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स्वामी अड़गड़ानंद ने बहाई भक्तिरस की बयार
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Mon, 29 Dec 2014 12:50 AM IST
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विजयपुर स्थित झोरिया महादेव परमहंस आश्रम पर रविवार को स्वामी विमलानंद महाराज की 33 वीें पुण्यतिथि पर आश्रम पर सत्संग का आयोजन किया।
इस अवसर पर आयोजित विशाल भंडारे में बड़ी संख्या में लोगाें ने प्रसाद ग्रहण किया तथा स्वामी अड़गड़ानंद महाराज जी के अमृतमयी वाणी का रसास्वादन किया।
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विकास खंड छानबे के विजयपुर स्थित झोरिया महादेव परमहंस आश्रम परिसर में आयोजित सत्संग के दौरान स्वामी अड़गड़ानंद महाराज जी ने धर्म क्या है, वर्ण क्या है एवं श्रीमद् भागवत गीता के बारे में विस्तार से भक्तों को बताया।
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धर्म की व्याख्या करते हुए स्वामी जी ने कहा कि धर्म एक होता है और वह अपरिवर्तनशील होता है। पूजा की पद्धति भले ही अलग हो सकती है, लेकिन ईश्वर एक ही होते हैं।
स्वामी जी ने कहा कि आज जो समाज में एवं पूरी दुनियां में धर्म को लेकर कोहराम मचा हुआ है, उसका समाधान यथार्थ गीता में निहित है।
जिस दिन यथार्थ गीता घर-घर में पहुंच जाएगी, भारतवर्ष एवं विश्व पटल को इसको सम्मान मिलेगा, उसी दिन देश से आतंकवाद, छूआछूत एवं भ्रांतियां जो फैली हुई हैं, वह स्वत: समाप्त हो जाएगी।
स्वामी जी ने कहा कि घोर अत्याचारी भी यदि भगवान का भजन एवं भक्ति करता है तो उसका पाप समाप्त हो जाता है और एक सच्चा इंसान बन जाता है।
इसके पूर्व सत्संग का शुभारंभ तानसेन जी महाराज ने अपने मधुर भजनों से की।
इस दौरान गुरु चरणानंद महाराज, तुलसी महाराज, नर्मदा महाराज, बद्री विशाल, लाले बाबा, आशीष बाबा, बिल्लू बाबा सहित भगवती सिंह, शेषधर पांडेय, गुड्डू चौबे, मुन्ना अग्रहरि, राजन चौबे, पप्पू दूबे, विनोद पांडेय, नंदलाल सहित विभिन्न जनपदाें से आए हुए बड़ी संख्या में नर-नारी उपस्थित रहे।