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घट रहा जलस्तर, संक्रामक बीमारियों का खतरा
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Sat, 27 Aug 2016 12:45 AM IST
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ंगा का जलस्तर कम होने से नगर के बदलीघाट का दिखने लगा मंदिर।
- फोटो : mirzapur
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लगातार दूसरे दिन भी गंगा के जलस्तर में घटाव जा रहा रहा। शक्रवार की शाम छह बजे तक गंगा का जलस्तर 78.00 रहा। जलस्तर घटने की जानकारी होने पर बाढ़ की डर से घरबार छोड़कर पयालयन करने वाले लोग धीरे धीरे लौटने लगे है। इसी के साथ अब मुसीबत भी बढ़ेगी। संक्रामक रोग फैलने की पूरी आशंका है। इसे रोकने की चुनौती जिला प्रशासन के समक्ष रहेगी। प्रशासन यदि समय रहते नहीं चेता तो परेशानियां बढ़ेंगी।
बता दें कि नौ दिनों तक तबाही मचाने के बाद लगातार दो दिनों से घट रही गंगा की जानकारी होने पर लोगों ने राहत की सांस ली है। प्रभावित गांवों में धीरे धीरे जन जीवन पटरी पर लौटने लगा है। शुक्रवार की शाम छह बजे 78.00 रहा, लेकिन अभी गंगा खतरे के निशान 77.724 से ऊपर बह रही है।
बरसात का मौसम अभी समाप्त नहीं होने से लोगों के मन पर अभी भी बाढ़ का खतरा सता रहा है। सभी के मन में यह डर बना हुआ हैं कि अभी एक महीने बरसात का मौसम बाकी है। बारिश होने पर दोबारा पानी बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में वह घर लौटे कि नहीं लौटे। लेकिन घर की याद सताने पर वह अपने सामानों व पशुओं को लेकर लौटने लगे हैं।
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छानबे, कोन व सीखड़ के कुछ लोग अपने अपने घर पर आने लगे है। जो गांव पानी से अब भी घिरा है वहां के लोग अभी भी शिविर में ही रहने को विवश है। वहीं एक सप्ताह से दिन रात खतरे की आशंका जताते हुए जाग रहे छानबे, कोन, सिटी, मझवां, पहाड़ी, सीखड़, नरायनपुर तथा जमालपुर ब्लाकों के लोगों की धड़कनें सामान्य होने लगी हैं।
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बता दें कि नौ दिनों तक तबाही मचाने के बाद लगातार दो दिनों से घट रही गंगा की जानकारी होने पर लोगों ने राहत की सांस ली है। प्रभावित गांवों में धीरे धीरे जन जीवन पटरी पर लौटने लगा है। शुक्रवार की शाम छह बजे 78.00 रहा, लेकिन अभी गंगा खतरे के निशान 77.724 से ऊपर बह रही है।
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बरसात का मौसम अभी समाप्त नहीं होने से लोगों के मन पर अभी भी बाढ़ का खतरा सता रहा है। सभी के मन में यह डर बना हुआ हैं कि अभी एक महीने बरसात का मौसम बाकी है। बारिश होने पर दोबारा पानी बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में वह घर लौटे कि नहीं लौटे। लेकिन घर की याद सताने पर वह अपने सामानों व पशुओं को लेकर लौटने लगे हैं।
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छानबे, कोन व सीखड़ के कुछ लोग अपने अपने घर पर आने लगे है। जो गांव पानी से अब भी घिरा है वहां के लोग अभी भी शिविर में ही रहने को विवश है। वहीं एक सप्ताह से दिन रात खतरे की आशंका जताते हुए जाग रहे छानबे, कोन, सिटी, मझवां, पहाड़ी, सीखड़, नरायनपुर तथा जमालपुर ब्लाकों के लोगों की धड़कनें सामान्य होने लगी हैं।