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Mirzapur News: विकास प्राधिकरण क्षेत्र के दायरे में खेतों में बसाई जा रहीं हैं अवैध कॉलोनियां, जिम्मेदार मौन

Mon, 13 Oct 2025 01:53 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 13 Oct 2025 01:53 AM IST
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Illegal colonies are being established in the fields within the development authority area, responsible people remain silent.
विंध्याचल मार्ग पर बना एक भवन, स्रोत संवाद
मिर्जापुर। शहर में तेजी से बढ़ रहीं कॉलोनियां अब मिर्जापुर विकास प्राधिकरण के दायरे में आने वाले खेतों तक तेजी से पांव पसार रहीं हैं। खेतों के बीचोबीच कॉलोनियाें का दायरा बढ़ता जा रहा है। कास्तकारों से औने-पौने दाम पर जमीन लेकर फिर ऊंचे दाम पर भू-माफिया बेच रहे हैं। प्लॉट बेचकर दलाल चलते बनते हैं। जब लोग मकान बनवाने पहुंच रहे हैं तो वे बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। प्लॉटिंग शुरू होने की सूचना मिलते ही प्राधिकरण की टीम प्लॉटिंग स्थल पर धमकती है। फिर जिम्मेदार मौन हो जाते हैं। आम जनता सब कुछ अच्छा समझकर झूठे भू-माफियाओं के चंगुल में फंस जाती है। शहर क्षेत्र में सैकड़ों कॉलोनियां हैं जो कॉलोनी के नाम पर पंजीकृत नहीं हैं। शहर के विंध्याचल रोड, चुनार रोड, कोनौरा रोड व लालगंज रोड पर ऐसी कालोनियों का अनियंत्रित विकास देखा जा सकता है। मड़िहान रोड पर तो अब पूरी बस्ती ही हो गई है। शीतला मंदिर से अमरावती चौराहे तक बीच में इस प्रकार की कई कॉलोनियां दिखाई दे सकती हैं।
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मिट्टी की सड़क बरसात में बन जाती है तालाब
समस्या यह नहीं है कि वहां भवन बने हैं, समस्या यह है कि उन भूमि को कॉलोनी के नाम पर बेचा गया और कॉलोनी की सुविधाएं खरीदारों को उपलब्ध नहीं कराई गई। भवनों का नक्शा पास करते समय भी नहीं ध्यान दिया गया। नतीजे में खरीदारों को बिना सुविधा के ही कीमत चुकानी पड़ी। यही वजह है कि नगर में कई कालोनियां तो बस गईं लेकिन उनके निवासियों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। यहां तक की ऐसी जगहों पर सड़क तक नहीं है। मिट्टी की सड़क बरसात में तालाब हो जाती है। किसी प्रकार लोग आवागमन करते हैं। सिटी मजिस्ट्रेट व प्राधिकरण के सचिव विनीत उपाध्याय ने कहा कि अपनी भूमि पर कोई भी नक्शा पास कराकर भवन बनवा सकता है। नक्शा नियमों के मुताबिक होना चाहिए।
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प्लॉट बेचते समय खरीदारों को दिखाए जाते हैं सिर्फ विकास के सपने
भू-माफिया प्लॉट बेचते समय आम जनता को सिर्फ विकास के सपने दिखाए जाते हैं। चौड़ी सड़कें, सीवर, बिजली के खंभे, पानी, मुख्य सड़क से कनेक्टिविटी को लेकर उच्च गुणवत्ता की बात की जाती है। जमीन बिकते ही प्लॉटर ऐसे वायदों से पल्ला झाड़ लेते हैं। बाद में जनता को छोटी-छोटी चीजों के लिए तरसना पड़ता है।
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महीनों से नहीं चला कोई अभियान
शहर में बिना नक्शे के मकान, यहां तक की बड़ी-बड़ी कॉलोनियां बसाई जा रही हैं। नदियों के किनारे तक पाट दिए जा रहे हैं। प्राधिकरण ने महीनों से कोई बड़ा अभियान नहीं चलाया है। हालांकि, पहले निर्माण की पहली ईंट रखते ही विभागीय टीम मौके पर पहुंच जाती थी। फिर पता नहीं कौन से वे कारण हैं कि टीम को आगे की कार्रवाई करने से रोक देती है।
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