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मिर्जापुरः एक दिन की रूई की कमाई से तीन सौ वर्ष पूर्व बना था ओझला का पुल, दरक रही हैं दीवारें

Sun, 04 Jul 2021 11:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 04 Jul 2021 11:57 PM IST
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Mirzapur: The bridge of Ojla was built three hundred years ago by earning a day's cotton, the walls are cracking
मिर्जापुर। प्राकृतिक सुंदरता समेटे मिर्जापुर में कई ऐसे निर्माण भी हैं, जो कलाकृति के बेहतरीन नमूने हैं। इसी में से एक है पुण्यजला नदी पर बना विंध्याचल और मिर्जापुर को जोड़ने वाला ओझला पुल। बाहर से आने वाले व्यापारियों ने एक दिन का चंदा जुटाकर इस पुल के लिए दान दिया और विंध्याचल के महंत परशुराम गीरी ने पुल का निर्माण कराया। मिर्जापुर के प्रस्तर कला में माहिर कारीगरों की नक्काशी आज भी पुल का आकर्षण हैं।
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करीब तीन सौ वर्ष पहले बना यह पुल आज भी मिर्जापुर से विंध्याचल जाने के लिए मुख्य मार्ग है। लेकिन देखरेख और इसके ऐतिहासिक महत्व पर ध्यान नहीं देने के कारण पुल की दीवारें और खंभे जर्जर होने लगे हैं। दीवारें दरक रही हैं। उचित देखभाल न होने के कारण इसकी कलाकृति नष्ट हो रही है। पुल के नीचे बने कक्ष भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गए हैं। जनश्रुति है कि एक रूई के व्यापारी मिर्जापुर रोजगार के लिए आ रहे थे। लेकिन नदी के तेज बहाव में उनकी रूई की खेप बह गई। चूंकि यह बाहर से आने वाले व्यापारियों के लिए आवागमन का मुख्य जरिया था। इस पर उन्होंने सभी व्यापारियों को इकट्ठा किया। निर्णय लिया गया कि सभी व्यापारी अपनी एक दिन की कमाई का पुल के लिए दान करेंगे। व्यापारियों के रूई की एक दिन की कमाई से इस पुल का निर्माण कराया गया। बताया जाता है कि उस उक्त धनराशि एकत्रित कर महंत परशुराम गीरी को दी गई। उन्होंने इंतजाम कर पुल बनवाया। जानकारों के मुताबिक 1772 में बनवाया गया यह पुल वास्तुकला का सुंदर नमूना है। इस पुल पर मिर्जापुर के प्रस्तर कला में माहिर कारीगरों द्वारा नक्काशी भी की गई है। जो देखने लायक है। इस पुल के गर्भ में व्यापार के सिलसिले में आए हुए व्यापारियों को ठहरने के लिए स्थान भी बनाया गया था जो अब गंदगी के कारण जर्जर हो रहा है।
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आज भी विंध्याचल व मिर्जापुर को जोड़ता है यह पुल
मिर्जापुर। विंध्याचल से मिर्जापुर आवागमन के लिए एक मुख्य मार्ग जंगीरोड बनाया गया है लेकिन नगर से विंध्याचल जाने के लिए आज भी यह एक प्रमुख मार्ग है। अभी कुछ दिन पूर्व तक रोडवेज की बसें व बाहर से आने वाले वाहन इसी पुल से होकर विंध्याचल जाते थे लेकिन अब बसहीं के पास वाले क्रासिंग के बंद होने से भारी वाहन इस पर से नहीं आते।
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पुरातत्व विभाग उन्हीं भवनों को लेता है जो उसकी सूची में होते हैं और चयनित होते हैं। फिर भी यदि लोकनिर्माण विभाग किसी प्रकार की तकनीकी मदद लेता है तो जरूर मदद की जाएगी। - सुभाष चंद्र यादव, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी
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