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मेडिकल वेस्ट मामले में जांच टीम से हटाए गए डाक्टर आरएस राम
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मिर्जापुर। अस्पताल से बायो मेडिकल वेस्ट का सही ढंग से निस्तारण न किए जाने का मामला सामने आने पर जांच टीम गठित की है। जांच टीम में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरएस राम पर जांच को प्रभावित करने का आरोप लगाए जाने के बाद डीएम ने उन्हें जांच टीम से निकालकर अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. निलेश श्रीवास्तव को शामिल किया है।
अमर उजाला ने
चलाए गए सीरीज मामले डीएम ने अस्पताल से बायो मेडिकल वेस्ट का सही ढंग से निस्तारण न किए जाने का मामला उठाया था। इसपर जांच के लिए डीएम ने टीम गठित की थी। गौरतलब है कि संगम मेडिसर्ब प्राइवेट लिमिटेड को मिर्जापुर के अस्पताल से बायो मेडिकल वेस्ट को उठाने का ठेका मिला है, पर कंपनी बायो मेडिकल वेस्ट का उठान सही ढंग से नहीं हो रहा था। बायो मेडिकल वेस्ट को मड़िहान के जंगल में भी फेंका गया। इसमें वन विभाग ने कंपनी पर एक लाख का जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद भी कंपनी कूड़े का उठान सही ढंग से नहीं कर रही थी। अमर उजाला ने बायो मेडिकल वेस्ट का सही ढंग से निस्तारण न होने के बारे में लगातार चलाई गई खबरों की सीरीज पर डीएम ने सज्ञान में लेते हुए कंपनी के अधिकारियों, स्वास्थ्य, वन और प्रदुषण बोर्ड के सदस्यों केत साथ बैठक किया। बैठक में बातें निकल कर आईं कि कंपनी सिर्फ एक गाड़ी से पूरे जिले के अस्पताल से बायो मेडिकल वेस्ट के उठान का दावा करती है जो संभव नहीं है। मामले में कंपनी की लापरवाही सामने आने पर डीएम ने जांच के लिए पांच सदस्ययी टीम बनाई। इसमें डिप्टी कलेक्टर सुरेंद्र बहादुर सिंह, सहायक वैज्ञानिक अधिकारी प्रदूषण नियंत्रिण बोर्ड डा. एसपी शुक्ला, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आरएस राम, सहायक वन संरक्षक वीके सिंह को शामिल किया। अंतरराष्ट्रीय न्यायिक मानवाधिकार संरक्षण के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील कुमार पांडेय ने डीएम को ज्ञापन देकर शिकायत किया कि अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरएस राम की रिपोर्ट पर ही सीएमओ संस्था को भुगतान होता है। इनके टीम में रहने से निष्पक्ष जांच नहीं हो सकेगी। इस पर डीएम ने डॉ. आरएस राम को टीम से निकाल कर डॉ. निलेश श्रीवास्तव को शामिल किया है।
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चलाए गए सीरीज मामले डीएम ने अस्पताल से बायो मेडिकल वेस्ट का सही ढंग से निस्तारण न किए जाने का मामला उठाया था। इसपर जांच के लिए डीएम ने टीम गठित की थी। गौरतलब है कि संगम मेडिसर्ब प्राइवेट लिमिटेड को मिर्जापुर के अस्पताल से बायो मेडिकल वेस्ट को उठाने का ठेका मिला है, पर कंपनी बायो मेडिकल वेस्ट का उठान सही ढंग से नहीं हो रहा था। बायो मेडिकल वेस्ट को मड़िहान के जंगल में भी फेंका गया। इसमें वन विभाग ने कंपनी पर एक लाख का जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद भी कंपनी कूड़े का उठान सही ढंग से नहीं कर रही थी। अमर उजाला ने बायो मेडिकल वेस्ट का सही ढंग से निस्तारण न होने के बारे में लगातार चलाई गई खबरों की सीरीज पर डीएम ने सज्ञान में लेते हुए कंपनी के अधिकारियों, स्वास्थ्य, वन और प्रदुषण बोर्ड के सदस्यों केत साथ बैठक किया। बैठक में बातें निकल कर आईं कि कंपनी सिर्फ एक गाड़ी से पूरे जिले के अस्पताल से बायो मेडिकल वेस्ट के उठान का दावा करती है जो संभव नहीं है। मामले में कंपनी की लापरवाही सामने आने पर डीएम ने जांच के लिए पांच सदस्ययी टीम बनाई। इसमें डिप्टी कलेक्टर सुरेंद्र बहादुर सिंह, सहायक वैज्ञानिक अधिकारी प्रदूषण नियंत्रिण बोर्ड डा. एसपी शुक्ला, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आरएस राम, सहायक वन संरक्षक वीके सिंह को शामिल किया। अंतरराष्ट्रीय न्यायिक मानवाधिकार संरक्षण के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील कुमार पांडेय ने डीएम को ज्ञापन देकर शिकायत किया कि अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरएस राम की रिपोर्ट पर ही सीएमओ संस्था को भुगतान होता है। इनके टीम में रहने से निष्पक्ष जांच नहीं हो सकेगी। इस पर डीएम ने डॉ. आरएस राम को टीम से निकाल कर डॉ. निलेश श्रीवास्तव को शामिल किया है।
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