परिवार बल्कि पूरा क्षेत्र गौरवान्वित है। सौम्या को उनकी बहन सुमेघा से सफल होने की सूचना मिली।
इनसेट-- --
नक्सल क्षेत्र में काम करने का मिला लाभ
- मिर्जापुर के नक्सल प्रभावित क्षेत्र मड़िहान की चुनौतियों से निपटते हुए सौम्या ने यूपीएससी परीक्षा में 18वीं रैंक हासिल की। इस दौरान उन्हें क्षेत्र में सक्रियता और अनुभव का भी लाभ मिला। इंटरव्यू के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की चुनौतियों और उससे निपटने के तरीकों पर भी सवाल पूछे गए थे। सौम्या पीसीएस से पहले लेक्चरर थीं।
लक्ष्य पर केंद्रित रहिए और प्रयास जारी रखिए
सिविल सेवा परीक्षा में 13वीं रैंक हासिल करने वाले हेमंत मिश्रा बक्सर के मूल निवासी हैं। उन्होंने कहा कि मेहनत की कोई नकल नहीं होती है। अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहिए और प्रयास जारी रखिए। उन्होंने 2023 में पीसीएस परीक्षा पास की थी। पहली पोस्टिंग मिर्जापुर में 10 महीने पहले एसडीएम के पद पर हुई थी। उन्होंने अपने पिता ओम प्रकाश मिश्रा और मां नम्रता मिश्रा को सफलता का श्रेय दिया। पिता शिक्षा विभाग में है।
खुटहां मौनस गांव के अवनीश सिंह को मिली 148वीं रैंक
मिर्जापुर। जिले के खुटहां मौनस गांव निवासी अवनीश सिंह ने यूपीएससी परीक्षा में 148वीं रैंक हासिल की है। वर्ष 2023 में वह आईपीएस बने थे और इस समय ट्रेनिंग कर रहे है। उनके पिता रजिस्ट्रार कानूनगो लक्ष्मण सिंह ने बताया कि हैदराबाद में आईपीएस की ट्रेनिंग के साथ अविनाश ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। इसी का नतीजा है कि उन्हें सिविल परीक्षा में अच्छी रैंक हासिल करने में सफलता मिली। अवनीश की मां आशा सिंह गृहणी हैं। उन्होंने भी बेटे की सफलता पर खुशी जताई। अवनीश से 12वीं लायंस स्कूल और फिर एनआईटी झारखंड से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। एक साल दिल्ली में तैयारी करने के बाद आईपीएस बने थे।
विज्ञापन
सौम्या मिश्रा ने बताया कि यह उनका चौथा प्रयास था। सबसे पहले उन्होंने 2020 में यूपीएससी की परीक्षा दी थी। एसडीएम की जिम्मेदारी संभालने के साथ यूपीएससी की तैयारी कैसे की। इस सवाल पर उन्होंने बताया कि सुबह उठने के साथ उनकी पढ़ाई शुरू हो जाती थी। वाहन में आते जाते समय और शाम को घर लौटने के बाद भी पढ़ाई करती थीं। अवकाश के दिन ज्यादा समय पढ़ाई में ही बीतता था।
विज्ञापन
उन्नाव के पूर्वा तहसली के गांव अजयपुर, पोस्ट सोहा की मूल निवासी सौम्या का परिवार दिल्ली में रहता है। पिता राघवेंद्र मिश्रा दिल्ली में लेक्चरर हैं और मां रेनू मिश्रा गृहणी हैं। एक छोटी बहन और भाई हैं। उन्होंने बताया कि उनके दादा जी ग्राम विकास अधिकारी थे। उनसे प्रतिष्ठित सेवा की ढेरों कहानियां सुनी थीं। उन्हीं से यूपीएससी की प्रेरणा मिली। सौम्या ने बताया कि यूपीएससी के ग्लैमर नहीं बल्कि गोल का पीछा करना चाहिए। अपनी खामियों को दूर करने पर फोकस होना चाहिए। उन्होंने तैयारी के साथ जॉब को भी जरूरी बताया क्योंकि सफलता न मिलने पर लोग डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने जॉब के साथ तैयारी करने का सुझाव दिया। उन्होंने नौकरी के दौरान मार्गदर्शन और सहयोग के लिए डीएम प्रियंका निरंजन और एडीएम वित्त एवं राजस्व शिव प्रताप शुक्ल के प्रति भी आभार जताया।
विज्ञापन
इनसेट
बहनों ने बढ़ाया क्षेत्र का मान
- उन्नाव जिले की रहने वाली सौम्या मिश्रा की बहन सुमेघा मिश्रा ने भी यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की। उनको 253वीं रैंक मिली है। सुमेघा मिश्रा दिल्ली से पढ़ाई कर रही हैं। यह उनका दूसरा प्रयास था। बेटियों की सफलता से न केवल परिवार बल्कि पूरा क्षेत्र गौरवान्वित है। सौम्या को उनकी बहन सुमेघा से सफल होने की सूचना मिली।
इनसेट
नक्सल क्षेत्र में काम करने का मिला लाभ
- मिर्जापुर के नक्सल प्रभावित क्षेत्र मड़िहान की चुनौतियों से निपटते हुए सौम्या ने यूपीएससी परीक्षा में 18वीं रैंक हासिल की। इस दौरान उन्हें क्षेत्र में सक्रियता और अनुभव का भी लाभ मिला। इंटरव्यू के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की चुनौतियों और उससे निपटने के तरीकों पर भी सवाल पूछे गए थे। सौम्या पीसीएस से पहले लेक्चरर थीं।
लक्ष्य पर केंद्रित रहिए और प्रयास जारी रखिए
सिविल सेवा परीक्षा में 13वीं रैंक हासिल करने वाले हेमंत मिश्रा बक्सर के मूल निवासी हैं। उन्होंने कहा कि मेहनत की कोई नकल नहीं होती है। अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहिए और प्रयास जारी रखिए। उन्होंने 2023 में पीसीएस परीक्षा पास की थी। पहली पोस्टिंग मिर्जापुर में 10 महीने पहले एसडीएम के पद पर हुई थी। उन्होंने अपने पिता ओम प्रकाश मिश्रा और मां नम्रता मिश्रा को सफलता का श्रेय दिया। पिता शिक्षा विभाग में है।
खुटहां मौनस गांव के अवनीश सिंह को मिली 148वीं रैंक
मिर्जापुर। जिले के खुटहां मौनस गांव निवासी अवनीश सिंह ने यूपीएससी परीक्षा में 148वीं रैंक हासिल की है। वर्ष 2023 में वह आईपीएस बने थे और इस समय ट्रेनिंग कर रहे है। उनके पिता रजिस्ट्रार कानूनगो लक्ष्मण सिंह ने बताया कि हैदराबाद में आईपीएस की ट्रेनिंग के साथ अविनाश ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। इसी का नतीजा है कि उन्हें सिविल परीक्षा में अच्छी रैंक हासिल करने में सफलता मिली। अवनीश की मां आशा सिंह गृहणी हैं। उन्होंने भी बेटे की सफलता पर खुशी जताई। अवनीश से 12वीं लायंस स्कूल और फिर एनआईटी झारखंड से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। एक साल दिल्ली में तैयारी करने के बाद आईपीएस बने थे।