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बसों में नहीं है फायर टेंडर, चालक भी प्रशिक्षित नहीं
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गर्मी के मौसम में अगर रोडवेज की बसों में सफर कर रहे हैं तो सावधान रहिए। पुरानी हो चुके वाहनों में इस प्रचंड गर्मी में आग लग सकती है। आग लगने पर उसे बुझाने के लिए अधिकांश बसों में फायर टेंडर ही नहीं है। जिन बसों में फायर टेंडर है तो उसकी हालत दयनीय है और चालक उसे चलाने के लिए प्रशिक्षित नहीं है।
रोडवेज बसों की हालत दयनीय है। जिन बसों में सफाई और बैठने के लिए लगे सीटों की हालत सही नहीं हो, उसमें आपातकालीन व्यवस्था के बेहतर होने की उम्मीद करना भी बेमानी होगी। मिर्जापुर डिपो में 58 परिवहन निगम की और 11 अनुबंधित बसें हैं। इनमें से अधिकांश बसों की हालत ठीक नहीं है। न तो बसों में सफाई रहती है और न ही सीट ही ठीक रहता है। इसके बाद भी लोग किसी तरह सफर कर लेते हैं। परंतु सुरक्षा के उपकरण सही नहीं होने पर ज्यादा खतरनाक हैं। बसों में आग लगने पर उसे बुझाने के लिए फायर टेंडर रखने के निर्देश हैं। बसों को फायर टेंडर दिया गया है, परंतु सोमवार को जब रोडवेज परिसर में जाकर जानकारी ली गई तो कई बसों में फायर टेंडर नहीं दिखाई दिया। जिन बसों में दिखाई दी तो उनकी हालत देखकर लग रहा था कि वह काफी समय से रखा गया है और उसे बदला नहीं जाता है। बस के चालकों से फायर टेंडर के संचालन के लिए प्रशिक्षण के बारे मेें पूछा गया तो कुछ ने प्रशिक्षण नहीं दिए जाने की बात कही, जबकि कुछ न जवाब देेना ही जरूरी नहीं समझा। प्रयागराज जाने वाली एक बस में फायर टेंडर मिला तो दूसरे में नहीं मिला। राबर्ट्सगंज जाने वाली बस में फायर टेंडर नहीं था तो घोरावल जाने वाली बस में रखा था, परंतु रखने की तरीका सही नहीं था। कोने में फेंका पड़ा था। रोडवेज के एआरएम हरिशंकर पांडेय का कहना है कि बसों में आग पर काबू पाने के लिए फायर टेंडर दिया गया है। उसे चलाने के बारे में चालकों और परिचालकों को जानकारी भी दी जाती है। इसकी जांच की जाएगी। जिन बसों में फायर टेंडर नहीं मिलेगा, संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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रोडवेज बसों की हालत दयनीय है। जिन बसों में सफाई और बैठने के लिए लगे सीटों की हालत सही नहीं हो, उसमें आपातकालीन व्यवस्था के बेहतर होने की उम्मीद करना भी बेमानी होगी। मिर्जापुर डिपो में 58 परिवहन निगम की और 11 अनुबंधित बसें हैं। इनमें से अधिकांश बसों की हालत ठीक नहीं है। न तो बसों में सफाई रहती है और न ही सीट ही ठीक रहता है। इसके बाद भी लोग किसी तरह सफर कर लेते हैं। परंतु सुरक्षा के उपकरण सही नहीं होने पर ज्यादा खतरनाक हैं। बसों में आग लगने पर उसे बुझाने के लिए फायर टेंडर रखने के निर्देश हैं। बसों को फायर टेंडर दिया गया है, परंतु सोमवार को जब रोडवेज परिसर में जाकर जानकारी ली गई तो कई बसों में फायर टेंडर नहीं दिखाई दिया। जिन बसों में दिखाई दी तो उनकी हालत देखकर लग रहा था कि वह काफी समय से रखा गया है और उसे बदला नहीं जाता है। बस के चालकों से फायर टेंडर के संचालन के लिए प्रशिक्षण के बारे मेें पूछा गया तो कुछ ने प्रशिक्षण नहीं दिए जाने की बात कही, जबकि कुछ न जवाब देेना ही जरूरी नहीं समझा। प्रयागराज जाने वाली एक बस में फायर टेंडर मिला तो दूसरे में नहीं मिला। राबर्ट्सगंज जाने वाली बस में फायर टेंडर नहीं था तो घोरावल जाने वाली बस में रखा था, परंतु रखने की तरीका सही नहीं था। कोने में फेंका पड़ा था। रोडवेज के एआरएम हरिशंकर पांडेय का कहना है कि बसों में आग पर काबू पाने के लिए फायर टेंडर दिया गया है। उसे चलाने के बारे में चालकों और परिचालकों को जानकारी भी दी जाती है। इसकी जांच की जाएगी। जिन बसों में फायर टेंडर नहीं मिलेगा, संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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