{"_id":"684c7344fbe77b70a70d5a96","slug":"ground-water-level-is-continuously-falling-90-hand-pumps-stopped-giving-water-mirzapur-news-c-192-1-svns1033-135156-2025-06-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mirzapur News: लगातार खिसक रहा भूजल स्तर, 90 हैंडपंपों ने छोड़ा पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mirzapur News: लगातार खिसक रहा भूजल स्तर, 90 हैंडपंपों ने छोड़ा पानी
विज्ञापन
मिर्जापुर। नगर क्षेत्र में बिना अनुमति के अंधाधुंध बोरिंग और जल संचय के प्रबंध में बेपरवाही के कारण भूजल स्तर लगातार नीचे खिसकता जा रहा है। इसके चलते नगर का पूरा इलाका सेमी क्रिटिकल जोन में आ गया है। यही वजह है कि 90 हैंडपंपों ने पानी छोड़ दिया है। यह चिंताजनक स्थिति है। यदि इसे रोकने के जरूरी उपाय नहीं किए गए तो कुछ वर्षों में पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।
नगर के 38 वार्डों में 30 हजार भवन और 4.50 लाख की आबादी है। इनमें से 10 प्रतिशत ज्यादा घरों में बोरिंग कराई गया है। अब जो कॉलोनियां और नए भवन बन रहे हैं, वहां भी धड़ल्ले से लोग बोरिंग करा रहे हैं। वहीं, पानी का कारोबार करने वाले भी पेयजल का बेहिसाब दोहन कर रहे हैं। इसके लिए न तो लोग अनुमति ले रहे हैं और न तो नगर पालिका प्रशासन कोई ध्यान दे रहा है। यही नहीं, रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए भी लोगों को जागरूक भी नहीं किया जा रहा। यही वजह है कि सरकारी भवनों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की गई है। ऐसे में बरसात का पानी बहकर गंगा में चला जाता है। ऐसे में साल दर साल भूजल स्तर नीचे खिसकने से प्रशासन ने नगर क्षेत्र को क्रिटिकल जोन घोषित कर दिया है।
तीन साल से लगातार कम हो रहा भूगर्भ जलस्तर
नगर में तीन साल से लगातार भूगर्भ जलस्तर घटता जा रहा है। भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में शहर का जलस्तर 11.09 मीटर रिकाॅर्ड किया गया था जो 2023 में खिसककर 12.58 मीटर नीचे पहुंच गया। इसके बाद वर्ष 2024 में यह 16 सेमी खिसककर 12.76 मीटर नीचे पहुंच गया। सहायक भू भौतिकविद स्वप्निल राय ने बताया कि भूगर्भ जल स्तर की दृष्टि से नगर का क्षेत्र सेमी क्रिटिकल में पहुंच गया है, जो चिंताजनक है।
विज्ञापन
इनसेट-
हैंडपंपों के रीबोर का इंतजार
नगर पालिका क्षेत्र में 1200 हैंडपंप लगे हैं। इनमें से 90 हैंडपंप पानी छोड़ चुके हैं लेकिन जल निगम ने रीबोर नहीं कराया। नगर पालिका के जलकल के अभियंता ओमप्रकाश ने बताया कि जब हैंडपंप पानी छोड़ देते हैं या कीचड़ और बालू आने लगती है तो दूसरा बोर ही एकमात्र उपाय रहता है।
-- -- -- -- -- -- -
रेन वाटर हार्वेस्टिंग कारगर उपाय
सहायक भू भौतिकविद स्वप्निल राय का कहना है कि जलसंकट से निपटने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग ही एकमात्र उपाय है। बताया कि बोरिंग के लिए अनुमति जरूरी है। व्यावसायिक भवनों में बोरिंग के लिए अब तक 300 लोगों को अनुमति दी गई है। किसानों और घरेलू लोगों को इस दायरे से मुक्त रखा गया है।
विज्ञापन
नगर के 38 वार्डों में 30 हजार भवन और 4.50 लाख की आबादी है। इनमें से 10 प्रतिशत ज्यादा घरों में बोरिंग कराई गया है। अब जो कॉलोनियां और नए भवन बन रहे हैं, वहां भी धड़ल्ले से लोग बोरिंग करा रहे हैं। वहीं, पानी का कारोबार करने वाले भी पेयजल का बेहिसाब दोहन कर रहे हैं। इसके लिए न तो लोग अनुमति ले रहे हैं और न तो नगर पालिका प्रशासन कोई ध्यान दे रहा है। यही नहीं, रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए भी लोगों को जागरूक भी नहीं किया जा रहा। यही वजह है कि सरकारी भवनों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की गई है। ऐसे में बरसात का पानी बहकर गंगा में चला जाता है। ऐसे में साल दर साल भूजल स्तर नीचे खिसकने से प्रशासन ने नगर क्षेत्र को क्रिटिकल जोन घोषित कर दिया है।
विज्ञापन
तीन साल से लगातार कम हो रहा भूगर्भ जलस्तर
नगर में तीन साल से लगातार भूगर्भ जलस्तर घटता जा रहा है। भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में शहर का जलस्तर 11.09 मीटर रिकाॅर्ड किया गया था जो 2023 में खिसककर 12.58 मीटर नीचे पहुंच गया। इसके बाद वर्ष 2024 में यह 16 सेमी खिसककर 12.76 मीटर नीचे पहुंच गया। सहायक भू भौतिकविद स्वप्निल राय ने बताया कि भूगर्भ जल स्तर की दृष्टि से नगर का क्षेत्र सेमी क्रिटिकल में पहुंच गया है, जो चिंताजनक है।
विज्ञापन
इनसेट-
हैंडपंपों के रीबोर का इंतजार
नगर पालिका क्षेत्र में 1200 हैंडपंप लगे हैं। इनमें से 90 हैंडपंप पानी छोड़ चुके हैं लेकिन जल निगम ने रीबोर नहीं कराया। नगर पालिका के जलकल के अभियंता ओमप्रकाश ने बताया कि जब हैंडपंप पानी छोड़ देते हैं या कीचड़ और बालू आने लगती है तो दूसरा बोर ही एकमात्र उपाय रहता है।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग कारगर उपाय
सहायक भू भौतिकविद स्वप्निल राय का कहना है कि जलसंकट से निपटने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग ही एकमात्र उपाय है। बताया कि बोरिंग के लिए अनुमति जरूरी है। व्यावसायिक भवनों में बोरिंग के लिए अब तक 300 लोगों को अनुमति दी गई है। किसानों और घरेलू लोगों को इस दायरे से मुक्त रखा गया है।