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विवाद के चलते वधू पक्ष ने विवाह से किया इंकार
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लालगंज क्षेत्र के एक गांव निवासी दूल्हे राजा के साथ बराती से किसी बात को लेकर विवाद होने के कारण द्वारचार के बाद लड़की पक्ष वालों ने शादी से इनकार कर दिया। इससे दूल्हे राजा समेत बराती मायूस हो गए। बड़े बुजुर्गों और रिश्तेदारों के रात भर मान- मनौव्वल के बाद भी विवाह नहीं होने पर विवाद बढ़ते देख सूचना मिलने पर दोनों पक्ष को चौकी इंचार्ज संत नगर ने चौकी में बुलाया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद दूल्हे राजा को बिना ब्याह बैरंग घर लौटना पड़ा।
लालगंज थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी के पुत्र की बरात इसी थाना क्षेत्र के एक गांव में गई थी। द्वारचार तक सब कुछ ठीक-ठाक रहा। बरातियों का घरातियों ने शौक से स्वागत किया। इसी बीच बरातियों ने घरातियों से किसी बात को लेकर विवाद और हाथापाई कर ली। इससे घराती पक्ष के शर्मा कोल 20 वर्ष को हल्की चोर्टें आइं। इससे नाराज घराती पक्ष के लोगों ने रात भर बरात को रोके रखा। कन्या के पिता विवाद होने के बाद विवाह के लिए किसी भी स्थिति में राजी नहीं हुए। वर और कन्या दोनों पक्ष एक दूसरे को पर दोषारोपण करते रहे। सुबह तक काफी प्रयास के बाद भी जब बात नहीं बनी तो किसी ने चौकी संतनगर को सूचना दे दी। सूचना मिलने के बाद चौकी इंचार्ज ने तत्काल पुलिस भेजकर दोनों पक्षों को थाने बुलवाया। चौकी इंचार्ज दयाशंकर ओझा ने दोनों पक्षों को बुलाकर बात की, लेकिन विवाह के लिए कन्या पक्ष किसी भी हाल में राजी नहीं हुआ। शर्त यह रखी कि लड़की के पक्ष से दिया गया दहेज वापस कर दिया जाए और लड़के पक्ष ने अपनी बात रखी कि उसके दिए गए गहने वापस किए जाएं। दोनों की सहमति से बिना ब्याह के दूल्हे को बरातियों के साथ घर वापस लौटना पड़ा। इस झगड़े से हंसी-ठिठोली के बीच सज धजकर तैयार दुल्हन को भी मायूसी हुई।
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लालगंज थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी के पुत्र की बरात इसी थाना क्षेत्र के एक गांव में गई थी। द्वारचार तक सब कुछ ठीक-ठाक रहा। बरातियों का घरातियों ने शौक से स्वागत किया। इसी बीच बरातियों ने घरातियों से किसी बात को लेकर विवाद और हाथापाई कर ली। इससे घराती पक्ष के शर्मा कोल 20 वर्ष को हल्की चोर्टें आइं। इससे नाराज घराती पक्ष के लोगों ने रात भर बरात को रोके रखा। कन्या के पिता विवाद होने के बाद विवाह के लिए किसी भी स्थिति में राजी नहीं हुए। वर और कन्या दोनों पक्ष एक दूसरे को पर दोषारोपण करते रहे। सुबह तक काफी प्रयास के बाद भी जब बात नहीं बनी तो किसी ने चौकी संतनगर को सूचना दे दी। सूचना मिलने के बाद चौकी इंचार्ज ने तत्काल पुलिस भेजकर दोनों पक्षों को थाने बुलवाया। चौकी इंचार्ज दयाशंकर ओझा ने दोनों पक्षों को बुलाकर बात की, लेकिन विवाह के लिए कन्या पक्ष किसी भी हाल में राजी नहीं हुआ। शर्त यह रखी कि लड़की के पक्ष से दिया गया दहेज वापस कर दिया जाए और लड़के पक्ष ने अपनी बात रखी कि उसके दिए गए गहने वापस किए जाएं। दोनों की सहमति से बिना ब्याह के दूल्हे को बरातियों के साथ घर वापस लौटना पड़ा। इस झगड़े से हंसी-ठिठोली के बीच सज धजकर तैयार दुल्हन को भी मायूसी हुई।
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