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भौतिक सुखों की ओर भाग रहे लोग
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Tue, 21 Apr 2015 12:51 AM IST
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वरिष्ठ नागरिक संरक्षण संस्थान की महंथ शिवाला स्थित अमृत सभागार में तनाव एवं उसके निराकरण के उपाय विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया।
बैठक में पिछली कार्रवाई की पुष्टि किए जाने के पश्चात् वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 को अंगीकृत करते हुए सरकार के नियमावली 2015 से होने वाले लाभों पर विस्तार से चर्चा की गई।
विशेष चर्चा के दौरान ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बिंदु बहन ने कहा कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना 1937 में हुई थी।
उन्होंने कहा कि अब तक पूरे विश्व के लगभग 140 देशों में इसके केंद्र स्थापित हो चुके हैं। तनाव मुक्ति पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि आज का मनुष्य भौतिक सुखों की ओर उन्मुख है, उसे दैहिक सुखों की विशेष अपेक्षा रहती है।
उसके लिए अपना शरीर अपना परिवार एवं अपना समाज ही सबकुछ है, वह अपने मन की शांति एवं मन पर नियंत्रण के प्रति सचेष्ट नहीं है। उन्हाेंने बताया कि शरीर में स्थित आत्मा का विकास ही सर्वोपरि है।
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विश्वविद्यालय आत्मा का मिलन परमात्मा प्रज्ञा-पिता से कराने के लिए जो प्रक्रिया प्रारंभ करता है, वही राजयोग है। इस राजयोग में भौतिक विकारों को त्यागना पड़ता है।
उन्होंने असंयमित दिनचर्या, व्यक्ति के सोच के विचार एवं लोभ आदि से बचने की सलाह दी तथा तनाव मुक्ति के लिए तन की ओर भागने के बजाय मन को नियंत्रित करने और साधने पर आत्मा और परमात्मा का मिलन संभव बताया।
कार्यक्रम का संचालन संस्थान के सचिव रामगोपाल गोयल ने किया। इस दौरान किशन बुधिया, लालव्रत सिंह, बीपी यादव, कमल प्रसाद अग्रवाल, केके मिश्र, मोहन लाल आर्य, केदारनाथ सविता, दयाशंकर पाठक, योगेंद्र प्रसाद गुप्त आदि रहे।
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बैठक में पिछली कार्रवाई की पुष्टि किए जाने के पश्चात् वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 को अंगीकृत करते हुए सरकार के नियमावली 2015 से होने वाले लाभों पर विस्तार से चर्चा की गई।
विशेष चर्चा के दौरान ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बिंदु बहन ने कहा कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना 1937 में हुई थी।
उन्होंने कहा कि अब तक पूरे विश्व के लगभग 140 देशों में इसके केंद्र स्थापित हो चुके हैं। तनाव मुक्ति पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि आज का मनुष्य भौतिक सुखों की ओर उन्मुख है, उसे दैहिक सुखों की विशेष अपेक्षा रहती है।
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उसके लिए अपना शरीर अपना परिवार एवं अपना समाज ही सबकुछ है, वह अपने मन की शांति एवं मन पर नियंत्रण के प्रति सचेष्ट नहीं है। उन्हाेंने बताया कि शरीर में स्थित आत्मा का विकास ही सर्वोपरि है।
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विश्वविद्यालय आत्मा का मिलन परमात्मा प्रज्ञा-पिता से कराने के लिए जो प्रक्रिया प्रारंभ करता है, वही राजयोग है। इस राजयोग में भौतिक विकारों को त्यागना पड़ता है।
उन्होंने असंयमित दिनचर्या, व्यक्ति के सोच के विचार एवं लोभ आदि से बचने की सलाह दी तथा तनाव मुक्ति के लिए तन की ओर भागने के बजाय मन को नियंत्रित करने और साधने पर आत्मा और परमात्मा का मिलन संभव बताया।
कार्यक्रम का संचालन संस्थान के सचिव रामगोपाल गोयल ने किया। इस दौरान किशन बुधिया, लालव्रत सिंह, बीपी यादव, कमल प्रसाद अग्रवाल, केके मिश्र, मोहन लाल आर्य, केदारनाथ सविता, दयाशंकर पाठक, योगेंद्र प्रसाद गुप्त आदि रहे।