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लाकडाउन में लौटे हुनरमंदों ने बदला समा

Sat, 11 Sep 2021 12:17 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 11 Sep 2021 12:17 AM IST
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Skills returned in lockdown changed
लालगंज। कोविड के कारण महानगरों से पलायन के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार में बड़ा बदलाव आया है। गांव में लौटे प्रवासी पलायन के दर्द से पीछा छुड़ाते हुए रोजगार से जुड़े तो नयापन का छौंक भी लगाया। मिठाई, कैटरिंग का काम कर रहे प्रवासियों के हाथों से बने व्यंजनों का स्वाद लोगों को भा रहा है।
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उपरौध क्षेत्र के ग्रामीण बड़ी संख्या में बाहर जाकर विभिन्न क्षेत्रों में काम करते थे। विशेषकर दिल्ली व मुंबई में। हुनरमंद प्रवासी गांव में आने के बाद परिवार के भरण-पोषण की समस्या से जूझते हुए धीरे धीरे स्वरोजगार में लग गए। हुनरमंद प्रवासियों में फाइव स्टार होटलों में मिठाई बनाने वाले और बढ़ई तक हैं। नौजवानों ने देखा कि ग्रामीण इलाके में भी खानपान और रहन-सहन के स्तर में पहले की अपेक्षा बदलाव आया है। इस समय लोग अपने शौक को पूरा करने के लिए बाहर की दुकानों पर जाकर खरीदारी करते हैं और पार्टी करते हैं। उन लोगों ने खाने-पीने में लोगों को नई- नई किस्में देनी शुरू की। लोगों को वह पसंद आया। विशेषकर समोसा व पिज्जा की मांग बढ़ी। प्रवासी हुनरमंद नौजवान महेंद्र ने बताया कि वह परंपरागत समोसे से हटकर विशेष समोसा बनाने लगा। जिसकी मांग युवाओं में बढ़ने लगी, क्योंकि अभी तक आलू और मसाले का ही समोसा बाजारों में उपलब्ध था। इस तरह के खानपान के परिवर्तन में हो रहे गुणवत्ता को लेकर उसने स्वरोजगार के तहत छोटी सी दुकान खोल ली। उसके बनाए हुए समोसे पास पड़ोस के गांव में बिकने लगे। इसी प्रकार बाजार में केवल दो तीन प्रकार की मिठाइयों की ही वैरायटी उपलब्ध थी। इसे बाहर से आए हुनरमंद प्रवासियों ने मिठाई की दुकानों पर काम करके विभिन्न प्रकार के व्यंजन उपलब्ध करा दिए। जिसकी मांग लगातार बढ़ती गई और दुकानदारों को उनके हुनर का फायदा होने लगा। सब्जी व्यवसाय का आलम यह है कि गांव दो तीन गांव के बीच में कोई न कोई नौजवान लड़का सब्जी की वैरायटी रख कर दुकानदारी में लग चुके है। राजापुर, लहंगपुर, मेंढरा, बरकछ, पतार कला, कटाई, कोटा, पतुलकी, मिश्रपुर आज दर्जनों गांवों में बदलाव की बयार देखी जा सकती है। गांव में हो रहे बदलाव से गांव का नया चेहरा लोगों के सामने आ रहा है।
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गांव- गांव में खुल रहीं ैं फर्निचर की दुकानें
लालगंज। लाकडाउन में ही मेट्रो महानगरों से आए फर्निचर के कारीगरों ने अपनी कारीगरी शुरू की। पहले तो उन्होंने आर्डर पर लोगों को सोफा व फैंसी टेबल, डाइनिंग टेबल, ड्रेसिंग टेबल आदि बनाए जिसको खरीदने के लिए लोगों को शहर आना पड़ता था। इसके बाद उन्होंने छोटी सी दुुकानें खोल कर आर्डर पर काम करना शुरू किया। जो आजकल काफी सफल है।
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