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जिले में बाल मजदूरों की संख्या बढ़ी

Sat, 24 Jan 2015 12:07 AM IST
पवन तिवारी, मिर्जापुर
पवन तिवारी, मिर्जापुर Updated Sat, 24 Jan 2015 12:07 AM IST
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Increase in the number of child laborers in the district
विंध्याचल मंडल के मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों में बाल मजदूरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसके पीछे गरीबी और मजबूरी के अलावा सरकारी प्रयासों में कमी भी जिम्मेदार दिखाई दे रही है।
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देश में बाल मजदूरी में उत्तर प्रदेश सबसे आगे हैं। पिछले 10 वर्षों में मिर्जापुर में जहां 12349 बाल मजदूरों की संख्या बढ़ी, वहीं सोनभद्र में 10077 बढ़ गए। इसके उलट, बाल मजदूरी के लिए कुख्यात भदोही के कालीन उद्योग में बाल मजदूरों की संख्या में 10 वर्षों में कमी आई है।
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वर्ष 2011 की जनगणना के बाद चाइल्ड लेबर के आंकड़ों पर नजर डालें तो यूपी की स्थिति सबसे भयावह नजर आती है। यूपी पूरे देश में बाल मजदूरी के मामले में पहले पायदान पर है।
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अकेले विंध्याचल मंडल के तीनों जिलों की बात करें तो यहां की स्थिति इसलिए खराब है क्योंकि यह जिले बेहद पिछड़े हुए हैं। मिर्जापुर में वर्ष 2001 में बाल मजदूरों की संख्या 17859 थी, जो वर्ष 2011 में बढ़कर 30208 तक पहुंच गई है।

यही स्थिति सोनभद्र की भी है। यहां वर्ष 2001 में 16418 बाल मजदूर पंजीकृत थे, जिनकी संख्या वर्ष 2011 में बढ़कर 26495 तक पहुंच गई है। इन जिलों में कालीन और पत्थर उद्योग संचालित होता है, जिनमें बाल मजदूरों का जमकर शोषण किया जाता है।

हाउस होल्ड चाइल्ड लेबर की गिनती तो और भी मुश्किल काम है। दूसरी ओर, स्कूलों में मिड-डे मील की विफलता और विद्यार्थियों को विद्यालयों में बुलाने के लिए कोई विशेष कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जा रहे हैं। मिड-डे मील, वजीफा और यूनिफार्म वितरण में हुई धांधली ने स्थिति को और चिंताजनक बना दिया है।

 मिर्जापुर में तो चाइल्ड लाइन और एंटी ह्यूमन ट्रैफकिंग सेल के अलावा बालगृह की कमी भी बाल मजदूरों की संख्या को बढ़ाने में सहायक बन रही है। भारत सरकार द्वारा बीते वर्ष जुलाई में राष्ट्रीय  बाल श्रम परियोजना को बंद कर दिए जाने से भी बाल मजदूरी की रोकथाम पर असर पड़ा है।


अब तक बाल मजदूर परंपरागत रूप से जिन क्षेत्रों में दिखता था, वहां न दिखकर कहीं और दिख रहा है। इसका अध्ययन करने की जरूरत है। हम छापेमारी कर सकते हैं और जन जागरूकता शुरू कर सकते हैं। जिस प्रकार से मत प्रतिशत बढ़ाने के लिए जागरूकता फैलाई गई थी, उसी प्रकार बाल मजदूरी रोकने के लिए जागरूकता फैलाने की जरूरत है। - पंकज सिंह राणा, सहायक श्रमायुक्त, विंध्याचल मंडल
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