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मातृ नवमी पर किया तर्पण
mirzapur news
Updated Fri, 15 Sep 2017 12:34 AM IST
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श्राद्ध में जुटे लोग
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पितृपक्ष में गुरुवार को मातृ नवमी तिथि पर श्राद्ध व तर्पण के लिए नगर के घाटों एवं विन्ध्याचल के सीताकुंड पर भारी संख्या में महिलाओं की भीड़ उमड़ी। इसमें लोगों ने सपरिवार अपने दिवंगत माताओं व पितरों का विधिविधान पूर्वक श्राद्घ एवं तर्पण किया। किसी ने घर के आंगन में तो कईयों ने गंगा घाटों पर पहुंचकर सामर्थ्य के अनुरुप पिंडदान, पूजन, वस्त्र, आभूषण आदि का दान किया। गुरूवार को सूर्योदय काल में नवमी तिथि पर प्रात: काल से ही गंगा घाटों पर लोगों की भीड़ उमड़ने लगी थी। यह क्रम देर शाम तक चलता रहा। लोग घाटों पर पहुंच कर श्राद्घ पूजन करते दिखे। कर्मकांडी पुरोहितों ने दोपहर 12 बजे से लेकर तीन बजे तक श्राद्घ कार्य संपन्न कराया। श्राद्घ के दौरान पितरों को देवता मानकर पिंडदान एवं ब्राह्मण भोजन कराने का विधान है। इस मौके पर लोगों ने तिल मिश्रित दूध के खीर एवं खोए और कुछ ने जौ के आटे से पिंडदान किया।
नगर के विभिन्न घाटों व विंध्याचल में सीताकुंड पर परिवार के महिलाओं व पुरुषों ने दिवंगत महिला सदस्यों का श्राद्घ कार्य किया।
पंडित सलिल पांडेय ने बताया कि मातृ नवमी तक अपने पितर महिलाओं के लिए श्राद्घ करने वाली महिलाएं अत्यंत नियम, संयम एवं धार्मिक अनुष्ठान से बंधी होती हैं। मातृ नवमी को मातृ श्राद्घ कर महिला समाज इन वचनों से मुक्त हो गई। जबकि पुरुष यदि पितृ विसर्जन को श्राद्घ करते हैं तो वे अपनी धार्मिक अनुशासन से बंधे होते हैं। श्राद्घ स्थलों पर मंत्रों की गूंज होती रही।
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नगर के विभिन्न घाटों व विंध्याचल में सीताकुंड पर परिवार के महिलाओं व पुरुषों ने दिवंगत महिला सदस्यों का श्राद्घ कार्य किया।
पंडित सलिल पांडेय ने बताया कि मातृ नवमी तक अपने पितर महिलाओं के लिए श्राद्घ करने वाली महिलाएं अत्यंत नियम, संयम एवं धार्मिक अनुष्ठान से बंधी होती हैं। मातृ नवमी को मातृ श्राद्घ कर महिला समाज इन वचनों से मुक्त हो गई। जबकि पुरुष यदि पितृ विसर्जन को श्राद्घ करते हैं तो वे अपनी धार्मिक अनुशासन से बंधे होते हैं। श्राद्घ स्थलों पर मंत्रों की गूंज होती रही।
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