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नातिया मुशायरे में झूमते रहे लोग
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Wed, 31 Dec 2014 12:31 AM IST
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नगर के कटरा कोतवाली के पीछे छोटा मिर्जापुर स्थित सूफी शहाबुददीन नूरी कादरी के आवास पर 12 वां सालाना जलसा मनाया गया। जलसा में नातिया मुशायरा का भी आयोजन किया गया था।
मुशायरे में दूर दराज से आये शायरों ने एक से बढ़ कर एक कलाम पेश किए।
मंगलवार को मुशायरे का आगाज सूफी कमरुददीन शनाई हसनी, जहांगिरी नूरी कादरी, हाजी निजामुद्दीन, सूफी कमरुददीन आदि ने हल्के जिक्र से किया।
अफजल आजमी ने पढ़ा जिनके लबों पर जिक्र ए रसूल अनाम है उनके सरों पर साये रहमत दवाम है, जन्नत तवाफे करती है आके वहां-वहां, लिखा जहां-जहां पर मुहम्मद का नाम है।
अब्दुल रहीम नूरी ने मिला खाक में या गले से लगाले अब हो चुका है मै तेरे हवाले, खुदा ने तुझे हुस्न ऐसा बख्शा वो दिवाना हो जाये जो नजर तुझपे डाले पढ़ा तो लोग झूम उठे।
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मुहम्मदी नूरी के कलाम को भी लोगों ने दादों से नवाजा। मुशायरे में देर रात तक लोग डटे रहे। नगर पालिका की तरफ से अलाव की व्यवस्था की गई थी। अंत में देश में अमन चैन की दुआ की गई।
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मुशायरे में दूर दराज से आये शायरों ने एक से बढ़ कर एक कलाम पेश किए।
मंगलवार को मुशायरे का आगाज सूफी कमरुददीन शनाई हसनी, जहांगिरी नूरी कादरी, हाजी निजामुद्दीन, सूफी कमरुददीन आदि ने हल्के जिक्र से किया।
अफजल आजमी ने पढ़ा जिनके लबों पर जिक्र ए रसूल अनाम है उनके सरों पर साये रहमत दवाम है, जन्नत तवाफे करती है आके वहां-वहां, लिखा जहां-जहां पर मुहम्मद का नाम है।
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अब्दुल रहीम नूरी ने मिला खाक में या गले से लगाले अब हो चुका है मै तेरे हवाले, खुदा ने तुझे हुस्न ऐसा बख्शा वो दिवाना हो जाये जो नजर तुझपे डाले पढ़ा तो लोग झूम उठे।
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मुहम्मदी नूरी के कलाम को भी लोगों ने दादों से नवाजा। मुशायरे में देर रात तक लोग डटे रहे। नगर पालिका की तरफ से अलाव की व्यवस्था की गई थी। अंत में देश में अमन चैन की दुआ की गई।