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प्यार की भाषा नहीं समझता है पाकिस्तानः तोगडि़या
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Tue, 27 Oct 2015 12:27 AM IST
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पाकिस्तान कभी सुधरेगा नहीं, अगर सुधरने की किसी को आशा है तो उनका भ्रम है। जो इतने वर्षों में कभी नहीं सुधरे वह आज कैैैैसे सुधर जाएंगे, पाकिस्तान प्यार की भाषा समझता ही नहीं है।
यह बातें सोमवार को नगर के लालडिग्गी इलाके में मनोज श्रीवास्तव के घर पर पत्रकारों से विहिप के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने कही। बोले दाल तो महंगी हो गई है, यह चिंता की बात है। सभी राज्य व केंद्र सरकार को एकजुट होकर दाम कम करने के लिए प्रयास करना चाहिए।
आरक्षण के मुद्दे पर विहिप के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि देश के सभी जाति के युवकों को रोजगार मिलना चाहिए तथा सभी जाति के बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन एवं सभी को मेडिकल की सुविधा मिलनी चाहिए। स्वतंत्र भारत में यह देने में सभी सरकारें विफल हुई हैं।
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उदाहरण के तौर पर बताया कि यदि तीन सौ नौकरी की जगह है और उ.प्र. में 33 हजार प्रार्थना पत्र आए। इसका मतलब है कि इतने लोग बेरोजगार हैं।
बेरोजगारी बढ़ना और हर बच्चों को शिक्षा नहीं मिलना यह दोनों असंतोष खड़ा कर रहा है । देश में 70 करोड़ लोगों का रोजगार कृषि क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, सड़क बनाने के लिए 25 हजार करोड़ खर्च कर दे रहे हैं, और जहां 70 करोड़ लोगों का रोजगार हैं, वहां दस हजार करोड़ खर्च करके कृषि क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने का प्रयास नहीं करते।
अगर कृषि क्षेत्र में विकास का प्रयास करते तो गांव छोड़कर किसान का बेटा भागेगा नहीं, उल्टा शहर वाले वहां जाएंगे। जहां पर रोजगार है, उस क्षेत्र पर ध्यान देकर लोगों को रोजगार मिले, ऐसा प्रयास स्वतंत्र भारत में किसी ने नहीं किया है, जिसके कारण देश में बेरोजगारी है।
श्री तोगड़िया विहिप के पूर्व संगठन मंत्री मनोज श्रीवास्तव के आवास पर उनके पिता के निधन के बाद शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे थे।
यह बातें सोमवार को नगर के लालडिग्गी इलाके में मनोज श्रीवास्तव के घर पर पत्रकारों से विहिप के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने कही। बोले दाल तो महंगी हो गई है, यह चिंता की बात है। सभी राज्य व केंद्र सरकार को एकजुट होकर दाम कम करने के लिए प्रयास करना चाहिए।
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आरक्षण के मुद्दे पर विहिप के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि देश के सभी जाति के युवकों को रोजगार मिलना चाहिए तथा सभी जाति के बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन एवं सभी को मेडिकल की सुविधा मिलनी चाहिए। स्वतंत्र भारत में यह देने में सभी सरकारें विफल हुई हैं।
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उदाहरण के तौर पर बताया कि यदि तीन सौ नौकरी की जगह है और उ.प्र. में 33 हजार प्रार्थना पत्र आए। इसका मतलब है कि इतने लोग बेरोजगार हैं।
बेरोजगारी बढ़ना और हर बच्चों को शिक्षा नहीं मिलना यह दोनों असंतोष खड़ा कर रहा है । देश में 70 करोड़ लोगों का रोजगार कृषि क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, सड़क बनाने के लिए 25 हजार करोड़ खर्च कर दे रहे हैं, और जहां 70 करोड़ लोगों का रोजगार हैं, वहां दस हजार करोड़ खर्च करके कृषि क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने का प्रयास नहीं करते।
अगर कृषि क्षेत्र में विकास का प्रयास करते तो गांव छोड़कर किसान का बेटा भागेगा नहीं, उल्टा शहर वाले वहां जाएंगे। जहां पर रोजगार है, उस क्षेत्र पर ध्यान देकर लोगों को रोजगार मिले, ऐसा प्रयास स्वतंत्र भारत में किसी ने नहीं किया है, जिसके कारण देश में बेरोजगारी है।
श्री तोगड़िया विहिप के पूर्व संगठन मंत्री मनोज श्रीवास्तव के आवास पर उनके पिता के निधन के बाद शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे थे।