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Mirzapur News: दो साल में सिर्फ चार जीरो एफआईआर
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मिर्जापुर। जीरो एफआईआर के तहत किसी भी थाने में मामला दर्ज कराया जा सकता है। इसके बाद वह मुकदमा संबंधित थाने में स्थानांतरित कर दिया जाता है। जिले में दो साल में सिर्फ चार जीरो एफआईआर दर्ज हुई हैं। चारों मुकदमे एंटी करप्शन ने शहर कोतवाली और एक मड़िहान थाने में दर्ज कराए दर्ज कराए हैं।
जीरो एफआईआर की सुविधा से किसी भी तरह के अधिकार क्षेत्र की बाध्यता नहीं होती। किसी थाने में पुलिस एफआईआर तब लिखती है, जब अपराध उसके क्षेत्राधिकार में हुआ हो, लेकिन जीरो एफआईआर में ऐसा नहीं होता है। इसमें पीड़ित व्यक्ति या उस व्यक्ति का कोई जानकार, रिश्तेदार या कोई चश्मदीद भी किसी भी थाने में एफआईआर दर्ज करवा सकता है।
जिले में जीरो एफआईआर के दो वर्ष में चार मामले दर्ज हुए है। सभी मामले एंटी करप्शन ने दर्ज कराए है। इसमें तीन एफआईआर शहर कोतवाली और एक मड़िहान थाने में दर्ज हुआ है। 2025 में जीरो एफआईआर के दोनों मामले एंटी करप्शन ने कोतवाली शहर में दर्ज कराया है।
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इसमें जिगना थाने के उप निरीक्षक शकील अहमद और चील्ह थानाध्यक्ष शिवशंकर सिंह को रिश्वत लेते पकड़ने पर एंटी करप्शन ने दर्ज कराया था। एएसपी सिटी नितेश सिंह जिले में दो साल में जीरो एफआईआर के तहत चार मुकदमे दर्ज हुए हैं।
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जीरो एफआईआर की सुविधा से किसी भी तरह के अधिकार क्षेत्र की बाध्यता नहीं होती। किसी थाने में पुलिस एफआईआर तब लिखती है, जब अपराध उसके क्षेत्राधिकार में हुआ हो, लेकिन जीरो एफआईआर में ऐसा नहीं होता है। इसमें पीड़ित व्यक्ति या उस व्यक्ति का कोई जानकार, रिश्तेदार या कोई चश्मदीद भी किसी भी थाने में एफआईआर दर्ज करवा सकता है।
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जिले में जीरो एफआईआर के दो वर्ष में चार मामले दर्ज हुए है। सभी मामले एंटी करप्शन ने दर्ज कराए है। इसमें तीन एफआईआर शहर कोतवाली और एक मड़िहान थाने में दर्ज हुआ है। 2025 में जीरो एफआईआर के दोनों मामले एंटी करप्शन ने कोतवाली शहर में दर्ज कराया है।
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इसमें जिगना थाने के उप निरीक्षक शकील अहमद और चील्ह थानाध्यक्ष शिवशंकर सिंह को रिश्वत लेते पकड़ने पर एंटी करप्शन ने दर्ज कराया था। एएसपी सिटी नितेश सिंह जिले में दो साल में जीरो एफआईआर के तहत चार मुकदमे दर्ज हुए हैं।