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ओवरलोड वाहनों की आवाजाही से खतरे में शास्त्री पुल

Fri, 04 Nov 2022 12:49 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 04 Nov 2022 12:49 AM IST
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Shastri bridge in danger due to the movement of overloaded vehicles
गुजरात के मोरबी पुल हादसे से भी जिम्मेदार सबक नहीं ले रहे हैं। मरम्मत की बाट जोह रहे क्षतिग्रस्त शास्त्री पुल पर ओवरलोड ट्रकों की नियमित आवाजाही से खतरा मंडरा रहा है। सेतु निगम के अधिकारियों ने जिले के आला अधिकारियों के साथ ही शासन को भी ओवरलोड वाहनों के निरंतर संचालन से अप्रिय घटना की आशंका जताते हुए जानकारी दी है।
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वर्ष 1976 में लुंबिनी-दुद्धी राज्यमार्ग संख्या पांच के औराई व मिर्जापुर के बीच गंगा नदी पर शास्त्री पुल बना है। पुल बने 46 वर्ष हो गए हैं। पुल की बेयरिंग में खराबी आई थी। इसको देखते हुए पुल की मरम्मत के लिए 23 मार्च 2020 को आठ करोड़ की कार्ययोजना स्वीकृत हुई थी। इसमें से पांच करोड़ 56 लाख रुपये खर्च कर पुल की मरम्मत कराई गई थी। मरम्मत के बाद पुल पर सिर्फ 25 टन तक भार के मालवाहक के आवागमन की अनुमति प्रदान की गई थी। इसके बावजूद पुल से ओवरलोड वाहनों का आवागमन निरंतर जारी है।
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शास्त्री पुल से 100 से 150 टन के मालवाहक वाहन गुजर रहे हैं। इससे पुल काफी कमजोर हो गया है। पुल कमजोर होने के कारण सेतु निगम के उप परियोजना प्रबंधक आरएस उपाध्याय ने बीएचयू के इंजीनियरों की टीम से जांच कराकर बीते सात जून को 26 करोड़ रुपये की कार्ययोजना विभाग के प्रबंधक के पास भेजा था। ताकि पुल न्यूनतम पांच वर्ष तक सुरक्षित रह सके। वहां से कार्ययोजना लखनऊ स्थित सेतु निगम के मुख्य अभियंता के पास भेजी गई। इस बीच सेतु निगम के मुख्य अभियंता ने आपत्ति लगाकर न्यूनतम आवश्यकता के आधार पर कार्ययोजना मांगा है।
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उधर, एक तरफ कमजोर पुल की मरम्मत की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ ओवरलोड वाहनों की आवाजाही भी शास्त्री पर धड़ल्ले से जारी है। यह स्थिति तब है जबकि सेतु निगम के अधिकारी पुल कमजोर होने की जानकारी देने के साथ ही ओवरलोड वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं।

सेतु निगम के उप परियोजना प्रबंधक आरएस उपाध्याय का कहना है कि 1976 में बना शास्त्री पुल कमजोर हो गया है। पांच करोड़ 56 लाख रुपये खर्च कर इसकी मरम्मत कराई गई थी। ओवरलोड वाहनों की आवाजाही के कारण शास्त्री पुल में समस्या पैदा हुई है। पुल की बीएचयू के इंजीनियरों की टीम से जांच कराई गई है। इसके बाद 26 करोड़ की कार्ययोजना पुल की मरम्मत के लिए भेजी गई थी। वहां से आपत्ति लगाकर फिर से कार्ययोजना मांगी गई है। रात में कई बार पुल की जांच की गई है। उस दौरान पुल पर ओवरलोड वाहनों के संचालन की बात सामने आई। इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। साथ ही ओवरलोड वाहनों का संचालन नहीं रुकने पर अप्रिय घटना की भी आशंका जताई गई है।
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