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संभागीय प्रतियोगिता में प्रतिचि प्रथम
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सुंदर मुंदर जायसवाल नगर पालिका बालिका इंटर कॉलेज के सभागार में शुक्रवार को शास्त्रीय संगीत की संभागीय प्रतियोगिता आयोजित हुई। इसमें विजयी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। संभाग में बाल, किशोर व युवा वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को लखनऊ में प्रांतीय स्तर की प्रतियोगिता में शामिल होने का मौका मिलेगा। इसका आयोजन उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति मंत्रालय के प्रमुख आयाम राज्य संगीत नाटक अकादमी के तत्वावधान में किया गया।
प्रतियोगिता में प्रतिचि चतुर्वेदी प्रथम, वाणी अग्रवाल द्वितीय, अलंकृता रंजन तृतीय स्थान पर रहीं। स्वस्ती टंडन, सिमरन मिश्र, वसुदेव पांडेय, श्रेयांश कुमार, अभ्युदय रंजन, गरवित सिंह, ऐश्वर्य रानी ने बेहतर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का शुभारंभ देवी सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ हुआ। मुख्य अतिथि पद्मश्री अजिता श्रीवास्तव ने कहा कि संगीत कला मानवीय भावों की हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति है। यह हमारी अमूल्य धरोहर है, जो हमें विरासत के रूप में अपने पूर्वजों से प्राप्त हुई है। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ नागरिक संगठन के अध्यक्ष अरुण कुमार मिश्र ने कहा कि शास्त्रीय संगीत से भाईचारे को भी बढ़ावा मिलता है। कार्यक्रम के संभागीय संयोजक शैलेंद्र अग्रहरि ने कहा कि वैदिक काल में संगीत के सात स्वरों का आविष्कार हो चुका था। भारतीय संगीत एवं संस्कृति की इस धरोहर के उत्थान एवं संरक्षण के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। इस अवसर पर अकादमी की ओर से पद्मश्री अजिता श्रीवास्तव का विशेष सम्मान अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर किया गया।
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प्रतियोगिता में प्रतिचि चतुर्वेदी प्रथम, वाणी अग्रवाल द्वितीय, अलंकृता रंजन तृतीय स्थान पर रहीं। स्वस्ती टंडन, सिमरन मिश्र, वसुदेव पांडेय, श्रेयांश कुमार, अभ्युदय रंजन, गरवित सिंह, ऐश्वर्य रानी ने बेहतर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का शुभारंभ देवी सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ हुआ। मुख्य अतिथि पद्मश्री अजिता श्रीवास्तव ने कहा कि संगीत कला मानवीय भावों की हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति है। यह हमारी अमूल्य धरोहर है, जो हमें विरासत के रूप में अपने पूर्वजों से प्राप्त हुई है। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ नागरिक संगठन के अध्यक्ष अरुण कुमार मिश्र ने कहा कि शास्त्रीय संगीत से भाईचारे को भी बढ़ावा मिलता है। कार्यक्रम के संभागीय संयोजक शैलेंद्र अग्रहरि ने कहा कि वैदिक काल में संगीत के सात स्वरों का आविष्कार हो चुका था। भारतीय संगीत एवं संस्कृति की इस धरोहर के उत्थान एवं संरक्षण के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। इस अवसर पर अकादमी की ओर से पद्मश्री अजिता श्रीवास्तव का विशेष सम्मान अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर किया गया।
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