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हड़ताल से रोगी हलाकान
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Thu, 02 Mar 2017 12:31 AM IST
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हड़ताल पर डाक्टर
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मंडलीय चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हुए डाक्टरों और कर्मचारियों का गुस्सा मंगलवार को फूट पड़ा। कार्यबहिष्कार करके उन्होंने अस्पताल परिसर में धरना दिया और नारेबाजी की। उसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी दफ्तर पर प्रदर्शन किया। स्वास्थ्यकर्मियों का कहना था कि जब तक एसआईसी को हटाया नहीं जाएगा वे काम पर नहीं लौटेंगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ उनके साथ जिलाधिकारी के यहां पहुंचे। जिलाधिकारी ने कार्यवाही का आश्वासन देकर चिकित्सकों को आंदोलन समाप्त करने के िलए राजी किया। दिन भर अस्पताल में कामकाज नहीं होने से मरीज हलाकान रहे।
डाक्टरों व कर्मचारियों का कहना था कि प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक की शह पर दो लिपिक स्वास्थ्यकर्मियों के साथ आए दिन अभद्रता करते हैं। सातवें आयोग की वेतन वृद्धि के फिक्सेशन एवं सेवापुस्तिका पर लिखने के लिए धन मांगने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनवरी के बाद किसी का वेतन तक नहीं दिया गया है। सेवा पुस्तिका के नवीनीकरण के लिए एक लाख रुपये की मांग की गई है, जिसमें कई कर्मचारियों ने तीन हजार रुपये चुका भी दिए हैं। कई कर्मचारियों से सादे स्टांप पर हस्ताक्षर बनवाने की कोशिश भी की। संविदा कर्मियों एवं कर्मचारियों के संविदा नवीनीकरण के लिए भी धन मांगा जा रहा है। नहीं देने पर धमकी दी जा रही है। यूपी एड्स सोसाइटी के कर्मचारियों से धन की मांग की गई है।
आंदोलन करने वालों में डा. विकास सिंह, डा. नंदलाल, डा. एस के सिंह, डा. केपी श्रीवास्तव, डा. प्रदीप कुमार, डा. विनीत जायसवाल, डा. रामविनय सिंह, विनय सिंह, डा. सुनील सिंह, सौरभ गुप्ता, डा. सुप्रिया गुप्ता, डा.नीलू पांडेय, डा. ओपी सिंह, डा. देवर्षि पाठक, डा. अखिलेश दूबे, फार्मासिस्ट दिनेश कुमार, अशोक दूबे, कृष्ण कुशवाहा, सचिन यादव, पूजा तिवारी, अभय सिंह, वार्ड ब्याय कैलाश दूबे, दशरथ दूबे, मयंक, सुमन राय, डा. एम के मिश्रा, डा. राजन, संजय कन्नौजिया, एस के श्रीवास्तव, डा. आरके सिंह, डा. एमएस खान, डा.बीएस दूबे सहित भी डाक्टर व कर्मचारी शामिल रहे। इमरजेंसी सेवाओं को मुक्त रखा गया था।
डाक्टरों व कर्मचारियों का कहना था कि प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक की शह पर दो लिपिक स्वास्थ्यकर्मियों के साथ आए दिन अभद्रता करते हैं। सातवें आयोग की वेतन वृद्धि के फिक्सेशन एवं सेवापुस्तिका पर लिखने के लिए धन मांगने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनवरी के बाद किसी का वेतन तक नहीं दिया गया है। सेवा पुस्तिका के नवीनीकरण के लिए एक लाख रुपये की मांग की गई है, जिसमें कई कर्मचारियों ने तीन हजार रुपये चुका भी दिए हैं। कई कर्मचारियों से सादे स्टांप पर हस्ताक्षर बनवाने की कोशिश भी की। संविदा कर्मियों एवं कर्मचारियों के संविदा नवीनीकरण के लिए भी धन मांगा जा रहा है। नहीं देने पर धमकी दी जा रही है। यूपी एड्स सोसाइटी के कर्मचारियों से धन की मांग की गई है।
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आंदोलन करने वालों में डा. विकास सिंह, डा. नंदलाल, डा. एस के सिंह, डा. केपी श्रीवास्तव, डा. प्रदीप कुमार, डा. विनीत जायसवाल, डा. रामविनय सिंह, विनय सिंह, डा. सुनील सिंह, सौरभ गुप्ता, डा. सुप्रिया गुप्ता, डा.नीलू पांडेय, डा. ओपी सिंह, डा. देवर्षि पाठक, डा. अखिलेश दूबे, फार्मासिस्ट दिनेश कुमार, अशोक दूबे, कृष्ण कुशवाहा, सचिन यादव, पूजा तिवारी, अभय सिंह, वार्ड ब्याय कैलाश दूबे, दशरथ दूबे, मयंक, सुमन राय, डा. एम के मिश्रा, डा. राजन, संजय कन्नौजिया, एस के श्रीवास्तव, डा. आरके सिंह, डा. एमएस खान, डा.बीएस दूबे सहित भी डाक्टर व कर्मचारी शामिल रहे। इमरजेंसी सेवाओं को मुक्त रखा गया था।
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