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पति समेत तीन को आजीवन कारावास
Updated Sat, 28 Oct 2017 12:26 AM IST
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मिर्जापुर। न्यायालय अपर जनपद न्यायाधीश फास्टट्रैक कोर्ट आलोक पांडेय ने पत्नी की हत्या के जुर्म में पति, सास व ससुर समेत तीन लोगों को शुक्रवार की दोपहर उम्र कैद की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर 30-30 हजार रुपये के अर्थदंड लगाकर जेल भेज दिया।
अभियोजन अनुसार चील्ह थाना क्षेत्र के मलाधरपुर गांव निवासी बच्चालाल के पुत्र अजय कुमार की शादी पांच वर्ष पूर्व भदोही जनपद के ज्ञानपुर कोतवाली क्षेत्र के नेवादा जाठी गांव निवासी एवं वादी मुकदमा चंद्रबली की पुत्री पूनम उर्फ चंदा देवी के साथ हुआ था। जिसकी मौत 15 जुलाई 2012 को हो गई थी। जिसमें मृतका के पिता चंद्रबली ने सभी आरोपियों के खिलाफ धारा 498 ए,304 बी व 3,4 डीपी एक्ट के तहत चील्ह थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना करते हुए आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी इस्लाम अहमद खान ने दस गवाह प्रस्तुत कराये। जिसकी सुनवाई शुक्रवार को की गई। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों के बयान तथा अधिवक्ताओं की दलील के आधार पर न्यायालय ने पति अजय कुमार, सास मुनरा देवी तथा ससुर बच्चालाल को धारा 302, 34 भादवी में दोषसिद्घ पाते हुए सभी को आजीवन कारावास के साथ प्रत्येक को 30-30 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
मारपीट में चार को एक वर्ष की कैद
मिर्जापुर। प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनोज कुमार द्वितीय ने परिवादी सुभाष कुमार सिंह निवासी मुजहरा थाना चील्ह द्वारा न्यायालय में परिवाद दाखिल किया गया था न्याय की गुहार लगाई थी। बताया था कि 25 अक्तूबर 2001 को उसका भाई राजकुमार सिंह चील्ह थाना क्षेत्र के ही हुसैनीपुर गांव निवासी शिवशंकर उर्फ टकौरी, बुद्घू, घुरई, भगवानदास जो एक ही परिवार के हैं। इनके यहां कालीन धुलाई एवं उसकी खिंचाई का काम करने जाता था। इनके पास पांच छह महीने की मजदूरी बाकी थी। दशहरा वाले दिन जब उसका भाई आरोपियों के घर गया और अपना हिसाब मांगने लगा तो चारों आरोपियों ने उसे घर में बंद कर लात मुक्का से इतना मारा कि वह खून की उल्टी करने लगा। पुलिस के उच्चाधिकारियों को तहरीर देने के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं करने पर न्यायालय में परिवाद दाखिलकर न्याय की याचना की। परिवादी ने न्यायालय में चार गवाह प्रस्तुत कराये। जिसकी सुनवाई करते हुए न्यायालय ने चारों आरोपियों को धारा 323,504, 506 भादवी में दोषसिद्घ पाते हुए एक वर्ष की कैद तथा प्रत्येक को पांच पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड की राशि से दस हजार रुपया पीड़ित राजकुमार सिंह को देने का आदेश दिया।
अभियोजन अनुसार चील्ह थाना क्षेत्र के मलाधरपुर गांव निवासी बच्चालाल के पुत्र अजय कुमार की शादी पांच वर्ष पूर्व भदोही जनपद के ज्ञानपुर कोतवाली क्षेत्र के नेवादा जाठी गांव निवासी एवं वादी मुकदमा चंद्रबली की पुत्री पूनम उर्फ चंदा देवी के साथ हुआ था। जिसकी मौत 15 जुलाई 2012 को हो गई थी। जिसमें मृतका के पिता चंद्रबली ने सभी आरोपियों के खिलाफ धारा 498 ए,304 बी व 3,4 डीपी एक्ट के तहत चील्ह थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना करते हुए आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी इस्लाम अहमद खान ने दस गवाह प्रस्तुत कराये। जिसकी सुनवाई शुक्रवार को की गई। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों के बयान तथा अधिवक्ताओं की दलील के आधार पर न्यायालय ने पति अजय कुमार, सास मुनरा देवी तथा ससुर बच्चालाल को धारा 302, 34 भादवी में दोषसिद्घ पाते हुए सभी को आजीवन कारावास के साथ प्रत्येक को 30-30 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
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मारपीट में चार को एक वर्ष की कैद
मिर्जापुर। प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनोज कुमार द्वितीय ने परिवादी सुभाष कुमार सिंह निवासी मुजहरा थाना चील्ह द्वारा न्यायालय में परिवाद दाखिल किया गया था न्याय की गुहार लगाई थी। बताया था कि 25 अक्तूबर 2001 को उसका भाई राजकुमार सिंह चील्ह थाना क्षेत्र के ही हुसैनीपुर गांव निवासी शिवशंकर उर्फ टकौरी, बुद्घू, घुरई, भगवानदास जो एक ही परिवार के हैं। इनके यहां कालीन धुलाई एवं उसकी खिंचाई का काम करने जाता था। इनके पास पांच छह महीने की मजदूरी बाकी थी। दशहरा वाले दिन जब उसका भाई आरोपियों के घर गया और अपना हिसाब मांगने लगा तो चारों आरोपियों ने उसे घर में बंद कर लात मुक्का से इतना मारा कि वह खून की उल्टी करने लगा। पुलिस के उच्चाधिकारियों को तहरीर देने के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं करने पर न्यायालय में परिवाद दाखिलकर न्याय की याचना की। परिवादी ने न्यायालय में चार गवाह प्रस्तुत कराये। जिसकी सुनवाई करते हुए न्यायालय ने चारों आरोपियों को धारा 323,504, 506 भादवी में दोषसिद्घ पाते हुए एक वर्ष की कैद तथा प्रत्येक को पांच पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड की राशि से दस हजार रुपया पीड़ित राजकुमार सिंह को देने का आदेश दिया।
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