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समय का अश्व निरंकुश हमसे आगे दौड़ गया...

Sun, 10 Jan 2016 12:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर Updated Sun, 10 Jan 2016 12:52 AM IST
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The unbridled race horse of time ahead of us ...
नगर के मिशन कंपाउंड  में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान जहां एक ओर रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से समाज में व्याप्त कुरीतियों पर करारा कुठाराघात किया, वहीं शायरों ने अपनी उम्दा पेशकश से समां बांध दिया।
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कवियों और शायरों की एक से बढ़कर एक रचनाओं को सुनकर श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो उठे।

कवि गोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कन्हैंया सिंह सदय ने- सबका पर बरिसावे स्नेह धार मेघ सुमन, बनि जाला प्रेम पात्र चातक के जल जीवन..प्रस्तुत कर समां बांध दिया।
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कवि गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ गीतकार गणेश गंभीर ने- कलम इंकलाबी की टूटी हुई थी बगावत की दावात आज छोटी बहुत थी, जो मुजरिम थे उनका बड़ा मर्तबा था मै शायर था औकात छोटी बड़ी थी।
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भोजपुरी के प्रख्यात कवि आनंद संधिदूत ने- फरले आंख बिलार निहारे न्याय तुला पर बानर के, दुनो गाले रोटी भरले महामहिम संबोधित बा...सुनाकर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी।

कवि भवेश चंद्र जायसवाल ने- हम युग युग के आशावादी उलझे रहे सवालों में और समय का अश्व निरंकुश हमसे आगे दौड़ गया..प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी।

कवि प्रभु नारायण श्रीवास्तव मुक्त छंद के विचारोेत्तेजक कविता का पाठ कर उपस्थित श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया।

कवि गोष्ठी का संचालन करते हुए कवि केदारनाथ सविता ने- मैं हूं, रात है, तनहाई है और दर्द है हजार, रूलाती रहेगी जिंदगी मुझे और कितनी बार..सुनाकर समां बांध दिया।


इसी क्रम में कवि भोलानाथ कुशवाहा सहित प्रमोद कुमार सुमन, आशी मछलीशहरी, इरफान कुरैशी, सलिल पांडेय, आनंद संधिदूत, लल्लू तिवारी, भानु कुमार मुंतजिर, लालव्रत सिंह सुगम, नारायण जी उपाध्याय, गोपाल कृष्ण सिन्हा शेष, ताबिश इकरामी, खुर्शीद भारती, मुहिब मिर्जापुरी, हसन जौनपुरी, इम्तियाज अहमद गुमनाम, अताउल्लाह सिद्दीकी, अंदलीब जमानी, नंदिनी वर्मा, बृजेश कुमार सेठ, शफक मिर्जापुरी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी।

अंत में कवि गोष्ठी के आयोजक कवि अताउल्लाह सिद्दीकी ने आभार व्यक्त किया।
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