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निराजल रहकर पुत्र के दीर्घायु की कामना
mirzapur news
Updated Thu, 14 Sep 2017 12:40 AM IST
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पूजा
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माताओं ने बुधवार को जीवित्पुत्रिका पर्व पर निराजल रहकर पुत्र के दीर्घायु की कामना की। व्रत करने वाली महिलाओं ने सुबह विधि-विधान के साथ पूजन किया। शाम को गंगा, नदी व तालाबों पर हाथ में सजी थाल को लेकर गाजे-बाजे के साथ पहुंची और ज्यूतिया माई का पूजन और कथा श्रवण किया।
शाम चार बजे के बाद माताएं नया वस्त्र धारण कर थाल व टोकरी में पूजन की सामग्री लेकर घाटों पर पहुंचने लगीं। एक घंटे में ही घाट खचाखच भर गया। वहां पूजा की वेदी सजाई गई। बालू से ज्यूतिया माई की प्रतिमा बनाकर उनको धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया। कथा श्रवण किया। घाट पर इतनी भीड़ उमड़ गई, जिससे तिल रखने की जगह नहीं बची थी। भीड़ के चलते घाटों पर मेले जैसा दृश्य हो गया था। खिलौने, चाट पकौड़ी, बांसुरी, पूजन सामग्री आदि की खूब बिक्री हुई। बरिया घाट के आसपास चाट पकौड़ी, गुब्बारे, प्लास्टिक के खिलौनों आदि की अस्थाई दूकानें सज गई थीं। व्रती महिलाएं गुरुवार को सुबह सूर्य को अर्ध्य देंगी। प्रसाद में बनी खीर व पूड़ी को पूर्वजों गौ माता को अग्रासन निकालने के बाद पारण करेंगी। मान्यता है कि जीवित्पुत्रिका के पूजन से घर में महालक्ष्मी का वास होता है। सुख-समृद्धि की प्राप्ति भी होती है। अदलहाट, अहरौरा, सीखड़, लालगंज, जिगना, चुनार आदि इलाकों में भी जीवित्पुत्रिका का पूजन धूमधाम से किया गया।
प्रशासन ने नहीं कराई बैरिकेडिंग
नगर के पक्काघाट, बरिया घाट, विंध्याचल घाट, नारघाट, ओलियर घाट, सुंदर घाट आदि पर महिलाओं की भीड़ उमड़ी थी। घाट खचाखच भर गए थे। मगर प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त नहीं किए। घाटों पर जाने वाले रास्तों पर इस बार बैरियर नहीं लगाया गया था। कोई गहरे पानी में न चला जाए, इसका भी प्रबंध नहीं किया गया था। इससे श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। रास्तों पर कई बार छुट्टा पशुओं के घुस जाने से भगदड़ की स्थिति भी पैदा हुई।
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शाम चार बजे के बाद माताएं नया वस्त्र धारण कर थाल व टोकरी में पूजन की सामग्री लेकर घाटों पर पहुंचने लगीं। एक घंटे में ही घाट खचाखच भर गया। वहां पूजा की वेदी सजाई गई। बालू से ज्यूतिया माई की प्रतिमा बनाकर उनको धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया। कथा श्रवण किया। घाट पर इतनी भीड़ उमड़ गई, जिससे तिल रखने की जगह नहीं बची थी। भीड़ के चलते घाटों पर मेले जैसा दृश्य हो गया था। खिलौने, चाट पकौड़ी, बांसुरी, पूजन सामग्री आदि की खूब बिक्री हुई। बरिया घाट के आसपास चाट पकौड़ी, गुब्बारे, प्लास्टिक के खिलौनों आदि की अस्थाई दूकानें सज गई थीं। व्रती महिलाएं गुरुवार को सुबह सूर्य को अर्ध्य देंगी। प्रसाद में बनी खीर व पूड़ी को पूर्वजों गौ माता को अग्रासन निकालने के बाद पारण करेंगी। मान्यता है कि जीवित्पुत्रिका के पूजन से घर में महालक्ष्मी का वास होता है। सुख-समृद्धि की प्राप्ति भी होती है। अदलहाट, अहरौरा, सीखड़, लालगंज, जिगना, चुनार आदि इलाकों में भी जीवित्पुत्रिका का पूजन धूमधाम से किया गया।
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प्रशासन ने नहीं कराई बैरिकेडिंग
नगर के पक्काघाट, बरिया घाट, विंध्याचल घाट, नारघाट, ओलियर घाट, सुंदर घाट आदि पर महिलाओं की भीड़ उमड़ी थी। घाट खचाखच भर गए थे। मगर प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त नहीं किए। घाटों पर जाने वाले रास्तों पर इस बार बैरियर नहीं लगाया गया था। कोई गहरे पानी में न चला जाए, इसका भी प्रबंध नहीं किया गया था। इससे श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। रास्तों पर कई बार छुट्टा पशुओं के घुस जाने से भगदड़ की स्थिति भी पैदा हुई।
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