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मंदिर से लेकर गंगा घाट तक लगेंगे जर्मन हैंगर
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विंध्याचल। मां विंध्यवासिनी मंदिर के परिक्रमा पथ का शिलान्यास व भूमि पूजन एक अगस्त को होना प्रस्तावित है। जीआईसी ग्राउंड में कार्यक्रम स्थल होने से विंध्याचल तक जोरदार तैयारी की जा रही है। बारिश की संभावना को देखते हुए जीआईसी ग्राउंड और विंध्याचल मंदिर परिसर में जर्मन हैंगर लगाया जा रहा है।
वाराणसी के कानू बाबू डेकोरेशन द्वारा मंदिर के परिक्रमा पथ से लेकर पक्का घाट तक वाटरप्रूफ पंडाल बनाया जा रहा है। यहां तक गंगा घाट की ऊंची सीढ़ियों की जगह लकड़ी की कम ऊंचाई वाली सीढ़ियां तैयार की जा रही हैं। गंगा जल आचमन के दृष्टिगत ऐसा किया जा रहा है। परिक्रमा पथ में 40 फीट चौड़ा 150 फीट लंबा वाटर प्रूफ पंडाल लगाया जा रहा है। भूमि पूजन के लिए भी 30 फीट चौड़ा 30 फीट लंबा पंडाल बनाया जा रहा है। इसमें भूमि पूजन एवं शिलान्यास की आधारशिला रखी जाएगी। इसके उपरांत एक विशेष पंडाल बनाया जाएगा, जिसमें वीआईपी के बैठने का प्रबंध रहेगा। इसके साथ ही मां विंध्यवासिनी मंदिर का रंग रोगन व साज सज्जा की जा रही है। मंदिर के अंदर एलईडी लाइट लगाई जा रही हैं। ताकि गर्भगृह के साथ परिसर में मौजूद अन्य विग्रहों के दर्शन पूजन में किसी प्रकार की समस्या न हो। यह लाइटें स्थायी तौर पर लगाई जाएंगी।
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वाराणसी के कानू बाबू डेकोरेशन द्वारा मंदिर के परिक्रमा पथ से लेकर पक्का घाट तक वाटरप्रूफ पंडाल बनाया जा रहा है। यहां तक गंगा घाट की ऊंची सीढ़ियों की जगह लकड़ी की कम ऊंचाई वाली सीढ़ियां तैयार की जा रही हैं। गंगा जल आचमन के दृष्टिगत ऐसा किया जा रहा है। परिक्रमा पथ में 40 फीट चौड़ा 150 फीट लंबा वाटर प्रूफ पंडाल लगाया जा रहा है। भूमि पूजन के लिए भी 30 फीट चौड़ा 30 फीट लंबा पंडाल बनाया जा रहा है। इसमें भूमि पूजन एवं शिलान्यास की आधारशिला रखी जाएगी। इसके उपरांत एक विशेष पंडाल बनाया जाएगा, जिसमें वीआईपी के बैठने का प्रबंध रहेगा। इसके साथ ही मां विंध्यवासिनी मंदिर का रंग रोगन व साज सज्जा की जा रही है। मंदिर के अंदर एलईडी लाइट लगाई जा रही हैं। ताकि गर्भगृह के साथ परिसर में मौजूद अन्य विग्रहों के दर्शन पूजन में किसी प्रकार की समस्या न हो। यह लाइटें स्थायी तौर पर लगाई जाएंगी।
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