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जमीन बेचे जाने के मामले में हो सकती है कार्रवाई
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मिर्जापुर। कृषि सहकारी समितियों का मामला एक बार फिर से गर्मा गया है। सोनभद्र के उभ्भा कांड के बाद सीएम के निर्देश पर बनी उच्च स्तरीय रेणुका कमेटी ने अपनी जांच सीएम को सौंप दी है। इसमें मड़िहान के गोपलपुर समिति के नौ हजार बीघे की जमीन का मामला छाया हुआ है।
जिले में 26 कृषि सहकारी समितियां थी। रेणुका कमेटी की जांच में यह पाया गया कि इसमें से तीन समितियों का तो कोई अता पता ही नहीं था। शेष 23 में से 13 समिति भी अनियमितता की श्रेणी में आ रही है। इसमें गोपलपुर समिति का मामला सबसे ऊपर है। बताया जाता है कि इस जमीन को अपनी संपत्ति की तरह से प्रयोग करने के लिए पहले 16 लोगों की कृषि सहकारी समिति बनाई गई थी। इसके बाद सीलिंग से बचाने के लिए आरोप है कि इसमें सौ से अधिक लोगों को शामिल कर लिया गया था। इसमें बिहार व नेपाल तक के लोग शामिल थे। इतना ही नहीं इसमें से दो सौ 12 बीघा जमीन बेच भी दी गई। इसके लिए नियमानुसार तय सीमा से अधिक जमीन बेचने के लिए अनुमति तक नहीं ली गई। इन सभी अनियमितता की जब पड़ताल की गई तो इसमें एक राजनीतिक दल के सदस्य व कई अधिकारी घिरते नजर आ रहे हैं। इन सभी के ऊपर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। राजस्व विभाग के तत्कालीन कई अधिकारी इस मामले में फंस सकते हैं। फिलहाल अभी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है लेकिन शीघ्र ही होने की संभावना जताई जा रही है।
मड़िहान व राजगढ़ में ही अधिक मामले
मिर्जापुर। स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आई है कि भूमि संबंधी इस प्रकार के मामले अधिकतर मड़िहान व राजगढ़ क्षेत्र में ही हैं। यदि पुराने राजस्व अभिलेखों के तहत जांच की जाए तो कई और घोटाले सामने आ सकते हैं। इसके लिए स्थानीय ग्रामीण बड़ी जांच की जरूरत बताते हैं।
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जांच पूरी हो गई है और मामला अब शासन के पास है। अभी इस संबंध में कोई निर्देश नहीं आया है। जैसा निर्देश होगा वैसी कार्रवाई की जाएगी।
- मित्रसेन वर्मा, एआर कोआपरेटिव
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जिले में 26 कृषि सहकारी समितियां थी। रेणुका कमेटी की जांच में यह पाया गया कि इसमें से तीन समितियों का तो कोई अता पता ही नहीं था। शेष 23 में से 13 समिति भी अनियमितता की श्रेणी में आ रही है। इसमें गोपलपुर समिति का मामला सबसे ऊपर है। बताया जाता है कि इस जमीन को अपनी संपत्ति की तरह से प्रयोग करने के लिए पहले 16 लोगों की कृषि सहकारी समिति बनाई गई थी। इसके बाद सीलिंग से बचाने के लिए आरोप है कि इसमें सौ से अधिक लोगों को शामिल कर लिया गया था। इसमें बिहार व नेपाल तक के लोग शामिल थे। इतना ही नहीं इसमें से दो सौ 12 बीघा जमीन बेच भी दी गई। इसके लिए नियमानुसार तय सीमा से अधिक जमीन बेचने के लिए अनुमति तक नहीं ली गई। इन सभी अनियमितता की जब पड़ताल की गई तो इसमें एक राजनीतिक दल के सदस्य व कई अधिकारी घिरते नजर आ रहे हैं। इन सभी के ऊपर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। राजस्व विभाग के तत्कालीन कई अधिकारी इस मामले में फंस सकते हैं। फिलहाल अभी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है लेकिन शीघ्र ही होने की संभावना जताई जा रही है।
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मड़िहान व राजगढ़ में ही अधिक मामले
मिर्जापुर। स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आई है कि भूमि संबंधी इस प्रकार के मामले अधिकतर मड़िहान व राजगढ़ क्षेत्र में ही हैं। यदि पुराने राजस्व अभिलेखों के तहत जांच की जाए तो कई और घोटाले सामने आ सकते हैं। इसके लिए स्थानीय ग्रामीण बड़ी जांच की जरूरत बताते हैं।
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जांच पूरी हो गई है और मामला अब शासन के पास है। अभी इस संबंध में कोई निर्देश नहीं आया है। जैसा निर्देश होगा वैसी कार्रवाई की जाएगी।
- मित्रसेन वर्मा, एआर कोआपरेटिव