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जेल की रसोई हुई अत्याधुनिक, दाल-रोटी बनाना हुआ आसान
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जेल में अपराधी सजा काटने आते हैं। सजा काट रहे इन अपराधियों से जेल में कई तरह के कार्य लिए जाते हैं। इसमें सफाई, बागवानी के साथ ही रसोई में भोजन बनाने का कार्य सबसे महत्वपूर्ण है। जेल में सजा काट रहे बंदियों को थोड़ी राहत यह है कि रसोई में कार्य करने के लिए उनको अत्याधुनिक मशीनें मिली हैं। जेल में रोटी बनाने की मशीन तो पहले से थी, अब राइस ब्वायलर, दाल बनाने के लिए बड़ा कूकर, खाने को गर्म रखने के लिए 10 बड़ा हाट पाट उपलब्ध कराया गया है।
कुल 332 की क्षमता वाले जिला कारागार में इस समय 928 बंदी बंद हैं। इसमें 40 महिला बंदी हैं। जेल में साफ-सफाई से लेकर भोजन बनाने आदि काम बंदियों द्वारा ही किया जाता हे। हर बंदी को अलग-अलग कार्य दिया जाता है। जो जिस कार्य में निपुण होता है। उससे वह कार्य कराया जाता है। भोजन बनाने की प्रक्रिया प्रतिदिन होती है। प्रभारी जेल अधीक्षक अरुण मिश्रा ने बताया कि जेल में सुबह का भोजन 11 बजे और रात का भोजन शाम छह बजे बनता है। पाकशाला में 25 से 30 लोगों को लगाया गया है। पाकशाला में आटा गुथने और रोटी बनाने की मशीन पहले से थी। रोटी बनने की दो मशीन है। एक दिन में सात हजार रोटी बनती है। अब चावल बनाने के लिए 300 लीटर का राइस ब्वायलर मिला है। दाल बनाने के लिए 300 लीटर का बड़ा कूकर मिला है। इससे बंदियों को रोटी के बाद दाल और चावल बनाने में भी आसानी होगी। इसके साथ ही खाना गर्म रहे, इसके लिए 10 बजे हाट-पाट मिले है। चाय गर्म रखने के लिए भी हाट-पाट मिला है। पाकशाला में काम करने वालों को 25 से 40 रुपये प्रतिदिन मेहनताना भी मिलता है। प्रभारी जेल अधीक्षक अरुण मिश्रा का कहना है कि जेल में रोटी बनाने की मशीन पहले से थी, पर अब दाल और चावल बनाने के लिए बड़ा कुकर और ब्वायरल मिला है। इससे भोजन बनाने में आसानी होगी।
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कुल 332 की क्षमता वाले जिला कारागार में इस समय 928 बंदी बंद हैं। इसमें 40 महिला बंदी हैं। जेल में साफ-सफाई से लेकर भोजन बनाने आदि काम बंदियों द्वारा ही किया जाता हे। हर बंदी को अलग-अलग कार्य दिया जाता है। जो जिस कार्य में निपुण होता है। उससे वह कार्य कराया जाता है। भोजन बनाने की प्रक्रिया प्रतिदिन होती है। प्रभारी जेल अधीक्षक अरुण मिश्रा ने बताया कि जेल में सुबह का भोजन 11 बजे और रात का भोजन शाम छह बजे बनता है। पाकशाला में 25 से 30 लोगों को लगाया गया है। पाकशाला में आटा गुथने और रोटी बनाने की मशीन पहले से थी। रोटी बनने की दो मशीन है। एक दिन में सात हजार रोटी बनती है। अब चावल बनाने के लिए 300 लीटर का राइस ब्वायलर मिला है। दाल बनाने के लिए 300 लीटर का बड़ा कूकर मिला है। इससे बंदियों को रोटी के बाद दाल और चावल बनाने में भी आसानी होगी। इसके साथ ही खाना गर्म रहे, इसके लिए 10 बजे हाट-पाट मिले है। चाय गर्म रखने के लिए भी हाट-पाट मिला है। पाकशाला में काम करने वालों को 25 से 40 रुपये प्रतिदिन मेहनताना भी मिलता है। प्रभारी जेल अधीक्षक अरुण मिश्रा का कहना है कि जेल में रोटी बनाने की मशीन पहले से थी, पर अब दाल और चावल बनाने के लिए बड़ा कुकर और ब्वायरल मिला है। इससे भोजन बनाने में आसानी होगी।
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