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ऑनलाइन टोकन ने बढ़ाई ऑफलाइन किसानों की मुसीबत
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जिले में एक बार फिर से धान बेचने का नियम बदल गया है। अब केवल ऑनलाइन टोकन पर ही धान की खरीद की जाएगी। इससे किसानों को परेशानी हो रही है। सबसे अधिक परेशानी उन किसानों को हो रही है जो कई दिनों तक ऑफलाइन नंबर लेकर लाइन में लगे थे। वह अब टोकन के लिए आनलाइन आवेदन कर रहे हैं।
टोकन के लिए जो नियम बनाए गए हैं। उनमें सबसे परेशान करने वाला नियम यह है कि शाम छह बजे तक जो किसान क्रय केंद्र पर उपस्थित नहीं होगा। उसका टोकन निरस्त हो जाएगा। इसके साथ ही यदि किसान अपना धान एक बार किसी केंद्र पर बेच देता है तो उसे अपना पूरा धान उसी केंद्र पर ही बेचना होगा। जिले में बुधवार तक 13 हजार दो सौ 37 किसानों से 67 हजार हजार छह सौ 51 एमटी धान की खरीद की गई थी। किसानों का कहना है कि अब तो और अधिक परेशानी हो रही है।
24 घंटे बाद भी नहीं मिल रहा टोकन
टोकन रजिस्ट्रेशन का नियम लागू होने से किसानों को धान बेचने के लिए हलकान होना पड़ रहा है। भागदौड़ के साथ कई बार पैसा भी खर्च हो रहा है। रजिस्ट्रेशन के साथ- साथ क्रय केंद्र पर बेचने की तिथि व गांव भी निर्धारित किया गया था। जिससे किसानों को भागदौड़ नही करनी पड़ती थी। लेकिन बिचौलिये परेशान हो रहे थे। शुरुआती दौर में जिले में कहीं भी किसी क्रय केंद्र पर धान बेचने की छूट दी गयी। यह सब तो थी रहा लेकिन बाद में तिथि के लिए क्रय केंद्रों पर टोकन नम्बर देने में प्रभारियों द्वारा की जा रही धांधली की शिकायत आने लगी। शासन के आदेश पर फिर से दो दिनों से आनलाइन टोकन सिस्टम लागू कर दिया गया। अब टोकन के लिए किसानों को रतजगा करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि 24 घंटे इंतजार करने के बावजूद भी टोकन नहीं मिल रहा। किसानों का आरोप है कि महज पांच मिनट के लिए साइट खुलती है। अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। किसानों का यह जरूर मानना है कि आनलाइन टोकन सिस्टम होने से बिचौलिये फेल हो जाते हैं और किसानों को सुविधा मिलती है।
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आनलाइन टोकन सिस्टम से किसानों को लाभ होगा। धान बेचने के लिए बिचौलिये नहीं आ सकेंगे। जो वास्तविक किसान होंगे। वह ही क्रय केंद्रों तक टोकन के साथ पहुंचेंगे।
- धनंजय सिंह, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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टोकन के लिए जो नियम बनाए गए हैं। उनमें सबसे परेशान करने वाला नियम यह है कि शाम छह बजे तक जो किसान क्रय केंद्र पर उपस्थित नहीं होगा। उसका टोकन निरस्त हो जाएगा। इसके साथ ही यदि किसान अपना धान एक बार किसी केंद्र पर बेच देता है तो उसे अपना पूरा धान उसी केंद्र पर ही बेचना होगा। जिले में बुधवार तक 13 हजार दो सौ 37 किसानों से 67 हजार हजार छह सौ 51 एमटी धान की खरीद की गई थी। किसानों का कहना है कि अब तो और अधिक परेशानी हो रही है।
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24 घंटे बाद भी नहीं मिल रहा टोकन
टोकन रजिस्ट्रेशन का नियम लागू होने से किसानों को धान बेचने के लिए हलकान होना पड़ रहा है। भागदौड़ के साथ कई बार पैसा भी खर्च हो रहा है। रजिस्ट्रेशन के साथ- साथ क्रय केंद्र पर बेचने की तिथि व गांव भी निर्धारित किया गया था। जिससे किसानों को भागदौड़ नही करनी पड़ती थी। लेकिन बिचौलिये परेशान हो रहे थे। शुरुआती दौर में जिले में कहीं भी किसी क्रय केंद्र पर धान बेचने की छूट दी गयी। यह सब तो थी रहा लेकिन बाद में तिथि के लिए क्रय केंद्रों पर टोकन नम्बर देने में प्रभारियों द्वारा की जा रही धांधली की शिकायत आने लगी। शासन के आदेश पर फिर से दो दिनों से आनलाइन टोकन सिस्टम लागू कर दिया गया। अब टोकन के लिए किसानों को रतजगा करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि 24 घंटे इंतजार करने के बावजूद भी टोकन नहीं मिल रहा। किसानों का आरोप है कि महज पांच मिनट के लिए साइट खुलती है। अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। किसानों का यह जरूर मानना है कि आनलाइन टोकन सिस्टम होने से बिचौलिये फेल हो जाते हैं और किसानों को सुविधा मिलती है।
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आनलाइन टोकन सिस्टम से किसानों को लाभ होगा। धान बेचने के लिए बिचौलिये नहीं आ सकेंगे। जो वास्तविक किसान होंगे। वह ही क्रय केंद्रों तक टोकन के साथ पहुंचेंगे।
- धनंजय सिंह, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी